यह दिलकशी तुम्हारी

यह दिलकशी तुम्हारी | Yeh Dilkashi Tumhari

यह दिलकशी तुम्हारी

( Yeh Dilkashi Tumhari )

दिल को लुभा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।
नींदें चुरा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।

यह चांद सी जवानी यह ज़ाफ़रानी रंगत।
फिर उसपे ओढ़नी की यह आसमानी रंगत।
सच पूछिए तो जानू रह-रह के मेरे दिल में।
हलचल मचा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।
नींदें चुरा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।

फूलों की अन्जुमन में तारों भरे नगर में।
तुम सा ह़सीन कोई आता नहीं नज़र में।
कैसे कहूं मैं तुमसे आती है लाज मुझको।
पागल बना रही है यह दिलकशी तुम्हारी।
नींदें चुरा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।

होंठों का यह तबस्सुम उसपर ह़या के मंज़र।
बिजली गिरा रहे हैं नाज़-ओ-अदा के मंज़र।
देखो न ऐसे मुझ को हो जाऊंगा मैं घायल।
जादू जगा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।
नींदें चुरा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।

नज़रों से जाम पीकर मख़मूर हो रहा हूं।
अपनी ख़ुदी से ख़ुद ही अब दूर हो रहा हूं।
जाना कहां था मुझको जाने लगा कहां पर।
रस्ता भुला रही है यह दिलकशी तुम्हारी।
नींदें चुरा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।

दिल को लुभा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।
नींदें चुरा रही है यह दिलकशी तुम्हारी।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

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