Bholenath par Kavita

प्यारा भोलेनाथ को है सावन | Bholenath par Kavita

प्यारा भोलेनाथ को है सावन

( Pyara bholenath ko hai sawan ) 

 

यह महीना है प्यारा-न्यारा सावन,
सभी के मन को सावन है भावन।
सोमवार इसमे है भोले को प्यारा,
शिवपूजा आराधना विधान सारा।।

सावन के पहले-आख़री सोमवार,
सावन का परम्परा व्रत एवं स्नान।
प्यारा भोले नाथ को भी है सावन,
जुलाई अगस्त में ‌आए पर्व पावन।।

मनोकामना पूर्ण करते भोलेबाबा,
सोमवार व्रत का महत्व है ज्यादा।
दर्शन करते है श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग,
हिंदू धर्म में इसकी बहुत है गाथा।।

पूर्व दिशा से होती शिव आराधना,
एव सायं समय ये पश्चिम साधना।
धतूरे-फूल अर्पित ‌करते भोले को,
सर्वश्रेष्ठ है सोमवार शिवउपासना।।

सावन का लहंगा एवं चुनरी ख़ास,
आ रही होती है जब यह बरसात।
सावन में लगाते बागों में यह झूले,
सब देवों के देव है यही भोलेनाथ।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -अंतर्द्वंद

    अंतर्द्वंद ( Antardwand ) ** लौट आई हैं वो जाकर, धूल धूसरित बदहवास चौखट खड़ी निराश अचंभित घरवाले सभी और नौकर चाकर। प्रश्न अनेक हैं मन में लगी आग है तन में क्या कहूं? क्या करूं सवाल? हो जाए न कुछ बवाल! सोच सभी हैं खामोश, फिर स्वागत का किया जयघोष। पहले अंदर आओ! जा…

  • नारी हो तुम | Nari par Kavita

    “नारी हो तुम “ ( Nari ho tum )    जगत मैं आई हो तो, संसार का कुछ उद्धार करो! अपने अस्तित्व की एक नई , फिर से तुम शुरुआत करो जो जग में जाने जाते हैं , वही वीर कहलाते हैं तुम नारी हो शक्ति स्वरूपा नारायणी जैसा तुम काम करो ! हो समाज…

  • जीत की आदत | Kavita jeet ki aadat

    जीत की आदत  ( Jeet ki aadat )  जीत की आदत बनाना ही होगा, ना करें बहाना आगे बढ़ना होगा। झूल रहीं उनकी मझधार में नैया, जो परेशानियों से घबराया होगा।।   जीतने का‌ जज़्बा रहता सब को, जीत लेते है जो पक्के ‌ठान लेते। सो बातों की है यह एक ही बात, निड़र होकर…

  • तुम मिले | Tum Mile

    तुम मिले… सब कुछ मिल गया ( Tum mile sab kuch mil gaya )    तुम मिले बहारें आई समझो सब मिल गया। चेहरों पे रौनक छाई खुशियों से खिल गया। दिल को करार आया लबों पे प्यार आया। मौसम दीवाना हुआ मन ये मेरा हरसाया। प्रेम के तराने उमड़े हृदय प्रीत की घटाएं छाई।…

  • मन की पीड़ा | Kavita Man ki Peeda

    मन की पीड़ा ( Man ki Peeda ) मन की पीड़ा मन हि जाने और न कोई समझ सका है भीतर ही भीतर दम घुटता है कहने को तो हर कोई सगा है अपने हि बने हैं विषधारी सारे लहू गरल संग घूम रहा है कच्ची मिट्टी के हुए हैं रिश्ते सारे मतलब की धुन…

  • समय चुराएं | Poonam singh poetry

     समय चुराएं  ( Samay churaye )   आओ … समय से कुछ समय चुराएं शुन्य के सागर में गुम हो जाएं बीती बातों का हिसाब करें आने वाले पलों का इंतज़ार करें भूली यादों को याद करें बीती चाहतों को ताज़ा करें   कुछ बातें इधर की हों कुछ बातें उधर की हों इधर –…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *