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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • राष्ट्रभाषा बिना राष्ट्र गूंगा होता है!
    विवेचना

    राष्ट्रभाषा बिना राष्ट्र गूंगा होता है!

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस बड़े ही हर्षोल्लास ढंग से मनाया जाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के दो साल बाद ही 14 सितम्बर, 1949 ईसवी को संविधान सभा द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में एक ध्वनिमत से इसे पास किया और 26 जनवरी, 1950 ईसवी को देश के…

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  • Hindi diwas par poem
    कविताएँ

    हिन्दी दिवस है | Hindi Diwas Hai

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    हिन्दी दिवस है ( Hindi Diwas Hai ) हिंदी दिवस है क्यों हिंदी विबस हैअपने ही लोगों का मन परबस है । अपने ही लोग सब अपने ही भाईअंग्रेजी में जमकर करे सब पढ़ाई। अपने ही लोग करे जब उपेक्षाबढ़े कैसे हिन्दी बढ़े कैसे शिक्षा। हिंदी में सोते सब हिंदी में जागेफिर भी अंग्रेजी के…

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  • हिंदी हमारी
    कविताएँ

    हिंदी से ही हिंदुस्तान | Hindi Se Hi Hindustan

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    हिंदी से ही हिंदुस्तान ( Hindi Se Hi Hindustan ) हिंदी से ही हिंदुस्तान का जन्म है,इसका सम्मान हम सभी का धर्म है। है यही हम सबकी अपनी मातृभाषा,रहे सदा अखंड यही हमारी अभिलाषा। हिंदी में ही वर्णित है मर्म ज्ञान काहिंदी मे ही धर्म है मानवता का भारत माँ के माथे पर सजी जो…

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  • और हिन्दी
    ग़ज़ल

    ग़ज़ल हिन्दी में | Ghazal Hindi Mein

    ByAdmin September 14, 2024September 15, 2024

    ग़ज़ल हिन्दी में ( Ghazal Hindi Mein ) ( 2 ) आशाओं में बल लगता हैहोगा अपना कल लगता है एक तुम्हारे आ जाने सेयह घर ताजमहल लगता है सींच रहा जो मन मरुथल कोपावन गंगा जल लगता है हम तुम साथ चले हैं जब सेजीवन मार्ग सरल लगता है यह कहना आसान नहीं हैतेरा…

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  • Hindi ke Utsang Mein
    कविताएँ

    हिंदी की गौरव गाथा | Hindi ki Gaurav Gatha

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    हिंदी की गौरव गाथा ( Hindi ki Gaurav Gatha ) मन के भाव व्यक्त करने का माध्यम है हिंदी।ऐसी साहित्यिक रस धार है हिंदी। सभी को समानता का अधिकार दिलाती है हिंदी।छोटे बड़े अक्षरों का भेद मिटाती है हिंदी। टूटे अक्षरों को सहारा देती है हिंदी।सभी क्षेत्रीय भाषाओं का हार है हिंदी। सभी नदियों को…

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  • हिन्दी दिवस मनाएंगे | Hindi Diwas Manayenge
    कविताएँ

    हिन्दी दिवस मनाएंगे | Hindi Diwas Manayenge

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    हिन्दी दिवस मनाएंगे हिन्दी दिवस मनाएंगे,हिन्दी का परचम लहराएंगे।अपने मन की ये अभिलाषा,जन -जन तक पहुँचाएंगे। हिन्दी संस्कारों की भाषा,मन के मनुहारों की भाषा।शिष्टाचार व्यवहार की पूँजी,बसी है रग-रग में मातृभाषा। रसों की रसधार हिन्दी में,वीरों की हुँकार हिन्दी में।सात सुरों की सरगम सी,काव्यों की काव्यधार हिन्दी में। आओ इसको नमन करें हम,कुछ तो नया…

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  • Vishwa Hindi Diwas
    कविताएँ

    हिन्दी हिंद की है बिंदियाँ | Hindi Hind ki Hai Bindiya

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    हिन्दी हिंद की है बिंदियाँ हिन्दी हिंद की है बिंदियाँसुशोभित है ललाट पर ,इसकी चर्चा हर होंठों परहर हाट और घाट पर । हिन्दी हिंद की है बिंदियाँसुशोभित है ललाट पर। देश की शान है यहहम सब की पहचान है यह,जो बोलते हैं वही लिखते हैंभाषा में विज्ञान है यह। हिन्दी हिंद की है बिंदियाँसुशोभित…

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  • प्यार निभाना पड़ता है | Pyar Nibhana Padta Hai
    कविताएँ

    प्यार निभाना पड़ता है | Pyar Nibhana Padta Hai

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    प्यार निभाना पड़ता है ( Pyar Nibhana Padta Hai ) प्यार निभाना, पड़ता है ।चाहे जितनी, कठिन डगर हो ।उस पर ,जाना पड़ता है ।ह्रदय यदि, होता है विचलित ।उसको, समझाना पड़ता है ।जो कुछ, पीछे छूट गया है ।उसे ,भुलाना पड़ता है ।जिससे भी ,किया हो वादा ।उसे ,निभाना पड़ता है ।प्रेम स्वत ही…

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  • शब्दाक्षर राष्ट्रीय संस्था
    साहित्यिक गतिविधि

    हिंदी दिवस पर शब्दाक्षर राष्ट्रीय संस्था द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    शब्दाक्षर संस्था द्वारा हिंदी दिवस पर जांगिड अस्पताल परिसर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। हिंदी के गौरव साहित्य संस्कृति व हमारी विरासत को दर्शाती हिंदी के यशगान को काव्य मे पिरोकर कवियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दाक्षर के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की। तथा मुख्य अतिथि…

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  • बड़े ख्वाब
    कविताएँ

    बड़े ख्वाब | Bade Khwaab

    ByAdmin September 14, 2024September 14, 2024

    बड़े ख्वाब ( Bade Khwaab ) अक्सर मैंने बड़े हीख्वाब देखे हैं,परन्तु ,बहुत से गुमनामदेखे है,ये भी देखा है,कि कहाँ ईश्वर है,कहाँ फ़कीर खाली है,मैंने उन पदचिन्हों केभी निशान देखे है।किस तरफ रूख करूँ अपना,चलने से पहले सैकड़ों सवालदेखे है।जवाब कहाँ से पाती,कहीं कोई निशान नही उनका,ये समझ आ गयाजिम्मेदारियों तलेसभी ख्वाब टूटते भी देखे…

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