Hindi ke Utsang Mein

हिंदी की गौरव गाथा | Hindi ki Gaurav Gatha

हिंदी की गौरव गाथा

( Hindi ki Gaurav Gatha )

मन के भाव व्यक्त करने का माध्यम है हिंदी।
ऐसी साहित्यिक रस धार है हिंदी।

सभी को समानता का अधिकार दिलाती है हिंदी।
छोटे बड़े अक्षरों का भेद मिटाती है हिंदी।

टूटे अक्षरों को सहारा देती है हिंदी।
सभी क्षेत्रीय भाषाओं का हार है हिंदी।

सभी नदियों को सागर में मिलाती है हिंदी।
वर्णमालाओं का समाहार है हिंदी।

कवियों को जो गौरवान्वित करती वो है हिंदी।
साहित्य के ज्ञान का असीम सागर है हिंदी।

प्रकृति का जो विस्तार करें वो है हिंदी।
शास्त्रों का जो ज्ञान दे वो है हिंदी।

संस्कृत का नव अवतार है हिंदी।
मानव को जो मानवता सिखा दे वो है हिंदी।

ऐसी संवेदनाओं का द्वार है हिंदी।
एक सुखद प्यार व विश्वास है हिंदी।

मर्यादाओं सी सुविचार है हिंदी।
वात्सल्यता से अपरंपार है हिंदी।

राष्ट्र के माथे की बिंदी है हिंदी।
ओजस्वी और अनूठी है हिंदी।

सुंदर मीठी मनोरम सरल है हिंदी।
निश्चय ही वंदनीय मां सम है हिंदी।

हिंदुस्तान का सम्मान व गौरव गाथा है हिंदी ।
हमारी पहचान दुनिया से करती है हिंदी।

क्यों ना हम अपनी मातृभाषा को सर आंखों पर बिठाएं।
आओ हम सब मिलकर हिंदी दिवस मनाएं ।

Lata Sen

लता सेन

इंदौर ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • आज़ादी | Hindi Poem Azadi

    आज़ादी ( Azadi ) है कोई सैनानी सड़कों पर आ कर हम को भी दिलाऐ मंहगाई,बेरोजगारी, अशिक्षा और असमानता से, भूखमरी, अल्प पगारी, मिलावट और मक्कारी से, आज़ादी,,,!!! है कोई सैनानी सड़कों पर आ कर हम को भी दिलाऐ पूंजीवाद, जमाखोरी, भ्रम और भ्रष्टाचारी से, घृणा,अपमान, छूआछूत की बिमारी से, आज़ादी,,,!!! है कोई सैनानी सड़कों…

  • बैठ जाता हूँ

    बैठ जाता हूँ     कितना इंतज़ार करता हूँ मैं हर सुबह और शाम इसी आस में कि अभी उसका फ़ोन आएगा और पूछेगी मुझसे मेरा हाल……   आता है जब फ़ोन चार पाँच दिनों के बाद बस दो मिनट भी नहीं कर पाती बात और बिन कहे ही काट देती है कॉल मैं बोलता…

  • मैं थानेदार हूँ | Thanedar par kavita

    मैं थानेदार हूँ! ( Main thanedar hoon )   जो कानून का आँचल फाड़ते हैं, मैं उन्हें फाड़ता हूँ। ऐसे मजनुओं का जुनून मैं, जूतों से कुचलता हूँ। मैं सेवक हूँ आम जनता का, हर जुल्म का प्रहार हूँ, मैं एक थानेदार हूँ।   हर आग से देखो मैं हूँ वाकिफ , जलना मुझे आता…

  • व्यवहार | Hindi Poem Vyavahar

    व्यवहार ( Vyavahar )   बातों से ही तो बढ़ेंगी अपनी बातें हाथों से हि हाथ मिलेंगे तब हमारे तन्हा कटता नहीं सफ़र जिंदगी का रास्ते हि तो बनते हैं रास्तों के सहारे दोस्त न मिले तो दुश्मनों से मिलो, रंजिशें भूलके उनके ही गले मिलो, गर तुम्हें कोई हमदर्द ना मिल सके, तो तुम्हीं…

  • बात बन जाए | Baat ban Jaye

    बात बन जाए ( Baat ban jaye )    किसान की खेती में मिस्त्री की रोजी में बच्चों की खेलने की जवान की कमाने की भूखे को रोटी की प्यासे को पानी की मजदूर को दिहाड़ी की वैज्ञानिक को खोज की पेड़ को आक्सीजन की लड़की की सुरक्षा की लड़कों को सुधारने की भैंस से…

  • दिलबर वो हमारे | Geet Dilbar wo Hamare

    दिलबर वो हमारे ( Dilbar wo hamare )   मेरे मन में बसी छवि दिलदार की सनम। प्यार हद से भी ज्यादा उनसे करते हम। वो दिलकश नजारे, प्रियतम हमे पुकारे। महकती वादियों में, आये नदिया किनारे। दिलबर वो हमारे फूल खिलने लगे हैं, दिल मिलने लगे हैं। बहारों के मौसम भी, रंग बदलने लगे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *