Kalam

कलम | Kalam

कलम

( Kalam )

हाँ, मैं कलम हूँ
रहती हूँ मैं
उंगलियों के मध्य
लिख देती हूं कोरे
कागज पर
जो है मेरी मंजिल पर
खींच देती हूँ
मैं टेढ़ी-मेढ़ी लाइनों से
मानव का मुकद्दर
छू लेता है आसमां कोई
या फिर जमीं पर
रह जाता है
या किसी की कहानी
या इबारत लिख देती हूँ।
पिरोती हूँ अक्षरों को
मोती-सा
अपनी अदा दिखाती हूँ
कभी प्रेम के गीत
लिखती हूँ—
कभी वेदना का स्वर
बन जाती हूँ
या फिर कभी
सुख-दुःख का
समागम बन जाती हूँ
कहीं महादेवी, कहीं मीरा बन
प्रेम -विरह गीत
लिख जाती हूँ।।

डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’
लेखिका एवं कवयित्री
बैतूल, मप्र

यह भी पढ़ें :-

क्या खोया क्या पाया | Kya Khoya Kya Paya

Similar Posts

  • जलयान

    जलयान समुद्र के किनारे उस छोर परखड़ा हुआ है एक जलयान…किसी प्रवासी के इंतजार मेंअनुमान है वह प्रवासी वहाँ पहुंचकर वापस लौटकर चला गया है..या अभी वह उस गंतव्य तक पहूँचा ही नहीं है …समंदर के किनारे उस छोर पर खड़ा हुआ है एक जलयान चौहान शुभांगी मगनसिंहलातूर महाराष्ट्र यह भी पढ़ें:-

  • बाल मजदूरी बचपन छीने | Baal mazdoori kavita

    बाल मजदूरी बचपन छीने ( Baal mazdoori bachpan cheene )     सीधे-साधे बच्चों का भगवान रखवाला होता है बालश्रम करवाते उनका निकले दीवाला होता है बच्चों का भविष्य उजाड़े उनको कैसे माफ करें कानून की नजरों में वो तो सलाखों वाला होता है   दुष्ट प्रवृत्ति होते हैं वो लोग जो बालश्रम करवाते भोले…

  • न्याय

    न्याय ** गरीब मजलूमों को अब न्याय नहीं मिलता! मिलतीं हैं सिर्फ धमकियां! मुकदमा वापस ले लो.. वरना ? तो क्या करें? रो रहे हैं सिसक रहे हैं बहा रहे हैं आंसू बंद कर घर की दरवाजे खिड़कियां। सुना है ! कचहरियों में भी अब न्याय नहीं मिलता रंगीन कागजों के बदले में है बिकता!…

  • खुशियों की फुलझड़ी जलाओ | Deepawali ke geet

    खुशियों की फुलझड़ी जलाओ ( Khushiyon ki phuljhadi jalao )   आई दिवाली नाचो गाओ खुशियों की फुलझड़ी जलाओ दीप प्रेम के रोशन करते स्वागत में सब घर सजाओ खुशियों की फुलझड़ी जलाओ   प्यार के मोती जग लुटाओ स्नेह सुधारस खूब बहाओ दीन हीन को गले लगाकर मानवता का धर्म निभाओ खुशियों की फुलझड़ी…

  • बुजुर्ग ठंडी छांव | Buzurg Thandi Chhaon

    बुजुर्ग ठंडी छांव ( Buzurg thandi chhaon )    बगिया को महकाने वाले, प्रेम सुधा बरसाने वाले। घर में रौनक लाने वाले, संस्कार सिखलाने वाले। आओ कर ले उनका वंदन लाड प्यार दुलार जो देते, जीवन को संवार वो देते। कदम कदम पे बने सहारा, खुशियों का उपहार जो देते। आओ कर ले उनका वंदन…

  • चुलबुली की यादें | Poem Chulbuli

    चुलबुली की यादें ( Chulbuli ki yaadein )   ये गर्म सर्द हवाओ की साजिश है कि बिखर जाउँ मैं तेरे  शहर  आऊं  और  तेरी बाहों में सिमट जाउँ मैं ये चाय का शौक कब का भुला दिया मैं चुल्बुली हो जाये तू मेरी बाहों में तेरे होंठो से लग जाऊं मैं तुम  कामों  में …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *