बस थोड़ा सा प्यार चाहिए

बस थोड़ा सा प्यार चाहिए | Bas Thoda sa Pyar Chahiye

बस थोड़ा सा प्यार चाहिए

( Bas Thoda sa Pyar Chahiye )

बस थोड़ा सा प्यार चाहिए।
जीने का ही आधार चाहिए।
बहती रहे अनुरागी सरिता।
प्रीत फुहार रसधार चाहिए।

मधुरम बहती बहार चाहिए।
खुशियों की भरमार चाहिए।
दिल तक दस्तक दे जाए वो।
हमको ऐसा दिलदार चाहिए।

भाव जड़ित हमें हार चाहिए।
सुरभित भीनी बहार चाहिए।
महक उठे हर दिल का कोना।
घट से बरसता प्यार चाहिए।

गीत सुरीले मनभावन से।
शब्दों का भंडार चाहिए।
झूम उठे दिल की धड़कनें।
मधुर बजती झंकार चाहिए।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

लोग क्या कहेंगे | Kavita Log Kya Kahenge

Similar Posts

  • नेत्र ज्योति | Kavita Netra Jyoti

    नेत्र ज्योति ( Netra Jyoti ) पहला सुख निरोगी काया, वेद पुराण यश गाया। सेवा कर्म पावन जग में, नेत्र ज्योति जो दे सके। बुढ़े और बीमारी को, अंधों को लाचारों को। वक्त के मारो को, कोई सहारा जो दे सके। ऋषी मुनियों ने, साधु संतों और गुणियों ने। नेत्रदान महादान, जो दानवीर हो कर…

  • मन का संसय | Kavita

    मन का संसय ( Man ka Sansay )   उम्मीद हमारी तुमसें है, देखों  यह  टूट न जाए। विश्वास का धागा ऐसा है जो,पास तेरे ले आए।   मन जुड़ा हुआ है श्याम तुम्ही से,तू ही राह दिखाए। किस पथ पहुचें द्वार तेरे, उस पथ को आप दिखाए।   भटकत मन को बांध सका ना,शेर…

  • भाई में फौजी बणग्यो

    भाई में फौजी बणग्यो   छोड़ गाॅंवा की खेती-बाड़ी भाई में फ़ौजी बणग्यो, मूॅंछ मरोड़ कर निकलूं हूॅं भाई में नौकरी लागग्यो। गैंती फावड़ों और खुवाडयो‌ं चलाबो अब भूलग्यो, सीमा पर करुं रखवाली बन्दूक चलाबो सीखग्यो।। कलतक कोई न पूछतो अब रुतबो म्हारो बढ़ग्यो, आबा लागी घणी-सगाईया आज में भी परणग्यो। जनटर मनटर बणर आउॅंला…

  • दहलीज | Dahaleej

    दहलीज ( Dahaleej )    फर्क है तुमने और तुम्हारी बातों मे समझ ही न पाए कई मुलाकातों में मिले हो हर बार नए ही अंदाज मे उजाला हो जैसे दिन और रातों मे कभी गुरुर तो कभी शोखी नजर आया कभी शाम तो कभी सहर नजर आया तुम बिन यूं तो हम जागे हैं…

  • बसंत ऋतु | Basant Ritu

    बसंत ऋतु ( Basant Ritu )    आ गए ऋतुराज बसंत चहुं ओर फैल रही स्वर्णिम आभा, सुंदर प्राकृतिक छटा में खिली पीले पुष्पों की स्वर्ण प्रभा। मां शारदे की पूजा का पावन अवसर है इसमें आता, ज्ञानदायिनी देवी की कृपा से जगत उजियारा पाता। बसंत ऋतु आते ही सुंदर सुरम्य वातावरण हुआ, ठंडी पवन…

  • धरोहर | Dhrohar kavita

     धरोहर  ( Dhrohar :  Kavita )   ->बड़ी सुरक्षित हैं मेरे पास , तेरी धरोहर . . . . ॥ 1 .समेटकर रखी है मैंने , तेरी सारी यादों को ।  ये अक्सर आती हैं,और रूला देती हैं मुझे । नम हो जाती हैं मेरी आँखें , झरने सी बहती हैं । सजाकर रखी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *