• सूर्य नमस्कार | Surya Namaskar

    सूर्य नमस्कार ( Surya Namaskar )   आरोग्य अनुपमा, सूर्य नमस्कार से ******** सुख समृद्ध जीवन पथ, स्वस्थ तन मन अति महत्ता । उत्तम पावन विचार उद्गम, दिव्य स्पंदन परम सत्ता । अद्भुत ओज बिंब सूर्य देव, मूल विमुक्ति सघन अंधकार से । आरोग्य अनुपमा, सूर्य नमस्कार से ।। द्वादश सहज आसन चरण, अंतर्निहित अनूप…

  • बसंत के बहार में | Basant ke Bahar Mein

    बसंत के बहार में ( Basant ke bahar mein )   हवा चली पत्तियां चलीं पेड़ भी थिरकने लगें प्रकृति मदहोश थी बसंत के बहार में प्यार का प्रथम बार अंकुरण जब हो रहा था कण-कण धड़क रहे थे प्यार के इजहार में हर्ष था उल्लास था प्रेम और विश्वास था धड़कनों में चाह थी…

  • संजीवनी संस्था द्वारा स्व. मुरली मनोहर बासोतिया को याद किया गया

    सामाजिक साहित्यिक संस्था संजीवनी द्वारा जांगिड अस्पताल परिसर में नवलगढ़ के साहित्यकार हास्य कवि लेखक संपादक व खिलाड़ी स्व. मुरली मनोहर बासोतिया को उनके जन्मदिन पर याद किया गया। इस अवसर पर कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संजीवनी के अध्यक्ष वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की तथा मुख्य अतिथि…

  • आओ राम के आदर्शो को अब आचरण में उतारें!

    करीब सात सौ साल गुलामी के बाद हमारा देश 15 अगस्त,1947 ईसवी को आजाद हुआ तब से अयोध्या का बहुप्रतिक्षित राममंदिर प्रधान मंत्री के शुभ हाथों रामलला का प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद अपनी समरसता की ओर अग्रसर हो चुका है यह देश-दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। जैसा कि सभी को मालूम…

  • परी आसमान की | Pari Aasman ki

    परी आसमान की ( Pari aasman ki )    जब बात चल रही थी वहाँ आन-बान की लोगों ने दी मिसाल मेरे खानदान की मैं हूँ ज़मीन का वो परी आसमान की कैसे मिटेगी दूरी भला दर्मियान की देखूं मैं उसके नखरे या माँ बाप की तरफ़ सर पर खड़ी हुई है बला इम्तिहान की…

  • मां शारदे | Maa Sharde

    मां शारदे ( Maa Sharde )  ( 3 ) हो ज्ञान का भंडार माँ,यह लेखनी चलती रहे। शुभदा सृजन उपवन खिले,नित ज्योति बन जलती रहे।। कर्तव्य का पथ हो विमल,हर स्वप्न भी साकार हो। पावन रहे ये गंग सी,हर शब्द में रसधार हो।। हो भावना कल्याण की, बस प्रेम का गुंजार हो। रस छंद जीवन…

  • मिठास | Mithaas

    मिठास ( Mithaas )    लग जाती है अगर दिल को कही किसी की बात तुम्हें तो लगती होगी तुम्हारी भी कही क्या कभी सोच हो तुमने इस बात को भी बातों का असर कभी एक पर ही नहीं पड़ता यह चीर हि देती है हृदय जिस किसी के लिए भी कहीं जाए चाहते हो…

  • जीवन बसंत | Jeevan Basant

    जीवन बसंत ( Jeevan Basant )    नेह उत्संग जीवन बसंत कर्म पुनीत धर्म पावन, यथार्थ पथ नित्य गमन । समन्वय परिस्थिति पट, आशा उमंग अंतर रमन । मैत्री प्रभा मुखमंडल संग, सकारात्मक सोच अत्यंत । नेह उत्संग जीवन बसंत ।। नैराश्य हल मुस्कान, हास्य विमुक्त जड़ता । मिलनसारी उन्नत चरित्र, मृदुलता दूर कड़कता ।…

  • मगर | Magar

    मगर ( Magar )    बेशक जिंदा हो तुम अपने भीतर जी भी लोगे हाल पर अपने किंतु, क्या जी सकोगे घर के भीतर ही ! समाज जरूरी है समाज और शहर के लोग जरूरी हैं देश और जगत का साधन जरूरी है बिना और के जीवित रहना संभव ही नहीं तब भी तुम्हारा यकीन…

  • बसंत ऋतु | Basant Ritu

    बसंत ऋतु ( Basant Ritu )    आ गए ऋतुराज बसंत चहुं ओर फैल रही स्वर्णिम आभा, सुंदर प्राकृतिक छटा में खिली पीले पुष्पों की स्वर्ण प्रभा। मां शारदे की पूजा का पावन अवसर है इसमें आता, ज्ञानदायिनी देवी की कृपा से जगत उजियारा पाता। बसंत ऋतु आते ही सुंदर सुरम्य वातावरण हुआ, ठंडी पवन…