Author: Admin

  • परिवार | Parivaar

    परिवार का सही मतलब तो पहले समझ में आता था। आजकल तो परिवार चार दिवारी में “हम दो हमारे दो” के बीच में सिमट कर रह गया है! पहले ना सिर्फ परिवार में लोग मिल-जुलकर रहते थे। बल्कि भजन और भोजन भी संग में होता था। फिर भी संयुक्त परिवार की मिसाल आज भी कई…

  • भावना | Bhavna

    भावना ( Bhavna )    भावनाएं ही मूल हैं जीवन की सार्थकता मे आपसी संबंधों का जुड़ाव लगाव,प्रेम,द्वेष ,ईर्ष्या,नफरत सभिक्रियाओं का उधमस्थल भावनाएं ही तो हैं …. भावना की मधुरता मे जहां रिश्ते फलते फूलते और पल्लवित होते हैं, वहीं मारी हुई भावनाएं इंसान को दानावपन की और अग्रसित करती हैं….. भावनाएं बंधन भी हैं…

  • मान्यवर कांशीराम साहेब | Poem in Hindi on Kanshiram

    मान्यवर कांशीराम साहेब ( Manyavar Kanshiram Saheb )   समाज सुधारक व राजनीतिज्ञ थें ऐसे दलितों के नेता, बहुजन नायक एवं साहेब से जिनको जनता जानता। वर्ण व्यवस्था में इन्होंने बहुजनों का एकीकरण किया, न्याय चाहिये तो शासक बनों यें था जिनका कहना।। १५ मार्च १९३४ में जन्में ०९ अक्टूबर २००६ निर्वाण, शोषित दलितों व…

  • मैं अपनों से हारा हूं | Main Apno se Hara Hoon

     मैं अपनों से हारा हूं ( Main apno se hara hoon )   हिम्मत हौसलों जज्बों की, बहती प्रेम धारा हूं। औरों से तो लड़ भी लेता, मैं अपनों से हारा हूं। मैं अपनों से हारा हूं पग पग पे बाधाओ से, लोहा लेना सीख लिया। तूफानों से टक्कर लेना, मुस्कुराना सीख लिया। बारूदों के…

  • ज़माना है ना | Zamana hai Na

    ज़माना है ना! ( Zamana hai na )   हंसो यारो हंसो खुल के ,रुलाने को ज़माना है करो बातें बुलंदी की ,गिराने को ज़माना है ॥ नहीं होगा कोई भी खुश ,ऊंचाई देख कर तेरी गगन उन्मुक्त में उड़ लो, डिगाने को ज़माना है॥ लगाओ सेंध बाधाओं में, तोड़ो बेड़िआं सारी निरंतर चल पड़ो,पीछे…

  • मां का दर्द | Maa ka Dard

    मां का दर्द ( Maa ka dard )   संसार में कोई ऐसी दवा नहीं , जो मां का दर्द दूर कर सके। आठों पहर जो स्वयं को भुलाए, दूसरों के दुख की चिंता करती। उसकी भूख खत्म सी हो गई, बच्चों को पीड़ा से कराहते देख। मातृत्व के समान इस जग में, कोई और…

  • मोची | Mochi

    मोची ( Mochi )    पैरों से चलने में मजबूर, फिर भी प्रकृति में, मुस्कान भरी छाता बिखेरता , वह तल्लीन था अपने कार्य में, लगता था ऐसे कि वह , प्रभु के गांठ रहा हो जूते, उसका कार्य करने का ढंग, बड़ा ही प्रीत पूर्ण था, वह नहीं देखता कि , कौन छोटा कौन…

  • जो जग का करतार प्रभु | Jo Jag ka Kartar Prabhu

    जो जग का करतार प्रभु ( Jo jag ka kartar prabhu )   आस्था विश्वास श्रद्धा से, मनमंदिर में दीप जलाओ। उजियारा हो हृदय में, हरि भजन में मन लगाओ। नीली छतरी वाला ईश्वर, वो जगदीश्वर अंतर्यामी है। सारी दुनिया का रखवाला, सकल चराचर स्वामी है। नानी बाई को भात भरने, सांवरियो खुद आयो हो।…

  • भारतीय वायु सेना दिवस | Poem in Hindi on Indian Air Force Day

    भारतीय वायु सेना दिवस   हिंद की रज रज से,नभम स्पर्शम दीप्तम वंदन चतुर्थ वृहत सैन्य रूप, उत्साह साहस पर्याय । सदा रक्षित राष्ट्र स्वाभिमान, लिख कीर्तिमानी नव अध्याय । इक्कानवीं शुभ वात्सिकी, हर नागरिक अनंत अभिनंदन । हिंद की रज रज से,नभम स्पर्शम दीप्तम वंदन ।। चतुर्दश शतम अतुल्य विमान, एक्य लक्ष सप्तति सहस्त्रम…

  • स्वास्तिक | Swastika

    स्वास्तिक ( Swastika )    स्वास्तिक शुभता का परिचायक मृदु मृदुल अंतर श्रृंगार, सुख समृद्धि वैभव कामना । धर्म कर्म जीवन पर्याय , परम शीर्ष भाव आराधना । सुसंस्कार भव्य बीजारोपण, निज संस्कृति गुणगायक । स्वास्तिक शुभता का परिचायक ।। अभिवंदित पुरुषार्थ पथ, सौभाग्य दिव्य जागरण । विघ्न दुःख दर्द हरण, आनंदिता स्पर्शन आवरण ।…