जिंदगी में नहीं मतलबी चाहिए

Ghazal | जिंदगी में नहीं मतलबी चाहिए

जिंदगी में नहीं मतलबी चाहिए !

( Jindagi mein nahi matalabi chahie )

 

जिंदगी में नहीं मतलबी चाहिए !

इक वफ़ा की मगर दोस्ती चाहिए

 

 जिंदगी अब ग़मों में बहुत जी ली है

ऐ ख़ुदा उम्रभर अब ख़ुशी चाहिए


उम्रभर के लिये हो वफ़ाये भरी

जिंदगी में रब वो आशिक़ी चाहिए

 

नफ़रतों के अंधेरे मिटा दें ख़ुदा

राहों में प्यार की चांदनी चाहिए

 

प्यार तेरा सनम चाहिए उम्रभर

ये नहीं तेरी नाराज़गी चाहिए

 

जो हमेशा दें ख़ुशबू वफ़ा की यहां

ऐ ख़ुदा प्यार की वो कली चाहिए

 

उसको ऐ रब नहीं मुझसे करना जुदा

जिंदगी में रब न उसकी कमी चाहिए

 

 रब मिला दें उससे आज़म को सदा

और नहीं दिल में रब बेकली चाहिए

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : –

मत होना तू कभी भी जुदा साहिबा | Shayari to impress crush

Similar Posts

  • दीप जलाना होगा | Kavita

    दीप जलाना होगा ( Deep jalana hoga )   बुलंद हौसला बनाना होगा तूफान  से  टकराना  होगा मास्क जरूरी मुंह पर रखना जन-जन को समझाना होगा   वक्त के मारे लोग जगत में मदद को हाथ बढ़ाना होगा दुख की गाज गिरी जिन पर ढांढस  उन्हें  बंधाना  होगा   मन का भेद मिटाना होगा सेवा…

  • लो आया राखी का त्यौहार | Geet

    लो आया राखी का त्यौहार ( Lo aaya rakhi ka tyohar )   लो आया राखी का त्यौहार, बरसे भाई बहन का प्यार, कच्चे धागों में बसता है, सुहाने रिश्तो का संसार, लो आया राखी का त्यौहार-2   माथे चंदन अक्षत रोली, बहना नेह भरी रंगोली, कलाई पर बांध रही है, बहना अपना प्यार, लो…

  • बुरा दौर आने वाला है | Kavita

    बुरा दौर आने वाला है ( Bura daur aane wala hai )   झोंपड़ियों में सुलगती इस आग से, नेताओं का महल रोशन होने वाला है; लाशों  के  ढेर  पर सियासत है चालू लगता है कहीं चुनाव होने वाला है ! अगर तुम आज भी ना बोले तो यह ज़ुल्म यूँ ही बढ़ता जाएगा; ज़ुल्म …

  • बरसाती मेंढक!

    बरसाती मेंढक! *** माह श्रावण शुरू होते ही- दिखते टर्र टर्र करते, जाने कहां से एकाएक प्रकट होते? उधम मचाते, उछल कूद करते। कभी जल में तैरते, कभी निकल सूखे पर हैं धूप सेंकते। माह दो माह खूब होती इनकी धमाचौकड़ी, लोल फुला फुला निकालते कर्कश ध्वनि। इन्हें देख बच्चे खुश होते, तो कभी हैं…

  • जिंदगी | Kavita

    जिंदगी ( Zindagi )   मेरी जिंदगी से पूछा मैंने एक रोज जीने का वह तरीका जो घुटन पीड़ा और दर्द से हो बिल्कुल अछूता जिंदगी के पास नहीं था कोई जवाब मुस्कुराकर वह बोली बताती हूं तुझे सलीका बहुत जिया अपने लिए जीवन जी कर देखो जीवन पराया दो कदम बढ़ाओ तुम किसी निर्बल…

  • नहीं घर में रोटी रखी हुई है | Poem on roti in Hindi

    नहीं घर में रोटी रखी हुई है ( Nahin ghar mein roti rakhi hui hai )     नहीं घर में रोटी रक्खी हुई है! यहाँ तो भूख यूं तड़पी हुई है   मिले है आंख खुलते ख़ूब ताने सहर अपनी नहीं अच्छी हुई है   नहीं मिलता कभी जो चाहता हूँ बहुत तक़दीर ही…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *