यादें

यादें | Kavita

यादें

( Yaaden )

 

बड़ी सुहानी लगती यादें, प्रेम भरी मनभावन सी।
उर उमंग हिलोरे लेती, झड़ी बरसते सावन सी।

 

सुख-दुख के मेंघ मंडराये, यादें बस रह जाती है।
घड़ी घड़ी पल पल रहकर, यादें पुरानी आती है।

 

हंसी खुशी के सुंदर पल, रह रहकर याद आते हैं।
जैसे बहती सरिता धारा, किनारे रह जाते हैं।

 

गांव की जब याद आए, सुकून देती ठंडी बहार।
मन मयूर नाच उठता, उर उमड़ता हर्ष अपार।

 

निर्भय रह स्वछंद घूमना, जोश नया जगा देती।
पाठशाला की यादें भी, बचपन की सैर करा देती।

 

उल्लास खुशी घट उमड़े, जीवन राह दिखाती है।
यादें बने ज्योति जीने की, उन्नति पथ बतलाती है।

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कत्ल कलम से | Kavita

Similar Posts

  • हे राम | Hey Ram

    हे राम! ** कर जोड़ करूं तेरा वंदन, हे रघुनंदन ! हे रघुनंदन। दशरथ-कौशल्या के नंदन, तीनों लोक करे तेरा वंदन; महादेव इन्द्र ब्रह्मा भी करें पूजन। अतातायियों के हो संहारक, सतपथ के हो सृजन कारक। दुष्ट पापियों के हो काल, दशानन के हमने देखें हैं हाल। लंका जलाकर खाक किए, विभीषण राज्य स्थापित किए।…

  • अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए | Annadata par kavita

    अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए ( Annadata ka dhara par maan hona chahiye ) ******** अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए, उनके हित में भी कभी कुछ काम होना चाहिए। विषम परिस्थितियों में कठिन श्रम कर अन्न उगाते हैं, स्वयं भूखे रहकर भी देश को खिलाते हैं। खाद पानी बीज के लिए…

  • ऊन का चोला | Ooni kapda par kavita

    ऊन का चोला ( Oon ka chola)      यह बदन है सभी का भैया मिट्टी का ढेला, ना जानें कब हो जाऍं किसका फिसलना। शर्म ना कर प्राणी पहन ले ऊन का चोला, बिठूर रहा है बदन जरा संभलकर चलना।।   पहनकर घूमना फिर चलना चाहें अकेला, हॅंसना-हॅंसाना पहनकर फिर तू उछलना। न करना…

  • गंगा मइया | Ganga Maiya

    गंगा मइया  ( Ganga maiya )    गंगा मइया कै निर्मल लहरिया, नहाये चला काशी शहरिया। राजा भगीरथ ने गंगा को लाया, रोज -रोज करती पावन वो काया। छोड़ा ई रोज कै बजरिया, नहाये चला काशी शहरिया, गंगा मइया कै निर्मल लहरिया, नहाये चला काशी शहरिया। शिव की जटा से निकली है गंगा, धो करके…

  • योग पर कविता | Poem on Yoga in Hindi

    योग पर कविता ( Yoga par kavita )    थका हुआ जब पाओ तुम योगा को अपनाओ तुम योगा से भागे रोग सभी खुशियां होंगी पास तभी अनुलोम-विलोम किया करो जीवन जी भर जिया करो बच्चे बूढ़े हो या जवान योग से मिलता आराम सुबह सवेरे उठ जाओ निवृत्त सबसे हो आओ योगा से ताजगी…

  • श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा विशेष

    श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा विशेष   महलों में रहने वाला वन में रहा, बीते बरसो तक जंगलों में गुमनाम रहा, खत्म हुई इंतजार की घड़ियां, आज घर घर बस एक ही नाम गूंज रहा, हर मां आज कौशल्या बनी, हर भाई आज भरत सा राह तक रहा, जगमग सारा आज जग हुआ, हर शहर आज अयोध्या…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *