Unka Kirdar

उनका किरदार | Unka Kirdar

उनका किरदार

( Unka kirdar )

उनका किरदार है क्या उनको बताया जाये
आइना अहले -सियासत को दिखाया जाये

जलने वालों को ज़रा और जलाया जाये
ख़ाली बोतल ही सही जश्न मनाया जाये

ज़ुल्म ही ज़ुल्म किये जाता है ज़ालिम हम पर
अब किसी तौर सितमगर को डराया जाये

इस ग़रीबी से बहरहाल निपटने के लिए
जो हुनर है उसे हथियार बनाया जाये

हो चुकी जंग बहुत आज ये तौबा कर के
अम्न का गीत ज़माने को सुनाया जाये

एक मुद्दत से दिलासे ही सुने हैं हमने
काश इन ज़ख़्मों पे मरहम भी लगाया जाये

सिर्फ़ कहना ही ज़ुबां से नहीं काफ़ी साग़र
भाई को भाई का अहसास कराया जाये

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
यह भी पढ़ें:-

उन्हीं पर हक़ नहीं अब तो हमारा | Haq Shayari

Similar Posts

  • दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना

    दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना।आपकी दिलकशी का क्या कहना। आपके मरमरी से क़ालिब पर।चांद की चांदनी का क्या कहना। दिल परेशान हैं गुलाबों के।आपकी नाज़ुकी का क्या कहना। लूट लेती है आन में दिल को।ह़ुस्न की कजरवी का क्या कहना। इस पे क़ुर्बान सीमो-ज़र सारे।प्यार की…

  • क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआ

    क्या हुआ कैसे हुआ क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआजो हुआ वो था नहीं सोचा हुआ फिर से रस्ते पर निकल आए हैं लोगफिर से देखा वो ही सब देखा हूआ दर्द तन्हाई अंधेरा सब तो हैंमैं अकेला तो नहीं बैठा हुआ उड़ गयी उल्फ़त किसी दीवार सेधूप में धुंधला गया लिख्खा हुआ इक रियासत…

  • बिखर न जाऊँ | Ghazal Bikhar na Jaoon

    बिखर न जाऊँ ( Bikhar na Jaun )   तेरा फ़िराक़ है इक मौजे जाँसितां की तरह बिखर न जाऊँ कहीं गर्दे-कारवां की तरह न डस लें मुझको ये तारीक़ियाँ ये सन्नाटे उजाला बन के चले आओ कहकशां की तरह मेरे फ़साने में रंगीनियां ही हैं इतनी सुना रहे हैं इसे लोग दास्तां की तरह…

  • आप की याद | Ghazal Aap ki Yaad

    आप की याद ( Aap ki Yaad ) शादमानी का एक लशकर है। आप की याद सब से बेहतर है। दिल ही मिट जाएगा मिटाएं तो। आप का नाम दिल के अन्दर है। किसकी किससे मिसाल दें बोलो। एक से एक जग में बरतर है। मोह लेता है आन में दिल को। आप का ह़ुस्न…

  • अदा के नाम पे | Ada ke Naam Pe

    अदा के नाम पे ( Ada ke Naam Pe ) अदा के नाम पे ये बेहिसाब बेचते हैंकि हुस्न वाले खुलेआम ख़्वाब बेचते हैं जिन्हें शऊर नही है बू ओर रंगत कावो काग़ज़ों के यहाँ पर गुलाब बेचते हैं अमीर लोगो की फितना परस्ती तो देखोजला के घर वो ग़रीबों का आब बेचते हैं मुहब्बतों…

  • चालाकियां चलता रहा

    चालाकियां चलता रहा ( ग़ज़ल : दो काफ़ियों में ) मुफ़लिसी से मेरी यूँ चालाकियाँ चलता रहाज़हनो-दिल में वो मेरे ख़ुद्दारियाँ भरता रहा मैं करम के वास्ते करता था जिससे मिन्नतेंवो मेरी तक़दीर में दुश्वारियाँ लिखता रहा मोतियों के शहर में था तो मेरा भी कारवाँफिर भला क्यों रेत से मैं सीपियाँ चुनता रहा कहने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *