दर्द ए जुदाई | Dard – E – Judai

दर्द ए जुदाई

( Dard – E – Judai ) 

 

दर्द ए जुदाई सहता बहुत हूँ
मैं कुछ दिनों से तन्हा बहुत हूँ

दुश्मन मेरा क्यों बनता है वो ही
मैं प्यार जिससे करता बहुत हूँ

उल्फ़त से मुझसे तुम पेश आना
मैं नफ़रतों से डरता बहुत हूँ

मिलती नहीं है खुशियाँ कहीं भी
दिल में लिये ग़म फिरता बहुत हूँ

क्यों मेरा जीना मुश्किल हुआ है
ये सोचकर मैं मरता बहुत हूँ

फिर भी सकूं इस दिल को न आये
आज़म ग़ज़ल भी सुनता बहुत हूँ

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/muhabbat-tu-nibhaye-rakh/

Similar Posts

  • ख्वाबों में आ बहकाते हो | Khwab Shayari

    ख्वाबों में आ बहकाते हो ( Khwabon mein Aa Bahakate Ho ) ख्वाबों में आ बहकाते हो फुसलाते हो।मीठी नींद से बेरहमी से उठा जाते हो। भूलना चाहा मैंने जिस ग़ज़ल कोख्यालों में आ उसे गुनगुनाते हो । जो जाते कहां लौट कर आते हैं।याद में उनकी क्यों अश्क बहाते हो। पड़ता नहीं फर्क उन्हें…

  • हमारे कभी | Hamare Kabhi

    हमारे कभी ( Hamare Kabhi ) चाँद उतरा न आँगन हमारे कभीउसका वादा था होगें तुम्हारे कभी झूठ वह बोलकर लूटता ही रहाथा यकीं की बनेंगे सहारे कभी दुख ग़रीबों का मालूम होगा तभीमेरी बस्ती में इक दिन गुज़ारे कभी मुझको अरमान यह एक मुद्दत से हैनाम मेरा वो लेकर पुकारे कभी हमसफ़र बन के…

  • मैं ग़रीब हूँ | Main Gareeb hoon

    मैं ग़रीब हूँ ( Main gareeb hoon )   पैसे से बहुत मैं ग़रीब हूँ जहाँ में ऐसा बदनसीब हूँ मुक़द्दर न ऐसा मिला मुझे ख़ुशी के न ही मैं क़रीब हूँ कोई साथ दे सदा जो मेरा बहुत ढूंढ़ता वो हबीब हूँ बुरा लोग क्यों चाहते है फ़िर किसी का न जब मैं रक़ीब…

  • जख़्म के हर निशान से निकला

    जख़्म के हर निशान से निकला जख़्म के हर निशान से निकलादर्द था वो अज़ान से निकला लोग जो भी छिपा रहे मुझसेबेजुबां की जुबान से निकला इश्क़ के हो गये करम मुझ परतीर जब वो कमान से निकला आँख भर ही गई सुनो मेरीआज जब वो दुकान से निकला आज सब कुछ लिवास से…

  • चलन में है अब | Chalan mein

    चलन में है अब ( Chalan mein hain ab )   सीने को खोलने का फैशन चलन में है अब और गाली बोलने का फैशन चलन में है अब देखो ज़रा संभल के तुम बात कोई बोलो कम करके तोलने का फैशन चलन में है अब ये दूध जैसी रंगत आई नहीं है यूं ही…

  • दिल में हमारे आज भी

    दिल में हमारे आज भी ( ‘वाचाल’ ग़ज़लमतलआ छोड़कर सारे अश्आर तिटंगे ) दिल में हमारे आज भी अरमान पल रहा हैयूँ मानिए कि दिल को ये दिल ही छल रहा है रंगे-निशात झेला बारे-अलम उठा करना जाने किस बिना पर ये साँस चल रहा हैजुड़ता है टूट-टूट कर फ़िर-फ़िर संभल रहा है वो पूछते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *