• जिंदगी में हर रोज नया होता है | Zindagi Mein

    जिंदगी में हर रोज नया होता है ( Zindagi Mein Har Roz Naya Hota Hai )   कभी कोई हंसता है कभी वह रोता है जिंदगी में हर रोज कुछ नया होता है।। जिंदगी का मेला है आदमी अकेला है एक पल खुशी है एक पल झमेला है जागता है आज जो वही कल सोता…

  • होलिया में होले छेड़खानी | Holiya me Hole

    होलिया में होले छेड़खानी   रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया, कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया, रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। लाले-लाले होंठवा कै हमरी ललइया, बनके भंवरवा न लूटा ई मलइया। न लूटा ई…

  • पाकीज़गी | Pakizagi

    ( पाकीज़गी )  Pakizagi   दर्द को उडेलने से अच्छा है उसे पी लिया जाय जीना है उसी हाल में, तो क्यों न जी लिया जाय कौन अलहदा है, गम की मौजूदगी से यहाँ तो क्यों न उसी को, सफ़ीना मान लिया जाय कोई रहबर नही यहाँ के,इस कतलखाने मे मरना हि तय है ,…

  • सबक | Sabak

    सबक ( Sabak )  आज तकलीफ़ महसूस की कल भूल जाया करते हैं, अच्छे बुरे वक़्त का सबक हम याद ही कहाँ रखते हैं, चंद शहद में लिपटे ज़हर आलूदा जुमले में खो जाते, झूठे ख़्वाब सजाते, हक़ीक़त से कहाँ वास्ता रखते हैं, पल दो पल का साथ भी पूरी ज़िंदगी लगने लगती है, कभी…

  • उड़त बा रंगवाँ | Urat ba Rangwa

    उड़त बा रंगवाँ ( Urat ba Rangwa )    उठावा न साया घड़ी-घड़ी, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। (2) गमकत बा तोहरो ई फुलवा की क्यारी, लाल-लाल हुई मिट्टी,लाल हुई साड़ी। लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी, लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी। भरी पिचकारी…

  • एडोल्फ हिटलर | Adolf Hitler

    एडोल्फ हिटलर ( Adolf Hitler ) प्रेम की प्यास में व्याकुल एक नवयुवक ऑस्ट्रिया की गलियों में घूमा करता। काश कोई तरुणी उसके दर्द को समझ पाती और करती प्रेम तो वह महान खून का प्यासा ना बनता तानाशाह। प्रेम की व्याकुलता लाती विछिप्तता उसी व्याकुलता में एक दिन अपनी प्रेयसी की याद को सीने…

  • विकास और बाजार | Vikas aur Bazaar

    विकास और बाजार  ( Vikas aur bazaar )    हमने मान लिया इंसान को भगवान और भगवान को पत्थर, पत्थर को रख कर लगा दिया बाजार और फिर शुरू हुआ विकास का क्रम, जमीने बिकने लगी औकात को देख कर लोग होने लगे बेघर सड़के चौड़ी होना शुरू हुई पेड़ कटने लगे उखड़ने लगे जड़…

  • मन्नत | Mannat

    मन्नत ( Mannat )   रूपसी हो तुम्हीं मेरी प्रेयसी हो ग़ज़ल हो मेरी तुम्हीं शायरी हो बहार हो तुम ही तन्हाई भी हो जीवन की मेरे शहनाई भी तुम्ही दो गज ज़मीन हो मेरी तुम ही तुम ही फलक की रोशनी भी कल्पना हो मेरे जज़्बातों की तुम ही नर्म चादर हो खुशियों की…

  • गौ सेवा | Gau Seva

    गौ सेवा ( Gau Seva )   भाग्योदय के द्वार खुलते, गौ सेवा भक्ति से संपूर्ण देव लोक उर वसित, समुद्र मंथन विमल रत्न । सदा पुलकित मनुज जीवन, कर तत्पर सेवा प्रयत्न । पावन मंगल भाव उपमा, सनातन गौरव दर्शन स्तुति से । भाग्योदय के द्वार खुलते, गौ सेवा भक्ति से ।। सिंग शोभा…

  • महिलाएं | Mahilayen

    महिलाएं ( Mahilayen )   महिलाएं एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं महिलाएं कभी ना थकती हैं कभी ना रूकती है ना जाने कैसे रहती हैं महिलाएं आधी आबादी कहलाती हैं महिलाएं माथे पर शिकन तक नहीं आने देती फिर भी रहती हैं शिकार शोषण का यौन अपराधों का जैसे उस पराशक्ति ने इन्हें…