Author: Admin

  • गांव की झोपड़ी | Gaon ki Jhopdi

    गांव की झोपड़ी ( Gaon ki jhopdi )    गांव की झोपड़ी हो गई आज बदहाल है। सूना हुआ आंगन सारा बदल गई चाल है। बहती बयार प्यारी सी किलकारी गूंजती। टूट गए तार सारे अब बदला सुर ताल है। लगता था जमघट जहां गांव के लोगों का। बुजुर्गों का दबदबा था इलाज हर रोगों…

  • समझदार कौन | Samajhdar Kaun

    समझदार कौन ( Samajhdar kaun )   लहू लुहान पैरों का दर्द हाथों मे पड़े छाले माथे से टपकती स्वेद की बूंदे धौकनी सी धड़कती छाती का हिसाब शायद ईश्वर की किताब मे भी नही औलादें तो अभी व्यस्त हैं अपनी ही औलादों को खुश रखने मे… औलादों ने शायद छोड़ दिया है खुद को…

  • प्यार में | Pyar Mein

    प्यार में ( Pyar Mein )    प्यार में वो हुआ जुदा आज़म कर गया खूब दिल ख़फ़ा आज़म ग़ैर आँखें वो कर गया है आज वो रहा अब न आशना आज़म ज़हर मुझको मिला जफ़ा का ही प्यार की कब मिली दवा आज़म जुल्म सहता रहा मुहब्बत के कब वफ़ा में मिली वफ़ा आज़म…

  • पितृ पक्ष से इतर एक पक्ष | Pitru Paksha se Itar

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का अत्याधिक महत्व है। इस दौरान लोग अपने पितरों का पिंडदान करके उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। हर वर्ष हम पितरों की प्रसन्नता प्राप्ति और दुखों से मुक्ति पाने का पर्व श्राद्ध 15 दिनों तक मनाते है। सभी सनातन धर्मावलम्बियों को अपने पितरों की कृपा-आशीर्वाद पाने…

  • सच्चा भक्त | Sacha Bakht

    सच्चा भक्त ( Sacha bakht )    सच्चा भक्त ढोंग ढकोसला छल फ़रेब दिखावा मोह माया आडंबर व अंधविश्वास में कभी नहीं पड़ सकता कभी नहीं क्योंकि बखूबी वह वाक़िफ़ है जमीनी यथार्थ की सच्चाई से और इससे भी कि ये सभी चीजें विज्ञापन हैं बाजार हैं मूल्य नहीं।   नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन’ नरैना,रोकड़ी,खाईं,खाईं यमुनापार,करछना,…

  • पता नहीं क्यों | Pata Nahi Kyon

    पता नहीं क्यों ( Pata nahi kyon )    घर छोटा कमरे भी कम थे रिश्ते नाते सब चलते थे फिर भी प्रेम बाकी था पता नहीं क्यों पति-पत्नी में प्यार बड़ा था एक दूजे को खूब समझा था आज खड़े हैं कोर्ट के द्वारे पता नहीं क्यों बहन भाई के झगड़े होते थे आपस…

  • यक्ष प्रश्न | Yaksha Prashna

    यक्ष प्रश्न ( Yaksha Prashna )    परिवार हि समाज की वह इकाई है जहां से ,स्वयं समाज और देश का निर्माण होता है व्यक्ति ही एक मे अनेक और अनेक मे एक का प्रतिनिधित्व करता है…. प्रश्न तभी है की क्या एक व्यक्ति ही समाज का आधार है या,समाज ही व्यक्ति का ? हां,दोनो…

  • क्यों | Kyon

    क्यों ? ( Kyon )    हाथ मिला उल्फत दिखलाते दिल मिलने से क्यों घबराते? हुस्न परस्ती के दीवाने वस्फ की राह नही वे जाते। दैर -ओ -हरम के ये बासिंदे नफ़रत की दीवार बनाते । बातिल साज़ी बहुत हुई अब कुछ तो वादे कभी निभाते । हरदम क्यूँ तकलीद करूं मैं | क्यूंँ मेरी…

  • थोड़े ही है | Thode hi Hai

    थोड़े ही है ( Thode hi hai )   जुल्मो – फ़रेब से हाशिल कामयाबी थोड़े ही है। है मज़हब अलग तो ये खराबी थोड़े ही है।   जिन्होंने इंसानियत का पाठ पढ़ाया दुनियाँ को, उनका ज्ञान महज़ किताबी थोड़े ही है।   जो जल रहा है नफ़रत की आग में रातो -दिन ‘सौमित्र ‘,…

  • ऐसा क्या है | Aisa Kya hai?

    ऐसा क्या है? ( Aisa Kya hai )    (एक) घर में परिवार में गली में मोहल्लें में गाॅंव में कस्बें में नगर में शहर में राज्य में देश में दुनिया में ब्रह्मांड में ऐसा क्या है? विश्वास, उम्मीद, प्रेम, या और कुछ? जिससे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं लोग। (दो) मंदिर में मस्जिद…