Author: Admin

  • आपकी सीमा | App ki Seema

    आपकी सीमा ( App ki seema )    पृथ्वियां तो बहुत हैं ब्रम्हांड मे किंतु,जल और वायु के प्रभाव मे ही होती है श्रृष्टि की रचना… आपकी संगत और योग्यता के आधार पर ही होती है आपके व्यक्तित्व की पहचान….. व्यक्तिगत मे आप कैसे हैं इससे समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता किंतु ,आप समाज…

  • हवा का झोंका | Jhonka Hawa ka

    हवा का झोंका ( Hawa ka jhonka )   काश कोई हवा का झोका, उसे छूकर आता। उसकी खुशबू को खुद को समेटे, मैं महसूस कर पाता उसको, इन हवाओं में । मैं एक बार फ़िर, खो जाता, उसकी यादों की रंगीन फिजाओं में। मेरी आंखों के सामने छा जाता , उसका किसी हवा के…

  • एलर्जी एवं अस्थमा | Allergies and Asthma

    एलर्जी एवं अस्थमा ( Allergies and asthma )    रोग चाहें कोई सा भी हो वह कर देता है परेशान, वक़्त से ईलाज़ न लिया तो वह ले लेता है जान। ऑंख नाक मस्तिष्क हो चाहें पेट कान गला रोग, कई बीमारियां होती ऐसी जो करती हमें हेरान।। सर्दी व बारिश मौसम में कई लोग…

  • जीवन का अक्स | Jivan Shayari

    जीवन का अक्स ( Jivan ka aks )  उजालों की बातों से दिल घबराता है, अंधेरा हर कदम कितना दहलाता है। जीने की मज़बूरियां सबकी है अपनी, अक्सर दुख की नदियाँ में तैराता है। मौसमी नमी से निज़ात पा ले मगर, सूखे वो न जो आँखों में गहराता है। बरसने की मंशा भरकर भी कोई,…

  • हाय रे टमाटर | Hi re Tamatar

    हाय रे टमाटर ( Hi re tamatar )   हाय रे टमाटर तेरा कैसा कमाल पूछ रहा हर कोई आज तेरा हाल…। आलू का साथ छोड़ा बैगन का दिल तोड़ा कोहड़ा से बंद हुई तेरी बोल-चाल… हाय रे टमाटर ०… परवल को पीछे छोड़ा गोभी से नाता तोड़ा अदरक को लेकर तू करे खूब बवाल…….

  • कलयुग का प्रेम | Kalyug ka Prem

    कलयुग का प्रेम ( Kalyug ka prem )    एक बार एक लड़के ने एक लड़की से कहा “मैं तुम्हें कुछ देना चाहता हूं।” फिर लडकी ने कहा “मुझे कुछ नही चाहिए सिर्फ आप मेरा सम्मान रखना ।” लड़के ने कहा, “देखो तो, बड़े प्यार से लाया हूं यार।” जब लड़की ने देखा कि वो…

  • मज़ा आ गया | Mazaa aa Gaya

    मज़ा आ गया ( Mazaa aa Gaya )  था तो मुश्किल सफ़र पर मज़ा आ गया इक मुसाफ़िर गया दूसरा आ गया इक मुलाकात उस से हुई थी कहीं मेरे घर वो पता पूछता आ गया उसके आते ही लगने लगा है मुझे वक़्त दर पर मेरे ख़ुशनुमा आ गया लुत्फ़ ही लुत्फ़ आने लगा…

  • मुझे संग पाओगे | Hindi Prem Kavita

    मुझे संग पाओगे ( Mujhe sang paoge )   जानती हुँ मैं मुझमें वो पा ना सके तुम जिसे देखा करते थे ख्वाबों में कभी लाल साड़ी मे लिपटी फिल्मी सी या सुनहरी जलपरी जैसे बल खाती लचीली सी.. जानती हुँ मैं शायद ना पा सके मुझमें जो सोचा था तुमने वो शुचिता और पाक…

  • मोल क्या दोगे | Mol kya doge

    मोल क्या दोगे ( Mol kya doge )    यूं ही बरसती नही बूंद बादल से याद है उसे सागर की गहराई छूकर भी ऊंचाई को हर कोई जमीनी धरातल को भूला नहीं करता… चुका दोगे ली गई कर्ज की दौलत को उस वक्त के एहसान का मोल क्या दोगे कम पड़ जायेगी तुम्हारी उम्र…

  • सखी बरसे खूब सावनवा ना | Sawan Kajri

    सखी बरसे खूब सावनवा ना ( कजरी) ( Sakhi barse khoob sawanwa na )    बहे जोर-जोर शीतल पवनवा सखी बरसे खूब सावनवा ना ….2 जब से बरखा ऋतु है आई बदरी नभ में खूब छाई। 2 करिया लागे धरती और गवनवा ना….. सखी बरसेला सवनवा ना….. नदी नार जल से भरे पेड़ रुख हुए…