Tunn Tunnu ki Holi

टुन्न टुन्नू की होली | Kavita Tunn Tunnu ki Holi

टुन्न टुन्नू की होली

( Tunn Tunnu ki Holi )

 

अबकी बेरिया होली मइहां,
टुन्नू भइया पीकर भंग।
चटक मटक होरिहारन संग,
दिन भर रहे बजावत चंग।

सांझ भई तो घर का पहुॅचे,
देखि भये बड़कउनू दंग।
मंझिला भौजी मिलीं दुवरिया,
नैन मटक कर खींची टंग।

छमिया भरी बाल्टी उड़ेली,
ढलकि गये तब सगरे रंग।
नहा, पहिन के वस्त्र लकालक,
बदल गया है सब रंगढंग।

नेह लुटाके बिठाके पीढ़ा,
छमिया धरा सजाकर थाल।
देखि के सगरे व्यंजन हुइगे,
टुन्नू भइया मालामाल।

दुनहुन के जब नैन मिले,
तो हुये इशारे अलबेले।
प्रीति कि रीति कहां पहुंची,
ये जाने न कोई रसीले झमेले।

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

हे कवि कुछ ऐसा गीत लिखो | Poem Hey Kavi

Similar Posts

  • सावन आया | Sawan Aaya

    सावन आया  नयी चेतना  नयी जाग्रत  अंतर्मन में  नया भाव कुछ  मन को भाया, गूॅंज उठे स्वर झूॅंम उठे वन प्रकृति ने भी  नव मधुरस का  पान कराया, लतिकाएं तरु आलिंगन कर  लिपट लिपट कर  नतमस्तक  साभार जताया, रिमझिम रिमझिम  बूॅंदें जल की  छोड़ गगन को  उतर धरा पर  उपवन का  संसार बसाया, स्पर्श प्रेम…

  • सविता जी की कविताएँ | Savita Hindi Poetry

    पुरानी तस्वीर कुछ तस्वीरें पुरानी सी है। बीते दिनों की आखिरी निशानी सी है। पुराने होकर भी कुछ किस्से पुराने नहीं लगते। अंजान होकर भी कुछ लोग अनजाने नहीं लगते। यूं तो अक्सर हम आगे बढ़ जाते हैं वक्त के साथ । फिर भी कुछ लम्हे वहीं ठहर जाते हैं अपनों के पास। कभी-कभी लगता…

  • शान तिरंगे की | Tiranga par kavita

    शान तिरंगे की ( Shaan tiranga ki )     सबसे ऊंची आज जगत् में शान तिरंगे की । वर्षों बाद लौटी है पहचान तिरंगे की।।   अब बीच खङी ये नफ़रत की दीवार गिरने दो। अमन पैग़ाम है इसका समझो जुबान तिरंगे की।।   तलवारें वहशत की लेकर ना काटो डोर उलफत की। सलामत…

  • सुनील कुमार “खुराना” की कविताएँ | Suneel Kumar Khurana Poetry

    जग गोकुल में आनंद भयों देते सब बधाई जग गोकुल में आनंद भयों देते सब बधाई,सारी सृष्टि में सब खुश हैं बहना क्या भाई। काली-काली रात में कान्हा गोकुल आएं,गोकुल में नन्दलाल यशोदा के मन भाए,आने से कान्हा के दूर हुई सबकी तन्हाई। निराला रूप सब जन के मन को भाया,सब खुशियों को कान्हा अपने…

  • आखिर में | Aakhir Mein

    आखिर में ( Aakhir Mein )    आज के इस विकास शील माहौल में घर का मुखिया होना गुनाह नहीं है किंतु , परिवार के भविष्य के लिए स्वयं के भविष्य को भुला देना ही सबसे बड़ा गुनाह है बेशक, परिवार आपका है जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व आपकी है धर्म कर्म सभी परिवार के लिए जरूरी…

  • टूटता तारा | Tootata Tara

    टूटता तारा ( Tootata tara )    एक रात बातों के मध्य तुम एकाएक खामोश हो गए थे मेरे पूछने पर मुझसे कहा मांग लो तुम्हें जो दुआ में माँगना है आज तुम्हारी मुराद पूरी हो जायेगी मैंने कहा – कैसे ? तुमने इशारा किया टूटते तारे का जिससे मैं थी अनभिज्ञ देख लो मेरी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *