ग़ज़ल

  • यह कहानी फिर सही | Phir Sahi

    यह कहानी फिर सही ( Yeh kahani phir sahi )    हमने कब किसको पुकारा यह कहानी फिर सही किसको होगा यह गवारा यह कहानी फिर सही आबरू जायेगी कितनों की तुम्हें मालूम क्या किसने किसका हक़ है मारा यह कहानी फिर सही रिश्तों को मीज़ान पर लाकर के जब रख ही दिया क्या रहा…

  • गर दो इजाजत | Gar do Ijazat

    गर दो इजाजत ( Gar do Ijazat )   गर दो इजाजत तुम पर मर जाऊं, शब्द बनके स्याही में उतर जाऊं ! गुनगुना सको जिसको महफ़िल में, ऐसी कविता बन के मैं संवर जाऊं ! मेरा मुझ में कुछ भी ना रहे बाकी, कतरा-कतरा तुझ में बिखर जाऊं ! दिल-ऐ-समंदर में डूबकर फिर मैं,…

  • परदेस में रहा | Pardes mein Raha

    परदेस में रहा ( Pardes mein raha )  दीवारो-दर से जिसकी सदा गूँजती रही मेरी निगाह घर में उसे ढूँढती रही अहसास था ख़याल तसव्वुर यक़ीन था किस किस लिबास में वो मुझे पूजती रही मैं काम की तलाश में परदेस में रहा वो ग़मज़दा ग़मों से यहीं जूझती रही मैं लिख सका न उसको…

  • गए वो दिन | Gaye Woh Din

    गए वो दिन ( Gaye Woh Din)    अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…

  • हँसकर मिलते हो | Hans Kar Milte ho

    हँसकर मिलते हो ( Hans Kar Milte ho )   जो तुम यूँ हँसकर मिलते हो फूलों के माफ़िक लगते हो ग़म से यूँ घबराना कैसा आख़िर इससे क्यों डरते हो तुम जैसा तो कोई नहीं,जो माँ के चरणों में रहते हो गाँव बुलाता है आ जाओ क्यों तुम शहरों में बसते हो नफ़रत के…

  • परी आसमान की | Pari Aasman ki

    परी आसमान की ( Pari aasman ki )    जब बात चल रही थी वहाँ आन-बान की लोगों ने दी मिसाल मेरे खानदान की मैं हूँ ज़मीन का वो परी आसमान की कैसे मिटेगी दूरी भला दर्मियान की देखूं मैं उसके नखरे या माँ बाप की तरफ़ सर पर खड़ी हुई है बला इम्तिहान की…

  • रीत दुनिया की | Reet Duniya ki

    रीत दुनिया की ( Reet Duniya ki )   बह्र का नाम: बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम अरकान: मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन मात्राएँ: 1222 1222 1222 1222   मिला जो इक दफा वो हर दफा मिलता नहीं यारों, टूटा जो फूल डाली से कभी खिलता नहीं यारों ! लगा चाहे ले जितना ज़ोर लेकिन सच यही…

  • बोलेंगे | Bolenge

    बोलेंगे ( Bolenge ) रोज़ हम इंकलाब बोलेंगे ? रोज़ ही बेहिसाब बोलेंगे ख़ूबसूरत बड़ी फ़बन इसकी देश अपना गुलाब बोलेंगे रोशनी प्यार की ही देता है देश को आफ़ताब बोलेंगे ये ही मेरी पहचान है जय हिंद जोर से ही ज़नाब बोलेंगे पूछेगा जो गवाह में जय हिंद ये ही अपना ज़वाब बोलेंगे है…

  • इंसानियत का रथ | Insaniyat ka Rath

    इंसानियत का रथ ( Insaniyat ka rath )   शर्मिंदा किस कदर है इंसानियत का रथ बढ़ता ही जा रहा है हैवानियत का रथ वाइज़ बिछा रहे हैं बस अपनी गोटियाँ रोकेगा कौन देखो शैतानियत का रथ हो जायें बंद अब यह फिरक़ापरस्तियां आयेगा शहर में कब इंसानियत का रथ निकला हूँ फूल लेके उस…

  • कोई शिकवा शिकायत ही नहीं | Shikwa Shikayat

    कोई शिकवा शिकायत ही नहीं ( Koi shikwa shikayat hi nahi )   کوئی شکوہ شکایت ہی نہیں ہے مجھے تم سے عداوت ہی نہیں ہے कोई शिक्वा शिकायत ही नहीं है मुझे तुम से अदावत ही नहीं है تمہارے بعد میں اۓ جان جاناں کسی سے اب محبت ہی نہیں ہے तुम्हारे बाद में…