• माँ की यादें | Kavita Maa ki Yaadein

    माँ की यादें ( Maa ki Yaadein ) ( 3 ) जिनकी मां स्वयं, वृद्धाश्रम की चौखट पर, बेटे को याद करते हुए, जीवन गुजार दिया था । देख रहीं थीं मां अपलक, बेटे को दूर और दूर जाते, मां को यू अकेले ही छोड़ते, ‌‌बेटे को थोड़ी दया नहीं आई। आज उसके बेटे ने,…

  • जरा सी आंख क्या लगी | Zara si Aankh Kya Lagi

    जरा सी आंख क्या लगी ( Zara si Aankh Kya Lagi )   जरा सी आंख क्या लगी शाम ढलने लगी। सिंदूरी होकर हसीन सी वह मचलने लगी। रजनी आई रूप धरकर फिर सजने लगी। नींद के आगोश में घंटियां भी बजने लगी। अंधियारी रात हुई नभ में घटाएं छाने लगी। सपनों की मलिका मस्त…

  • बस्ता | Kavita Basta

    बस्ता ( Basta )   पीठ पर लादे गोवर्धन-सा बड़ा बस्ता दीखे गिरिधर आ रहे हैं श्यामसुंदर चढ़ रहे वे सोपान शिक्षा के डगमगाते पांव पतले कांपते-हांफते तीसरी में ही ग्ए बन गए हैं फायियान ढ़ो रहे – संसार भर का ज्ञान पूरी पढाई कर निकले जब स्कूल से बन गए हैं बोनसाई शेखर कुमार…

  • हे रावी | Kavita Hey Ravi

    हे रावी! ( Hey Ravi ) मुझे जिसकी तक़दीर पे आज भी अभिमान है वो भूखा-नंगा ही सही, मेरा हिन्दुस्तान है इस बांस-बन में छांव का आना है सख्त मना, चांद को भी जैसे यहाँ फांसी का फरमान है अब शहर मांस के दरिया में तब्दील हुआ, इसीके जख़्मो का मवाद अपने दरमियान है कल…

  • योगी बन | Kavita Yogi Ban

    योगी बन ( Yogi Ban )   ध्यान धर चिंतन कर योगी बन तू कर्म योगी बन नित नव नूतन हर पल कर सफल अपना जीवन योगी बन नश्वर जगत नश्वर काया स्थिर नहीं कुछ सब माया सूक्ष्म अणु रूप प्राण पाया कर प्रज्ज्वलित मन चेतन योगी बन यह अनुपम जीव यात्रा देह जैसे अक्षर…

  • हे वागेश्वरी मैया, ऐसा वर दे

    हे वागेश्वरी मैया ,ऐसा वर दे   मृदुल मधुर ह्रदय तरंग, स्वर श्रृंगार अनुपम । विमल वाणी ओज गायन, ज्योतिर्मय अन्तरतम । गुंजित कर मधुमय गान , नव रस लहर मानस सर दे । हे वागेश्वरी मैया,ऐसा वर दे ।। दुर्बल छल बल मद माया, प्रसरित जग जन जन । दे निर्मल विमल मति, तमस…

  • बंजारा की दो नयी कविताएँ

    बंजारा की दो नयी कविताएँ ( 1 )  देवता कभी पत्थरों में खोजे गये और तराशे गयें देवता कभी मिट्टी में सोचे गये और ढ़ाले गयें देवता कभी प्लास्टिक में देखे गये और सांचे गयें. देवता लगातार सूखे पत्तों और कोरे कागजों पर चित्रित किये जाते रहें. मगर…अफ़सोस ! देवताओं को कभी हमने दिल में…

  • रह गए काम अधूरे | Geet Rah Gaye Kaam Adhure

    रह गए काम अधूरे ( Rah Gaye Kaam Adhure )   जाने किस मुश्किल में खोए, सपने हुए ना पूरे। बीत गई उमरिया पल पल, रह गए काम अधूरे। रह गए काम अधूरे कालचक्र के दांव द्वंद, कभी चले कभी ठहरे। कभी टूटे किस्मत के ताले, लबों पर लगे पहरे। अपने रूठे राह चल दिए,…

  • तुम्हे रोना नहीं है | Kavita Tumhe Rona Nahi Hai

    तुम्हे रोना नहीं है ( Tumhe Rona Nahi Hai )   हे! पुरुष! तुम्हे रोना नहीं है खो जाना है सबमे मगर खुद मे होना नहीं है हे पुरुष! तुम्हे रोना नहीं है भले तुमसे हि है अस्तित्व परिवार और समाज का तुम पर ही है जिम्मेदारी का बोझ फिर भी, हे पुरुष! तुम्हे रोना…

  • काव्य मिलन | Kavita Kavya Milan

    काव्य मिलन ( Kavya Milan )   माँ-बाप से बढ़कर, हमें करता कोई प्यार नहीं, उनसे ही वजूद हमारा उनके बिना संसार नहीं, हाथ पकड़कर चलना वो ही हमें सिखलाते हैं, उनसे ज़्यादा इस दुनिया में और मददगार नहीं, जब-जब चोट हमें लगती मरहम वो बन जाते, तबीब भी कोई उनके जैसा है तर्जुबेकार नहीं,…