Jawani ka Mausam

जवानी का मौसम | Jawani ka Mausam

जवानी का मौसम!

( Jawani ka mausam ) 

 

कटेगा सुकूँ से सफर धीरे -धीरे,
होगी खबर उसको मगर धीरे-धीरे।
मोहब्बत है जग की देखो जरुरत,
उगने लगे हैं वो पर धीरे-धीरे।

उबलने लगा अब अंदर का पानी,
चलाएगी खंजर मगर धीरे-धीरे।
आठों पहर मेरे दिल में वो रहती,
लड़ेगी नजर वो मगर धीरे-धीरे।

जवानी का मौसम टिकता नहीं है,
चढ़ेगा जहर वो मगर धीरे-धीरे।
कलेज़े को थामे कुदरत भी देखे,
लुटाएगी अपना जिगर धीरे-धीरे।

पड़ने न दूँगा मैं कभी आग ठंडी,
होगा असर ये मगर धीरे-धीरे।
चलती है जैसे जमीं पे न चलती,
खुलेगा दरीचा मगर धीरे-धीरे।

उसकी अदाएँ भी परदानशीन हैं,
चलाएगी जादू मगर धीरे-धीरे।
उसकी हया का हर कोई कायल,
चढ़ेगी लहर वो मगर धीरे-धीरे।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक),

मुंबई

यह भी पढ़ें :-

मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand par Kavita

Similar Posts

  • Kavita On Chandrashekhar Azad -चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन

    चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन ( Chandrashekhar Azad Ko Shradha Suman ) भारत  भूमि  जब  जब  सम्मान  से  सिर झुकायेगी हर मुकाम पर हिन्द को चन्द्रशेखर की याद आयेगी   ऐसा किया ऊँचा मस्तक भारत गौरव के अभिमान का धूल चटाकर प्राण हरे खुद दृश्य सन 31 के सग्राम का   आजाद  हिंद  फौज  से…

  • जय मां शारदे | Kavita Jai Maa Sharda

    जय मां शारदे ( Jai Maa Sharda ) हाथ जोड़ विनती करूं सुनिए चित लगाय l सर्वप्रथम पूजन करूं माँ आप होएं सहाय l सुनिए माँ विनती मेरी करो मन में प्रकाश l आन विराजो जिव्हा में मीठी बोली हो ख़ास ह्रदय में ज्ञान की ज्योति जला दो l नित गढ़ूं में नये आयाम l…

  • व्यथा | Kavita Vyatha

    व्यथा ( Vyatha )   बरसों के अथक परिश्रम का ऐसा हमें फलसफा मिला, न सम्मानित कोई पदवी मिली न ही कोई नफा मिला। दबाया कुचला हमें सबने जैसा जिसका मन किया, कभी अपमानित कभी प्रताड़ित जिसने जब चाहा किया। अब किससे हम विनय करें किसके जा चरण धरें, सारे निवेदन व्यर्थ हुए और अब…

  • Kavita अनमोल धरोहर

    अनमोल धरोहर ( Anmol Dharohar )   बेटी हैं अनमोल धरोहर, संस्कृति और समाज की। यदि सभ्यता सुरक्षित रखनी, सींचो मिल सब प्यार से ।।   मां के पेट से बन न आई, नारी दुश्मन नारी की । घर समाज से सीखा उसने, शिक्षा ली दुश्वारी से।।   इच्छाओं को मन में अपने, एक एक…

  • धर्मयुद्ध | Poem dharamyudh

    धर्मयुद्ध ( Dharamyudh )   जीवन के इस धर्मयुद्ध में, तुमको ही कुछ करना होगा। या तो तुमको लडना होगा,या फिर तुमको मरना होगा।   फैला कर अपनी बाँहो को, अवनि अवतल छूना होगा। कृष्ण ज्ञान के अर्जुन बनकर,गीता राह पे चलना होगा।   कर्मरथि बन कर्तव्यों का, तुम्हे निर्वहन करना होगा। या तो अमृत…

  • तुम हो मां

    तुम हो मां मेरी गीता,मेरी कुरान तुम हो मां,इस सिमटी हुई जमीन का खुला आसमान तुम हो मां। बुझी हुई जिंदगी का रोशन चिराग तुम हो मां,मेरी ईद का चांद,मेरी दीवाली की शाम तुम हो मां। तपती धूप में ठंडा अहसास तुम हो मां,दूर रहकर भी हरपल पास तुम हो मां। जब होती हूं उदास…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *