स्वर्णिम मध्यप्रदेश | मध्यप्रदेश गीत

स्वर्णिम मध्यप्रदेश

( Swarnim madhya pradesh )

 

स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है,
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।
जन-जन गाहे यशगान…,
भाग्यवान है यह राज्य,
उज्जवल…, मध्यप्रदेश है।
अतुल्य भारत करे गुणगान,
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।
मेरा भारत है महान्,
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।।1।।

शान-ए-हिंदुस्तान मेरा,
सौंदर्य हृदयप्रदेश यह।
अखंड भारत में विशेष यह,
स्वराज्य सर्वश्रेष्ठ है।
नवयुग का अनुपम सृजन,
सर्वांगीन उत्थान यहां।
रोशन मध्यप्रदेश यह,
तारीफ-ए-हिंदुस्तान है।
जन-जन गाहे यशगान…,
लोकप्रिय है यह राज्य,
सुखद…, मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।।2।।

स्वास्थ्य-शिक्षा-संस्कार,
समुदाय का अधिकार यह।
समृद्ध मध्यभारत में,
स्वच्छ-साक्षर अभियान है।
अभूतपूर्व गणराज्य में,
लोकतंत्र का सम्मान यहां,
निर्मल ग्राम-शहर में,
सम्पन्न विकास उल्लास है।
जन-जन गाहे यशगान…,
प्रगतिशील है यह राज्य,
मनोरम…, मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।।3।।

प्रथम सेवा ही जन सेवा,
सुशासन का उपदेश यह।
सर्वधर्म सत्कार प्रथा-पर्व,
आनंद का समागम है
वैभवपूर्ण सकल वर्ग,
भारतवर्ष में सब एक यहां।
सदभाव-एकता-भाईचारा,
शांति का संदेश है।
जन-जन गाहे यशगान…,
शांतप्रिय है यह राज्य,
कुशल…, मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।।4।।

राष्ट्र अपना स्वर्ण-चिड़िया,
हमारा योगदान सदा।
जनहित में राष्ट्रप्रेम का,
व्यापक प्रचार-प्रसार है।
क्षण-क्षण में सौगात,
कीर्ति-राज्य की गुणगान जहां।
स्वतंत्र राज्य शिखर पर,
हर्षबुलंद सरताज है।
जन-जन गाहे यशगान…,
सर्वदा निर्भय है यह राज्य,
उत्कृष्ट…, मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम, मध्यप्रदेश है।।5।।

हरिदास बड़ोदे ‘हरिप्रेम’
शिक्षाविद/गीतकार/लोकगायक/समाजसेवी
आमला, जिला- बैतूल (मध्यप्रदेश)

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