कविता

  • नैना बावरे जुल्फो में उलझाने लगे

    नैना बावरे जुल्फो में उलझाने लगे     दिल मचलने लगे अश्क बहने लगे हमे तुम्हे याद करके बहकने लगे   नजरे जब भी मिली मुस्कुराने लगे फूल गुलशन मे देखो गुनगुनाने लगे खिलकर भवरों के मन बहकाने लगे दिल को अपने यूॅ भी समझाने लगे दिल मचलने लगे अश्क बहने लगे हमे तुम्हे याद…

  • किताबें

    किताबें *** खाली अलमारियों को किताबों से भर दो, बैठो कभी तन्हा तो निकाल कर पढ़ लो। हो मन उदास तो- उठा लो कोई गीत गजल या चुटकुले कहानियों की किताब, पढ़कर भगा लो अवसाद। ये जीवनसाथी हैं, दोस्त हैं। दवा हैं, मार्गदर्शक हैं। समय समय पर उन्हें निहारो, समझो परखो विचारो। गूढ़ बात अपना…

  • स्वच्छता है जरूरी

    स्वच्छता है जरूरी ***** रखें ध्यान इसका विशेष, जन जन को दें यह संदेश। इसी से आती खुशहाली, दूर रहे संक्रमण बीमारी। जो स्वच्छ रहे परिवेश हमारा, तो स्वस्थ हो जाए जीवन प्यारा; गांधी जी का यही था नारा। सुन लो मेरे राज दुलारे, कह गए हैं बापू प्यारे। इधर उधर न कूड़ा डालो, बात…

  • ए दिल सुन जरा

    ए दिल सुन जरा   1 उसकी यादों में दिन कटता उसके ख़्वाबों में रातें कटती ए दिल सुन जरा तू भूल जा उसको ज़रा 2 जो तेरा नहीं हुआ है उसको क्या याद करना भला ए दिल सुन ज़रा तू भूल जा उसको ज़रा 3 किया था वादा उसनें साथ निभाने का कभी और…

  • तुमसा बेवफा जमाने में नहीं

    तुमसा बेवफा जमाने में नहीं   जब भी छेडा किस्सा वो पुराना, प्रेम से मैं महीनों सो ना न पाई चैन से मेरा दिल बेचैन था उस अनजानी सी टीस से  मैं महीनों सो ना पाई चैन से तुमतो मुडकर खो गए अपनी दुनियाँ में कहीं तेरी आहट से धड़कता दिल रहा मैं वहीं से…

  • खरगोश की खरीददारी

    खरगोश की खरीददारी ******* लाए बाजार से शशक दो रखा नाम काॅटन और स्नो। व्यय किए रुपए अर्द्ध सहस्र, बच्चे दोनों से खेलने में हैं व्यस्त। परेशान किए थे सप्ताह भर से, रट लगाए थे- पापा ला दो न झट से। बाजार नहीं है इसका यहां, भटका सप्ताह भर जहां तहां। यीष्ट मित्रों को फोन…

  • सबकी इच्छा पूर्ति मुश्किल है

    सबकी इच्छा पूर्ति मुश्किल है ******** बढ़ती चाहतों ने जिंदगी को दुश्वारियों से भर दिया है बहुत कुछ किया है बहुत कुछ दिया है पर सुनने को बस यही मिला है! क्या किया है? क्या किया है? सुन आत्मा तक रो दिया है, बेचैन हो- आसमां से अर्ज किया है। कुछ और नेमतों से नवाज़…

  • अनोखा आंदोलन!

    अनोखा आंदोलन! **** कृषि कानूनों के खिलाफ अन्नदाता आंदोलनरत हैं, भीषण सर्दी में ही- दिल्ली बार्डर पर दिए दस्तक हैं। भीड़ बढ़ती जा रही है! ठसाठस सड़कों पर डटे हैं, सरकारी दमनचक्र के बावजूद- टस से मस नहीं हो रहे हैं। तू डाल डाल, मैं पात पात की नीति पर चल रहे हैं, शासन की…

  • रात पूस की!

    रात पूस की! **** पवन पछुआ है बौराया, बढ़ी ठंड अति- हाड़ मांस है गलाया! नहीं है कोई कंबल रजाई, बिस्तर बर्फ हुई है भाई। किट किट किट किट दांत किटकिटा रहे हैं, कांपते शरीर में नींद कहां? निशा जैसे तैसे बिता रहे हैं। चुन बिन कर लाए हैं कुछ लकड़ियां- वहीं सुनगा रहे हैं,…

  • स्वतंत्रता

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …