Jawani Shayari

जवानी | Jawani Shayari

 जवानी

(  Jawani ) 

 

छीन न ले डरता हूँ फिर से होश जवानी
जगा रही है दिल में फिर से जोश जवानी

बात करो फूलों ,तितली,परबत नदिया से
अच्छी नहीं लगती है ये ख़ामोश जवानी

महबूबा ने वस्ल का वादा अगर किया हो
बन जाती है फिर तो ये ख़रगोश जवानी

लाखों काँटे हैं इस उल्फ़त की राहों में
भूल गयी है पहनना भी पापोश जवानी

दिल तोड़ा है दुनिया ने फिर से आशिक़ का
ढ़ूँढ़ रही है महबूबा का दोश जवानी

और न कुछ भी ‘अहद’ है इसकी चाहत कोई
बस माँगे है दिलबर का आग़ोश जवानी !

 

शायर: :– अमित ‘अहद’

गाँव+पोस्ट-मुजफ़्फ़राबाद
जिला-सहारनपुर ( उत्तर प्रदेश )
पिन कोड़-247129

यह भी पढ़ें :

https://thesahitya.com/zindagi-ghazal/

 

Similar Posts

  • खुशियों में हर मातम बदला | Matam Shayari

    खुशियों में हर मातम बदला ( Khushiyon mein har matam badla )    गर्मी का ये आलम बदला बारिश आयी , मौसम बदला ज़ख़्म नहीं भर पाये दिल के साल महीने मरहम बदला लोग नये सत्ता में आये हर छत पर अब परचम बदला साल महीने मौसम बदले लेकिन कब मेरा ग़म बदला सच्चा समझा…

  • तेरा इक दिवाना हूँ

    तेरा इक दिवाना हूँ तेरा इक दिवाना हूँ क़ाफ़िर नहीं हूँअसल में जो मैं हूँ वो जाहिर नहीं हूँ जुबाँ हूँ अदा-ए-फिजा हूँ फ़ना हूँयक़ीनन मैं जो हूँ क्यों आखिर नहीं हूँ जहाँ तक तिरा साथ मुझको चलूँगायुँ कुछ वक्त का मैं मुसाफ़िर नहीं हूँ लिखूँगा मैं लिखता नया ही रहूँगाथकूँ राह में ऐसा शाइर…

  • मिरे पास ग़म के तराने बहुत है

    मिरे पास ग़म के तराने बहुत है गुल-ए-दर्द के से ख़ज़ाने बहुत हैं।मिरे पास ग़म के तराने बहुत है। न हो पाएगा तुम से इनका मुदावा।मिरे ज़ख़्मे-ख़न्दां पुराने बहुत हैं। जो आना है तो आ ही जाओगे वरना।न आने के दिलबर बहाने बहुत हैं। कहां तक छुपाऊं में चेहरे को अपने।तिरे शहर में जाम-ख़ाने बहुत…

  • देखे हैं हमने | Dekhe Hai Humne

    देखे हैं हमने ( Dekhe Hai Humne ) देखे हैं हमने घूम के दुनिया के सब गुलाब।मिलता नहीं कहीं भी सनम आपका जवाब। क्योंकर न उसको नाज़ हो अपने नसीब पर।जिसको तुम्हारे प्यार की दौलत है दस्तयाब। बैठी हुई है ऐसे वो सखियों के दरमियां।तारों में जैसे बैठा हो सजधज के माहताब। किसकी मिसाल किससे…

  • बदले की कहानी किसलिए

    बदले की कहानी किसलिए ( Badle ki Kahani Kisliye ) वक़्त दुहराता है बदले की कहानी किसलिएदिल दुखायें जो वो बातें दिल में लानी किसलिए ज़ुल्म ढ़ाकर मेरे दिल पर रो रहे हैं आप क्यों,मेरे बंजर दिल पे आख़िर मेहरबानी किसलिये । जब मुकम्मल ही नहीं होने ये किस्से इश्क़ केफिर शुरू मैं भी करूँ…

  • समझते ही नहीं | Samajhte hi Nahi

    समझते ही नहीं वो मुहब्बत को मेरी कुछ क्योंकर समझते ही नहींप्यार के वादों पे अब तो वो उछलते ही नहीं एक हम हैं जो उन्हें देखे सँभलते ही नहींऔर वो हैं की हमें देखे पिघलते ही नहीं मिल गये जो राह में हमको कभी चलते हुएइस तरह मुँह फेरते जैसे कि मिलते ही नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *