दरिद्रता | Daridrata
दरिद्रता
( Daridrata )


( Daridrata )


मेरे मन का शोर ( Mere mann ka shor ) विचारों की उथल-पुथल उमड़ा मेरे मन का शोर कल्पनाओं ने उड़ान भरी आया भावों का दौर भावो का ज्वार हिलोरे ले रहा हलचल मची मन में उमंगे उठ रही नित नई साहस भर रहा नस-नस में प्रचंड भाव प्रवाह मन का तूफान…

सावन मनभावन ( Savan Manbhavan ) झूम झूम के सावन आया, घूम-घूम के खुशियां लाया। झन~झन करे झंकार , आवारा बदरा बरसाया। घन-घन गरजती बौछारें धूम धड़का कर धमकाए l गर्जन-तर्जन करे दामिनी, पुलक-पुलक पुलकाए l चढ़ गई मौज बदरा को, तो नदिया भर-भर लाये। नाले-डबरे सारे भर गए, गली में पानी बहता जाए l…

नेतागिरी (व्यंग ) ( Netagiri – Vyang ) हमहू करबई नेतागिरी झट से आए हमरो अमीरी नेतागिरी में आराम बा सबसे बढ़िया काम बा एक बार जब जीत के जाईब जिवन भर पेंशन हम पाईब जब तक रहिब विधायक सांसद, खूबई पैसा लेब कमाईब हमहू करबई जम के लूट बोलब जनता से खूब झूठ…

विजयादशमी ( Vijayadashami kavita ) ( 10 ) जागो रावण आए साल तूझे यूं खामोशी से जलता देख हे रावण,मुझे तो तुझ से इश्क़ हो चला है कभी तो पूछ उस खुदा से, क्या इन्साफ है तेरा मरने के बाद भी ,सदियों ज़माना क्यूं सज़ा देता चला है सोने की लंका थी मेरी ,शिव…

कस्तूरी गंध ( Kasturi Gandh ) तुमको क्या मालूम कि, कितना प्यार किया करती हूं। ठोकर खाकर संभल-संभल,कर सदा बढ़ा करती हूं।। रुसवा ना हो जाए मोहब्बत की ये, दुनियां हमारी। मिले उमर लंबी इसको ये, दुआ किया करती हूं।। आशाओं के दीप जलाएं ,हृदय अंधेरी कुटिया। बाती बन में जली प्रियतम, सदा तुम्हारी सुधियां।।…

भोले बाबा बम बम ( Bhole baba bam bam ) अगम अगोचर अविनाशी शिव शंकर भोलेनाथ जगतपति जगपालन कर्ता विघ्नहर्ता विश्वनाथ शंकर बाबा डमरू वाले हे नीलकंठ नटराज भोले बाबा खोल पलकिया पूर्ण कर दो काज भोले बम बम भोले बम बम हे कैलाशी हे सुखराशि हे अंतर्यामी घट घटवासी सकल विश्व…