गणगौर का पर्व ( Gangaur ka parv) यह दो शब्दों से जुड़कर बना ऐसा पावन-पर्व, विवाहित कुॅंवारी लड़कियाॅं करती इसपर गर्व। गण से बने भोलेशंकर गौर से बनी माॅं पार्वती, प्रेम व पारिवारिक सौहाद्र का ये गणगौर पर्व।। १६ दिनों तक प्रेम पूर्वक पर्व ये मनाया जाता, पौराणिक काल से है इससे उम्मीद व…
पहला प्यार (Pahla Pyar ) हृदय को तोड बताओ ना, कैसे तुम हँस लेते हो, बिना सोचे समझे कुछ भी तुम, मुझसे कह देते हो। प्यार करते है तुमसे पर, मेरे भी कुछ अरमां है, जिसे कदमों से मसल कर,जब जी चाहे चल देते हो। क्या मेरे दिल की बातें, तेरे दिल…
समानांतर रास्ते ( Samanantar raaste ) एक झूठें विश्वासघाती और छद्मवेशी मनुष्यों के संसार में अकेली चल रही हैं आजकल मेरी रूह फँसी हाँड-माँस की इस देह में… दो अपनी भुमिका दृढ़ करने की कोशिश करती और एक अनोखी हसरत के संग जहाँ-तहाँ विचरण करती मेरी घुमंतू रूह को सिवाय उसके कोई बांध ना…
तुलसी विवाह ( Tulsi vivah ) भजन कर भाव भक्ति से, शालिगराम आए हैं। सजा लो सारे मंडप को, प्रभु अभिराम आए हैं। सजी तुलसी होकर तैयार, तुझे वृंदावन जाना है। वृंदा कर सोलह श्रृंगार, द्वारिका नाथ रिझाना है। ठाकुर जी हो रथ पे असवार, बाराती झूमते गाते। बजे शहनाई तुलसी द्वार, चेहरे सबके…
क्या तुमने क्या तुमने झरना देखा है? देखी है उसकी यात्रा? तुम्हें तो सिर्फ अपने सुख से मतलब है। बताती हूं उसकी यात्रा का दुख। तुम्हारी तरह मैंने भी चाहा था मेरा जीवन झरने सा बहता रहे,हर,हर। लेकिन, जब चुल्लू में उसका जल भरा तो रंग मिला लाल रक्त रंजित सा। एक घायल चेहरा कहता…