कविताएँ

  • होली का हुड़दंग | Poem on holi in Hindi

    होली का हुड़दंग ( Holi ka huddang )   होली में हुड़दंग मचाना, अच्छा लगता है। स्वर लहरी हो मस्ती भरी, गाना अच्छा लगता है।।   धमालों पर रसिया नाचे, स्वांग रचाते नर नारी। पिचकारी से इक दूजे को, रंग लगाना अच्छा लगता है।।   गौरी नित का काग उड़ाये, मेरो साजन कब घर आए।…

  • होली का मौसम आ गया | Holi ki kavita

    होली का मौसम आ गया ( Holi ka mausam aa gaya )   होली का रंग भा गया, मस्ताना मौसम आ गया। भरी सभा में फाग सुनाएं, फागुन रंग रंगीला छा गया।।   सारे मस्ती में झूमे गाए, एक दूजे को गुलाल लगाएं। गौरी नित का काग उड़ावे, परदेसी कब मेरा घर आवे।।   बजे…

  • विधान | Kavita vidhan

    विधान ( Vidhan )   विधि का विधान है या नियति का खेल कोई डोर  हाथों  में उसके करतार करता सब होई   दुनिया का दस्तूर यही है जगत का विधान प्यारे बुराई का अंत बुरा भलाई दमकाती भाग्य सितारे   न्याय का विधान हमारा प्यारा है संविधान हमारा जनता को हर अधिकार दिलों में…

  • उम्र | Kavita umra

    उम्र ( Umra )   जो हंसते मुस्काते रहते मोती प्यार के लुटाते रहते उनकी उम्र जवां रहती है सबको गले लगाते रहते   बचपन जवानी बुढ़ापा जिंदगी के है पड़ाव हमारे खट्टे मीठे आते सदा जीवन में उतार-चढ़ाव प्यारे   उम्र झलकती चेहरे से ढलती उम्र जाती पहचानी चिंता से बेकार हो जाती हंसती…

  • घूरती निगाहें | Poem ghoorti nigahen

    घूरती निगाहें ( Ghoorti nigahen )   सिर पर तलवारों सी लगती हमको घूरती निगाहें अंगारों से वार सहती रहती अक्सर जीवन राहें   जाने क्यों भृकुटियां तनी नैनो से ज्वाला सी बरसे झील सी आंखें दिखाती तीर तलवार भाला बरछे   घूरती निगाहों का भी हौसलों से सामना कर लो बर्बादियों का कहर है…

  • मेहंदी की महक | Poem mehndi ki mahak

    मेहंदी की महक ( Mehndi ki mahak )   नारी का श्रृंगार मेहंदी चार चांद चमका देती हिना में गुण आकर्षण पिया मन लुभा लेती   रचकर रंग दिखाती है सौंदर्य में निखार लाती है दुल्हन के हाथों का सौंदर्य मनभावन सजाती है   मेहंदी की मोहक महक मदमस्त हो मधुमास प्यार के मोती बरसते…

  • वीर छत्रपति शिवाजी | Poem on Chhatrapati Shivaji

    वीर छत्रपति शिवाजी ( Veer Chhatrapati Shivaji )   निडर पराक्रमी वीर शिवाजी छत्रपति सम्राट हुए झुके नहीं कहीं वीर सिंह व्यक्तित्व विराट लिये   रणधीर पराक्रमी महायोद्धा महासमर में लड़ते थे छापामार युद्ध प्रणाली नित्य कीर्तिमान गढ़ते थे   नींव रखी मराठा साम्राज्य हिंद प्रबल पुजारी थे मुगलों से संघर्ष किया रणनीति शौर्य अवतारी…

  • अमर प्रेम की अमर कहानी | Poem amar prem ki amar kahani

    अमर प्रेम की अमर कहानी ( Amar prem ki amar kahani )     एक दीन साधारण सा इंसान पर इरादे थे फौलादी विशाल पर्वत का सीना चीरकर की उसने मुनादी   अथाह प्रेम की पराकाष्ठा का दिया उसने निशानी बिहार की पावन भूमि के लोगों को याद हुई जुबानी   दिन हीन दशरथ मांझी…

  • इक हुंकार | Kavita

    इक हुंकार ( Ek hunkar )   हम संघी है….. जन संघी है, भारत जय हो, विजय सोच के रंगी है। हम संघी है.. भगवा है पहचान हमारी, शिव शक्ति मे डूबे हम अड भंगी है। हम संघी है.. खाकी रंग है माटी रंग, मातृभूमि के सेवक हम कुछ जंगी है। हम संघी है…. शेर…

  • हंसते खिलते फूल | जलहरण घनाक्षरी

    हंसते खिलते फूल ( Hanste khilte phool )   हंसते खिलते फूल, कितने प्यारे लगते। हंसते गाते बच्चे भी, चांद सितारे लगते।   मुस्कानों के मोती देखो, खिले फूल गुलाब सा। खुशियां बरसे यहां, चमन प्यारे लगते।   मोहक महक प्यारी, मन में उमंग जागे। खिलते फूल दिलों के, सबसे न्यारे लगते।   सद्भाव प्रेम…