तेवर | Tevar
तेवर ( Tevar ) शिकायत होने लगी है उन्हें, मेरी हर बात पर हमने भी मान लिया, बेबात की बात में रखा क्या है गरज थी तब, मेरी हर बात थी उनके सर माथे पर, अब तो कह देते हैं बात में ऐसा रखा क्या है दौलत ही बन गया पत्थर पारस ,अब जमाने…
तेवर ( Tevar ) शिकायत होने लगी है उन्हें, मेरी हर बात पर हमने भी मान लिया, बेबात की बात में रखा क्या है गरज थी तब, मेरी हर बात थी उनके सर माथे पर, अब तो कह देते हैं बात में ऐसा रखा क्या है दौलत ही बन गया पत्थर पारस ,अब जमाने…
हँसकर मिलते हो ( Hans Kar Milte ho ) जो तुम यूँ हँसकर मिलते हो फूलों के माफ़िक लगते हो ग़म से यूँ घबराना कैसा आख़िर इससे क्यों डरते हो तुम जैसा तो कोई नहीं,जो माँ के चरणों में रहते हो गाँव बुलाता है आ जाओ क्यों तुम शहरों में बसते हो नफ़रत के…
आदि भारती श्री चरण वंदन नैसर्गिक सौंदर्य अप्रतिम, रज रज उद्गम दैविक उजास । मानवता शीर्ष शोभित पद , परिवेश उत्संग उमंग उल्लास । स्नेह प्रेम भाईचारा अथाह, अपनत्व आह्लाद संबंध बंधन । आदि भारती श्री चरण वंदन ।। विविधा अनूप विशेषण, एकत्व उद्घोष अलंकार । संज्ञा गौण कर्म पहचान, संघर्ष विरुद्ध जोश हुंकार…
उन्वान ( Unwan ) वो पन्ना किताब का सोचा था मुकम्मल हो गया चंद लफ्ज़ों की कमी थी उसकी बस तकमील को लम्हों की स्याही ऐसी कुछ बिखरी पन्ना नया अल्फाज़ वही मगर उन्वान ही बदल गया.. लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :- बिन तुम्हारे | Bin Tumhare
नाता ( Nata ) पीना नहीं है, जीना है जिंदगी अनमोल है, खिलौना नहीं है जिंदगी उम्र तो वश में नहीं है आपकी अनुभवों से ही सीना है जिंदगी आए और आकर चले गए तो आने का मकसद ही क्या रहा हम मिले और मिलकर ही रह गए तो इस मुलाकात का वजूद ही…
मां नर्मदा ( Maa Narmada ) अनंत नमामि मां नर्मदा ****** हिंद उत्संग अति आह्लाद, पुनीत दर्शन सरित छटा । मातृ उपमा संबोधन सेतु, नित निर्माण आनंद घटा । दिव्य मर्म अंतर सुशोभना, स्कंद पुराण नित बखान अदा । अनंत नमामि मां नर्मदा ।। शिव सुता मोहक अनुपमा, माघ शुक्ल सप्तमी अवतरण। धन्य संपूर्ण…
16-2-2024 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भाषा एवं कला संकाय विभाग के अन्तर्गत चल रहे उर्दू भाषा विभाग ने आज राष्ट्रीय उर्दू दिवस का आयोजन किया। यह दिवस मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। अधिष्ठाता भाषा एवं कला संकाय प्रो पुष्पा रानी ने कहा कि गालिब मशहूर शायरों में एक हैं जिसने दुनिया को…
शह और मात ( Sheh aur maat ) चाहत को रखो झील की तरह मंथर गति से हि इसे बहने दो लहरों का वेग तो बस धोख़ा है कदमों को जमीं पर ही रहने दो नजारे हि देते हैं दिखाई परिंदों को बसेरा मगर वहाँ कहीं नहीं मिलता लौटकर आना होता है उन्हे वहीं…
आखिर में ( Aakhir Mein ) आज के इस विकास शील माहौल में घर का मुखिया होना गुनाह नहीं है किंतु , परिवार के भविष्य के लिए स्वयं के भविष्य को भुला देना ही सबसे बड़ा गुनाह है बेशक, परिवार आपका है जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व आपकी है धर्म कर्म सभी परिवार के लिए जरूरी…
हे शिव तनया ! मातु नर्मदे ( नर्मदा जयंती – गीतिका ) हे शिव तनया ! मातु नर्मदे ! नमन तुम्हें हर बार । हमें प्यार से दुलराने तुम, खुद चल आईं द्वार !! सदा सदा आशीष दिया है, तुमने सब पुत्रों को सुख समृद्धि और सौभाग्यों के देकर उपहार !! दे अपने वरदान…