देश के हर अदू मिटा दूंगा | Desh ke Har Adoo Mita Dunga

देश के हर अदू मिटा दूंगा ?

( Desh ke har adoo mita dunga ) 

देश के हर अदू मिटा दूंगा ?
ज़िस्म से रूह तक जला दूंगा

फ़िर अदू वो इधर न आयेगा
सरहदों पर पहरे लगा दूंगा

दुश्मनों का निशाँ मिटाकर हर
देश को रोज़ वो वफ़ा दूंगा

हर घड़ी हो वतन सलामत बस
रोज़ दिल से यही दुआ दूंगा

खौफ़ से दिल भरे हर दुश्मन का
रेल हर दुश्मन पर चला दूंगा

ढोल अच्छाई का पीटे है तू
ऐब तेरे जहां बता दूंगा

आ सके वो अदू नहीं आज़म
रास्तों पर पत्थर गिरा दूंगा

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

रोज़ होठों पर ये दुआ आज़म | Hothon Par ye Dua Aazam

Similar Posts

  • अच्छा लगा | Acha Laga

    अच्छा लगा ( Acha laga )    अजनबी बनकर गुज़रने का हुनर अच्छा लगा इस रवय्ये ने दुखाया दिल, मगर अच्छा लगा दोस्तों को है मुहब्बत मुस्कराहट से मेरी दुश्मनों को मैं हमेशा चश्म तर अच्छा लगा जितने भी आसान रस्ते थे न माफ़िक आ सके ज़िंदगी में मुश्किलों वाला सफ़र अच्छा लगा तुम भी…

  • एक नगमा प्यार का | Poem Ek Nagma Pyar ka

    एक नगमा प्यार का ( Ek nagma pyar ka )    आ गए तो रस्म़ महफ़िल की निभाते जाइए एक नग़मा प्यार का सबको सुनाते जाइए। कौन है क्या कह रहा अब फ़िक्र इसकी छोड़िए मुस्कुराकर दिल रक़ीबों का जलाते जाइए। दो जहां को छोड़ दें हम आपकी ख़ातिर सनम है फ़क़त ये शर्त की…

  • हँसकर मिलते हो | Hans Kar Milte ho

    हँसकर मिलते हो ( Hans Kar Milte ho )   जो तुम यूँ हँसकर मिलते हो फूलों के माफ़िक लगते हो ग़म से यूँ घबराना कैसा आख़िर इससे क्यों डरते हो तुम जैसा तो कोई नहीं,जो माँ के चरणों में रहते हो गाँव बुलाता है आ जाओ क्यों तुम शहरों में बसते हो नफ़रत के…

  • तमाम शख़्स | Tamam Shakhs

    तमाम शख़्स ( Tamam Shakhs ) तमाम शख़्स यूं तो जिंदगी में आए गएबस एक आप ही ऐसे हैं जो बुलाए गए हर उस कहानी को सुनने के तलब-गार हैं हमकि जिस कहानी में हम बेवफ़ा बताए गए के जब भी वसवसे आए हैं काटने को मुझेतुम्हारी याद के लुक़मे उन्हें खिलाए गए बहार आई…

  • देखना है | Dekhna Hai

    देखना है ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,उसे सितमगर को भुला कर देखना है। ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है। चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बतपर कहाॅं बाजार जाकर देखना है। वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों मेंबुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है। इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,फिर हमें…

  • जाने क्यों आज | Jaane Kyun Aaj

    जाने क्यों आज ( Jaane Kyun Aaj ) जाने क्यों आज वो निढाल सा था।उसके रुख़ पर अजब मलाल सा था। हाय क्या दिन थे प्यार के दिन भी।दिल की दुनिया में इक धमाल सा था। कोशिशें यूं भी रायगां ठहरीं।उसका मिलना ही कुछ मुह़ाल सा था। फूल झड़ते थे उसके होठों से।उसका लहजा ही…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *