जब भी कोई काम करो | Kavita jab bhi koi kaam karo

जब भी कोई काम करो

( Jab bhi koi kaam karo )

 

जब भी कोई काम करो

कोई मुझे देख रहा है

यही सोचकर करो

दिल पर जरा हाथ रखो

उसने सही कहा तभी करो

नफरतों कि आंधियों में

झूठा दोष किसी को ना दो

ईमान से इनाम के हकदार

तुम बन जाते हो कब कहां

यह जानकर ही तुम सदा

अपने कदम  रखा करो

इंसाफ की जब बात करो

यह ध्यान रखो तुम सदा

लहू के कतरे कतरे मे

तेरे भगवान बसता है l

ले जाने  से पहले तुझे भी

तेरे  हर कर्म का चुकता

 पूरा हिसाब करता हैl

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

हंस लो जरा मुस्कुरा लो | Poem Hans lo Jara

Similar Posts

  • काले बादल | Kale badal kavita

    काले बादल ( Kale badal )   घिर आये सब बादल काले ठंडी ठंडी बूंदों वाले ताल तलैया सब भर जाओ मेघ तुम घटाओ वाले   चहक उठे चमन सारे प्रेम की बहती हो बहारें खेतों में हरियाली छाई खूब बरसो मेघा प्यारे   अधरों पर मुस्कान देकर बूंदों से तन मन भिगोकर मन मयूरा…

  • समय चुराएं | Poonam singh poetry

     समय चुराएं  ( Samay churaye )   आओ … समय से कुछ समय चुराएं शुन्य के सागर में गुम हो जाएं बीती बातों का हिसाब करें आने वाले पलों का इंतज़ार करें भूली यादों को याद करें बीती चाहतों को ताज़ा करें   कुछ बातें इधर की हों कुछ बातें उधर की हों इधर –…

  • शिक्षक की अभिलाषा | Shikshak diwas par kavita

    शिक्षक की अभिलाषा ( Shikshak ki abhilasha )   चाह नहीं बी एल ओ बनकर, रोज गांव में टेर लगाऊं। चाह नहीं संकुल बी आर सी, चक्कर कांटू मेल बनाऊं।।   चाह नहीं डाकें भर भर के, बनूं बाबू सा मैं इतराऊं। चाह नहीं मध्यान्ह चखूं और, राशन पानी घर ले जाऊं।।   मुझे छोड़…

  • ट्वीटर की धृष्टता

    ट्वीटर की धृष्टता ***** ट्वीटर वालों ने हमारे देश की आजादी, संप्रभुता, उदारता से खिलवाड़ किया है धृष्टता की है,मूर्खता की है इतना ही नहीं तकनीकी खामी बता- आरोपों से बचने की कोशिश की है। हमारी संप्रभुता से खिलवाड़ किया है, जम्मू एवं कश्मीर को- चीन में दिखाने का दुस्साहस किया है; लद्दाख को- जम्मू-कश्मीर…

  • नवरात्र के प्रसाद में | Navratra

    नवरात्र के प्रसाद में ( Navratra ke Prasad mein )    सृजनात्मकता प्रस्सपुरण,नवरात्र के प्रसाद में परम काल चेतना जागरण, रज रज मांगलिक भोर । नव नौ रूप मां अनूप दर्शन, शक्ति भक्ति अलौकिक छोर । तमोगुणी शोध विवेचना, जय माता दी संवाद में । सृजनात्मकता प्रस्सपुरण, नवरात्र के प्रसाद में ।। आराधना शीर्ष स्पर्शन,…

  • पिता होते हैं महान | Pita par poem

    पिता होते हैं महान ( Pita hote hain mahaan )  पिता जी आप महान, हम आपकी संतान । हम-सब के हैं अभिमान, नित्य गाएं आपका ही गुणगान। आपके कंधों पर बैठकर जाने दुनिया जहान, मिली आप ही से है पहचान; बनें हैं जो सभ्य इंसान। पिताजी आप महान…. उंगली पकड़ हमें चलना सिखाए, सारे नाज…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *