• ज़िंदगी खुल के जियो | Zindagi Khul ke Jiyo

    ज़िंदगी खुल के जियो ( Zindagi Khul ke Jiyo ) ज़िंदगी खुल के जियो बस ये भरोसा करकेएक दिन मौत बुला लेगी इशारा करके कौन ऋण इनका चुका पाया है इस दुनिया मेंअपने माँ बाप को छोड़ो न किनारा करके आपकी दीद को हर रोज तड़पते हैं हमथक गए चाँद का हर रात नज़ारा कर…

  • विस्थापन का दर्द | Visthapan ka Dard

    विस्थापन का दर्द ( Visthapan ka Dard ) विस्थापन का दर्द बहुत हीपीडादेह होता हैं ..इस पीड़ा को इस यातना को शब्दों में व्यक्त करना बहुत कठिन होता हैंअपने लोग ..अपनी जमीन..अपनें घर की छत…बसा बसाया संसार..युद्ध…आतंक…भय…हिंसा…मृत्यू के डर के भार से बस थोड़ा-बहुत भार कम होता हैं विस्थापन का….बहुत दर्दनाक और भयावह होता हैंविस्थापन…

  • क्या शैतान सच में होते हैं

    क्या शैतान सच में होते हैं क्या सच में,होते हैं शैतान ?या ये है केवल,हमारा अनुमान ।हां वाकई,होते हैं शैतान ।जब हम करते हैं,कोई बुरा काम ।या फ़िर करते हैं,बड़ों का अपमान ।तब हमारे भीतर ही,प्रविष्ट हो जाते हैं ;ये दुष्ट शैतान ।जब हम, भूल जाते हैं ,सही ग़लत की पहचान ।तभी हमें उकसाते हैं…

  • राज़ गहरे | Raaz Gehre

    राज़ गहरे ( Raaz Gehre ) एक ही चेहरे में छुपे चेहरे बहुत हैं,लबों पे हँसी दिल में राज़ गहरे बहुत हैं, कौन अपना कौन है पराया जाने कैसे?अब जज़्बातों पर भी लगे पहरे बहुत हैं, मुसीबत में भी साथ छोड़ रहे हैं अपने,रिश्तों में रंज़िशों की उठ रही लहरें बहुत हैं, जिसको भी समझा…

  • हिन्दी के अन्तर के स्वर

    हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा मान्य किये जाने के लिये १९७५ में लोकसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव अमान्य कर दिये जाने के क्षोभ और विरोध में “हिंदी के अंतर के स्वर” शीर्षक रचना लिखी गई।१९७६ में मारीशस के द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन में यह रचना प्रस्तुत हुई तो यह वहाॅं प्रशंसित और अभिनन्दित हुई।इस रचना के…

  • जताते नहीं | Jatate Nahi

    जताते नहीं ( Jatate Nahi ) आज कल प्यार क्यों तुम जताते नहींरूठने पर मुझे क्यों मनाते नहीं हारना चाहती हूं मैं सब कुछ मगरप्यार के खेल में तुम हराते नहीं मैं तरसती ही रहती हूं लेकिनकान में चीखकर डराते नहीं मैं हूं तैयार पर आज कल तुम कभीप्रेम से उंगलियों पर नचाते नहीं कौन…

  • हिन्दी की बात | Hindi ki Baat

    हिन्दी की बात ( Hindi ki Baat ) कहने कोहम हिन्दी को बहुत मानते हैंऔर बच्चों का प्रवेशअंग्रेजी माध्यम में करवाते हैं।ओ! दोहरी मानसिकता के लोग,मातृभाषा से दूर रहकरबच्चे का विकास होगा क्या?मातृभाषा तो सहज हीहर शिशु सीख लेता है,तो हम उस बस्ते के बोझ के साथक्यों अंग्रेजी का बोझ डालें?हिन्दी को जीवन काक्यों ना…

  • मेरी हिंदी महान है | Meri Hindi Mahan Hai

    मेरी हिंदी महान है ( Meri Hindi Mahan Hai ) सारे जग में मेरी हिंदी महान है,हिंदी से ही तो मेरा यह हिंदुस्तान है।ज्ञान का भंडार है वर्णों का रूप है,हिंदी ही तो मेरी आन,बान,शान है।। हिंदी हमारी है धरोहर सारे जहान की,हिंदी से ही होती मेरी,जग ने पहचान की।हिंदी भाषा नहीं विविधता की एकता…

  • नज़रों से मेरे | Nazaron se Mere

    नज़रों से मेरे ( Nazaron se Mere ) नज़रों से मेरे अपनी नज़र जब मिला गयाइस दिल में गुल मुहब्बतों के वो खिला गया रुसवा हैं देते हमको न पैग़ाम वो कोईमिलने मिलाने का भी तो अब सिलसिला गया शरमा रही थी चांदनी भी आज चाँद सेउसको शराब आँखों से कोई पिला गया वो मूल…

  • किसान | लघूलेख

    राष्ट्र की आत्मा किसान ही हैं इसमें कोई संदेह नहीं । हमारे भारत देश की अर्थव्यवस्था किसानी पर ही निर्भर हैं । जिस किसान को हम देश की आत्मा मानते हैं वही किसान अन्नदाता आज कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर रहा हैं । आज भारत अधूनिक युग की ओर अग्रसर हो रहा हैं…