ग़ज़ल

  • चंद्रयान से | Chandrayaan se

    चंद्रयान से ( Chandrayaan se )    आसान मस्अला ये हुआ चंद्रयान से अब गुफ़्तगू करेगी ज़मीं आसमान से भारत के वासियों ने बड़ा काम कर दिया आने लगीं बधाइयां सारे जहान से जाकर के सीधा अपने निशाने पर ही लगा छोड़ा गया था तीर ही ऐसा कमान से इस दर्जा कामयाबी मिली अपने देश…

  • नियम | Niyam

    नियम ( Niyam )    कौन है संसार में जो नियम में बंधना चाहता है हर कोई तो नियम से परे निकलना चाहता है। प्रेम के नियम में बंध कर बहता चला गया जो सिमट कर भी वह तो बिखर जाना चाहता है। सीमाओं से परे की ज़मीन आकर्षित है करती बंधनों से परे जा…

  • यूं आहें भरता हूँ मैं | Yoon Aahen Bharta hoon Main

    यूं आहें भरता हूँ मैं ( Yoon aahen bharta hoon main )    दो दिन से भूखा हूँ मैं ? रोठी को तरसा हूँ मैं दूर ग़रीबी न यहाँ हो बरसों से तड़फा हूँ मैं पैसे पूरे मिलते कब मेहनत भी करता हूँ मैं कोई तो भेज यहाँ रब जीवन में तन्हा हूँ मैं मुश्किल…

  • जो नज़रों से गिर जाते हैं | Ghazal Shayari in Hindi

    जो नज़रों से गिर जाते हैं ( Jo nazron se gir jaate hain )    वो नफ़रत से घिर जाते हैं जो नज़रों से गिर जाते हैं मस्जिद में हैं अल्लाह वाले मयख़ाने काफ़िर जाते हैं कौन यक़ीं करता है उन पर जो बातों से फिर जाते हैं चालाकी से दूर रहा कर इस रस्ते…

  • बेहुनर से लोग | Behunar se Log

    बेहुनर से लोग ( Behunar se log )    कितने अजीब आज के दस्तूर हो गये कुछ बेहुनर से लोग भी मशहूर हो गये जो फूल हमने सूँघ के फेंके ज़मीन पर कुछ लोग उनको बीन के मग़रूर हो गये हमने ख़ुशी से जाम उठाया नहीं मगर उसने नज़र मिलाई तो मजबूर हो गये उस…

  • माँ क़रीब है यहाँ | Maa Kareeb hai Yahan

    माँ क़रीब है यहाँ ( Maa kareeb hai yahan )    न कोई मेरे माँ क़रीब है यहाँ सभी इस नगर में रकीब है यहाँ किसी पर यहाँ तो यकीन हो न हो न माँ से ही अच्छा हबीब है यहाँ सभी माँ अधूरे वफ़ा मुहब्बत से ऐसा कौन जो खुशनसीब है यहाँ ख़ुदा से…

  • गुलज़ार हो तुम | Gulzar ho tum

    गुलज़ार हो तुम ( Gulzar ho tum )   हजारों ख्वाहिशें दबी दिल में, कहीं ये दम यूं ही न निकल जाए, इंतज़ार ए उम्मीद में कहीं, आरजूओं का मौसम न बदल जाए।   रगों में खौलता ये लहू कहीं, बेसबर आंखों से न बह जाए , संभाल आंगन ये तेरे सपनों का, कहीं सपनों…

  • तेरी गुस्ताख़ बातें | Teri Gustakh Baatein

    तेरी गुस्ताख़ बातें ( Teri gustakh baatein )   तेरी गुस्ताख़ बातों से दिवाना टूट जाता है हुई थी जो ख़ता तुम से भरोसा टूट जाता है   रहें हो ना मगर अब तुम सुनाऊँ दास्ताँ किसको मोहब्बत के लिखे  नग्में फ़साना टूट जाता है   गुजारे थे शहर में वो कभी बीतें हुए पल…

  • महफ़िल-ए-इश्क | Mehfil -E- Ishq

    महफ़िल -ए- इश्क ( Mehfil-e-Ishq )   महफिले इश्क में इसरार की मोहलत नहीं होती। जहां में यार से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती।। वफ़ा के आब से ही जिंदगी में चैन मिलता है, अना के शजर पे ताउम्र की चाहत नहीं होती।। मरीजे इश्क मर भी जाय तो मतलब कहां उनको, ज़माने की अदाओं…

  • बस आज बस | Bas Aaj

    बस आज बस ( Bas aaj bas )    जद्दोजहद दुश्वारियां कुछ कश्मकश बस आज बस मैं गुनगुनाना चाहती बजने दो कोई साज़ बस। वो फ़िक्र रंजो गम ज़फा तन्हाइयों की बात को तुम छोड़ दो जो हैं ख़फा रहने दो अब नाराज़ बस। हो गुफ्तगू तो बात कुछ लग जाती है उनको बुरी हमने…