शहरों की ओर | Kavita
शहरों की ओर ( Shahro ki or ) छोड़ दिया घर बार गांव चल पड़े शहर की ओर चकाचौंध के पीछे दौड़े भूल गए सुहानी भोर भागदौड़ भरी जिंदगी फुर्सत का कोई नाम नहीं शहरों का जीवन ऐसा अपनेपन का काम नहीं फैशन के दीवाने होकर लोग चले शहर की ओर…
शहरों की ओर ( Shahro ki or ) छोड़ दिया घर बार गांव चल पड़े शहर की ओर चकाचौंध के पीछे दौड़े भूल गए सुहानी भोर भागदौड़ भरी जिंदगी फुर्सत का कोई नाम नहीं शहरों का जीवन ऐसा अपनेपन का काम नहीं फैशन के दीवाने होकर लोग चले शहर की ओर…
आज की शाम दोस्तों के नाम ( Aaj ki shaam dosto ke naam ) अल्फाजों के मोती बरसे हर्ष खुशियां आनंद आए खुशियों की घड़ियों में शाम मित्रों के नाम हो जाए सुख-दुख बांटे बड़े प्रेम से गीतों की लेकर लड़ियां सद्भावों की बहा दे सरिता बरसे सुंदर सी झड़ियां सारे…
दहेज ( Dahej ) सोना कहत सोनार से कि,गहना बना द, और उ गहनवा से, गोरी के सजा द। गोरी कहे बाबू से कि, सेनुरा दिला द, सेनुरा के भाव बढल, माहुर मगा द। दुल्हा बिकात बाटे, चौक चौराहा पे, कैसे खरीदे कोई, भीख के कटोरा के। खेतवा बिकाई बाबू ,भाई…
सुनो लड़कियों ( Suno ladkiyon ) हम मध्यम वर्गीय परिवार की लड़कियां नहीं भर सकती ऊचाईयों तक उड़ान अपनी इनके कांधे का वजह भारी होता है क्यूंकि इन्हें लेकर चलना पड़ता है लड़की होने की मर्यादा रिश्तों और समाज के तानों बानों का बोझ मगर हारती नहीं निरंतर जारी रखती हैं प्रयास…
कविता की हूंकार ( Kavita ki hunkar ) कलमकार कलम के पुजारी लोग कवि कहते हैं सुधारस बहाते कविता का छाये दिलों में रहते हैं लेखनी ले कवि हाथों में ओज भरती हुंकार लिखे मां भारती का वंदन भारतमाता की जयकार लिखें वंदे मातरम वंदे मातरम गीत लिखते हम वीरों के शीश…
हे गगन के चंद्रमा ( Hey gagan ke chandrama ) तुम हो गगन के चन्द्रमा, मै हूँ जँमी की धूल। मुझको तुमसे प्रीत है, जो बन गयी है शूल। तेरे बिन ना कटती राते, दिल से मैं मजबूर, हे गगन के चन्द्रमा, तू आ जा बनके फूल। रात अरू दिन के मिलन…
मिट्टी की महक ( Mitti ki mahak ) सोंधी सोंधी मीठी मीठी भीनी भीनी पुरवाई लहलहाती धरती मिट्टी की महक आई खुशहाली हर्ष भरा मेरे देश की माटी में उमंग उल्लास खुशी सबके दिलों में छाई दूर-दूर फैली कीर्ति यश पताका देश की माटी की खुशबूओं ने जहां में धूम मचाई…
कब आओगे ( Kab aaoge ) वृन्दावन जस धाम जहाँ पर, जमुना जी का घाट। वहाँ पे राधा देखे आस , साँवरे कब आओगे॥ …. शाम से हो गई रात, मुरलिया की ना छेडी तान। विकल हो राधा ढूँढे आज, श्याम तुम कब आओगे॥ …. नयना सिन्धु समान , छलकता आँखो से है प्यार।…
क्रान्ति वीर सुभाष ( Krantiveer subhash ) जो लाखों सिंह सपूत जननि,भारत माता ने जाए हैं ! आख्यानअनगिनत रोमांचक,जगइतिहासों ने गाए हैं ! उनसब में वीसुभाष श्रेष्ठतम, क्रान्तिवीर कहलाए हैं ! उन जैसे कठिन पराक्रम तो,कोई भी ना कर पाए हैं ! साधारण बीज धरा से उठ, साधारण पौधा बन पाया…
मुफ्त की सलाह ( Muft ki salah ) फ्री फ्री फ्री मुफ्त की सलाह मिल रही सबको फ्री हर मुश्किल समस्या का कोई इलाज लीजिए फ्री सब हथकंडे सारे नुस्खे कई फार्मूले मिल जाएंगे मुफ्त की सलाह देने कई माहिर विद्वान आएंगे चुनावी चक्कर में पड़ गए आओ सलाह लीजिए जीत…