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कविताएँ

और घूंघट

और घूंघट   शरद सिहरन चलन चटपट और घूंघट। प्राण ले लेगी ये नटखट और घूंघट।।   कुंद इंदु तुषार सघनित दामिनी तन, व्यथित पीड़ित प्रणयिनी सी काम बिन, मिल रही...

अनोखा आंदोलन!

अनोखा आंदोलन! **** कृषि कानूनों के खिलाफ अन्नदाता आंदोलनरत हैं, भीषण सर्दी में ही- दिल्ली बार्डर पर दिए दस्तक हैं। भीड़ बढ़ती जा रही है! ठसाठस सड़कों पर डटे हैं, सरकारी...

चक्षुजल

चक्षुजल बुभुक्षित कम्पित अधर का सार है यह। चक्षुजल है प्रलय है अंगार है यह।। तुंग सिंधु तरंग अमृत छीर है यह, प्रस्तरों को को पिघला दे वो...

बंधु अपने दिल की सुन | Geet

बंधु अपने दिल की सुन ( Bandhu apne dil ki soon )   चल राही तू रस्ता चुन, बंधु अपने दिल की सुन। बंधु अपने दिल की सुन,बंधु...

मुझे उड़ने दो

मुझे उड़ने दो मैं तितली हूं.. मुझे उड़ने दो ।  मुझे मत रोको, मुझे मत टोको,  मुझे नील गगन  की सैर करने दो ।। मेरे पंखों को मत कतरो, मेरे हौसलों को...

ट्वीटर की धृष्टता

ट्वीटर की धृष्टता ***** ट्वीटर वालों ने हमारे देश की आजादी, संप्रभुता, उदारता से खिलवाड़ किया है धृष्टता की है,मूर्खता की है इतना ही नहीं तकनीकी खामी बता- आरोपों से बचने की...

hindi poetry on life || अशांत मन

अशांत मन ( Ashant Man )   शांत प्रकृति आज उद्वेलित, हृदय को कर रही है। वेदना कोमल हृदय की, अश्रु बन कर बह रही है।   चाहती हूं खोद के पर्वत, बना...

गरीब अमीर देश विच पिसते हम !

गरीब अमीर देश विच पिसते हम ! ***** अमीर गरीब की खाई नहीं मिटने को भाई जबतक है स्वार्थ सोचना ही है व्यर्थ। जनसाधारण की कौन कहे? देशों का भी यही...

जस्टिस फॉर गुलनाज

जस्टिस फॉर गुलनाज ****** #justice_for_Gulnaz चाहे सरकारें बदलती रहें राज जंगलवाली ही रहे ऐसे में हम कहें तो क्या कहें? जब प्रशासन ही अपना चेहरा उजागर करे! कौन जीये/मरे फर्क जरा नहीं...

Bhojpuri Vyang | प्रधानी

प्रधानी ( Pradhani )    1 गउंआ भा लंका बजा जब डंका  फोन गईल घर से राजधानी आवा हो भैया कन्हैया भी आवा  भौजी  लड़े अबकी प्रधानी …..  आवा हो भैया…. 2 आपन सीट...