हिंदी कविता

  • डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्मदिन

    डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्मदिन ******** आज जन्मदिन है बाबू राजेंद्र की उपलक्ष्य में इनके मन रही है मेधा दिवस भी। शत् प्रतिशत अंक यही लाए थे परीक्षक को भी चौंकाए थे परीक्षार्थी परीक्षक से है उत्तम इसलिए अंक दे रहा हूं महत्तम ये टिप्पणी थी परीक्षक की उन्हें भी लोहा माननी पड़ी बाबू राजेंद्र…

  • पौधा संरक्षण है जरूरी

    पौधा संरक्षण है जरूरी ****** आओ मिलकर ठान लें पौधों की न जान लें महत्त्व उसकी पहचान लें अपना साथी मान लें वायु प्राण का है दाता फल फूल बीज दे जाता जीवन भर प्राणी उसे है खाता आश्रय भी है पाता फिर भी उसकी रक्षा करने से है कतराता जिस दिन नष्ट हो जाएगा…

  • श्रीगंगा-स्तुति

    श्रीगंगा-स्तुति (गंगा दशहरे के शुभ अवसर पर)   जगत् पावनी जय गंगे। चारों युग त्रिलोक वाहनी त्रिकाल-विहारिणी जय गंगे।।   महा वेगवति, निर्मल धारा, सुधा तरंगिनी जय गंगे। महातीर्था, तीर्थ माता , सर्व मानिनी जय गंगे।।   अपारा, अनंता, अक्षुण्ण शक्ति, अघ-हारिणी जय गंगे। पुण्य-मोक्ष-इष्ट प्रदायिनि, भव-तारिणी जय गंगे।।   “कुमार”मन पावन करो ,शिव जटा…

  • जानें कब आएंगे अपने अच्छे दिन!

    जानें कब आएंगे अपने अच्छे दिन! ******** गरीबों तुमने.. बहुत कुछ झेला है! बहुत कुछ झेलना बाकी है, इतिहास इसका साक्षी है। अभी महामारी और कोरोना का दौर है, गरीबों के लिए यहां भी नहीं कोई ठौर है। सरकारों की प्राथमिकता में अभी कुछ और है, सेवा सहानुभूति का नहीं यह दौर है। धनवान निर्धन…

  • क्या कहूं! ये इश्क नहीं आसां

    क्या कहूं! ये इश्क नहीं आसां ******** साजिश की बू आ रही है घड़ी घड़ी उसकी याद आ रही है इंतजार करके थक गया हूं फिर भी नहीं आ रही है। क्या ऐसा करके मुझे सता रही है? क्या कहूं ? साजिश की बू आ रही है यूं ही तो नहीं मुझे तड़पा रही है…

  • लालच बुरी बलाय

    लालच बुरी बलाय ***** सदैव हलाल की कमाई खाएं, किसी के आगे हाथ न फैलाएं। ऊपर वाला जिस हाल में रखें- ख़ुशी ख़ुशी जीवन बिताएं, आवश्यकता से अधिक न चादर फैलाएं; बस अपना काम ईमानदारी से करते जाएं। बरकत और अल्ल्लाह की रहमत- खुद चलकर आपके द्वार आए, फिर काहे को हाय हाय? सब जानते…

  • बातें

    बातें * करो सदा पक्की सच्ची और अच्छी! वरना… ये दुनिया नहीं है बच्ची, सब है समझती। समझाओ ना जबरदस्ती! बातें… ओछी खोखली और झूठी नहीं हैं टिकतीं। जगह जगह करा देतीं हैं बेइज्जती! सच्चाई छुप नहीं सकती, बेवक्त है आ धमकती! होश फाख्ता कर देती है, सिर झुका देती है। तेज़ ही उसकी इतनी…

  • मां की वेदना

    मां की वेदना   मां कोख में अपने खून से सींचती रही।   अब तुम बूंद पानी  देने को राजी नहीं।   मां थी भूखी मगर भरपेट खिलाती रही।   अब तुम इक रोटी देने को राजी नहीं।    मां थी जागती रात भर  गोद में सुलाती रही।    अब तुम इक बिस्तर  देने को…

  • वक्त रुका ही नहीं कभी किसी के लिए

    वक्त रुका ही नहीं कभी किसी के लिए     ऊंचे नीचे पथरीले रास्ते का प्रारब्ध सफर कारवां गुजर जाने के बाद धुंधला दिखा   जीवन का बहुमूल्य अंश बीत जाने पर अस्थिर और अविचर सी दशा में रुका   बीते लम्हेंआंखों में कैद कुछ इस तरह हुए डूबे  जैसे दरिया में हम समंदर छोड़कर…

  • गिला- शिकवा नहीं करते कभी ज़ालिम ज़माने से

    गिला- शिकवा नहीं करते कभी ज़ालिम ज़माने से     गिला- शिकवा नहीं करते कभी ज़ालिम ज़माने से। न बेशक बाज़ आता है अभी भी दिल दुखाने से।।   सदा मस्ती में रहते है भुला के ग़म जहां भर के। बहाते अब नहीं आंसू किसी के भी रुलाने से।।   नहीं अब दिल पे लेते…