• राम की परम स्तुति में | Ram ki Param Stuti

    राम की परम स्तुति में ( Ram ki param stuti mein )   सुषमा श्री निधि,राम की परम स्तुति में हिंद रज रज हर्षल प्रवाह, निहार राम मंदिर निर्माण । कल्पना भव्य साकार रूप, जनमानस स्पर्श पथ निर्वाण । बाईस जनवरी अद्भुत अनुपम, सर्वत्र आनंद राम विग्रह भक्ति में । सुषमा श्री निधि,राम की परम…

  • मां बाप से मुंह मोड़ लिया | Maa Baap se

    मां बाप से मुंह मोड़ लिया ( Maa baap se munh mod liya )   लाठी के सहारो ने, बुढ़ी आंखों के नयनतारों ने। घर के राजकुमारों ने, बेघर बना कर छोड़ दिया। कैसा घोर कलयुग आया, स्वार्थ का यह दौर छाया। सबसे प्यारी हुई माया, मां बाप से मुंह मोड़ लिया। लूटपाट का चलन…

  • वजूद | Vajood

    वजूद ( Vajood )    आज में ही गुम न रहो इतना कि  कल तुमसे तुम्हारा रूठ जाए आज तो आएगा फिर आज के बाद ही संभव है कि कहीं कल तुमसे छूट न जाए समेट लो खुशियां बाहों में अपनी मगर बचाते भी रहो कल के खातिर आज ही कीमती नही तुम्हारे लिए बेहतर…

  • मै सीता की माता | Main Sita ki Mata

    मै सीता की माता  ( Main sita ki mata ) क्यों त्यागे हे राम सिया को, लोकलाज को ताका। क्या मर्यादा छली नही जब, वन वन भटकी वामा। गर्भधारिणी इक अबला के, त्याग में क्या मर्यादा, मुझे बताओ हे रघुनन्दन, दो मत मुझको झाँसा। प्राण जाए पर वचन ना जाए, रघुकुल की मर्यादा। मुझे बताओ…

  • अपमान | Apman

    अपमान ( Apman )   भर जाते हैं जख्म गहरे बदल जाती है वक्त की धारा हो जाते हैं धूमिल यादों के पन्ने किंतु अपमान की लकीरें मिट नहीं पातीं हार जीत, अमीरी गरीबी सभी जुड़े हैं साथ से जीवन के दया करुणा साथ सहयोग के भाव स्वाभिमान की मौत को जिला नहीं पाते एक…

  • पत्नी के रूप | Patni ke Anek Roop

    पत्नी के रूप ( Patni ke anek roop )   शादी के बाद जब ससुराल आती है दुल्हन के रूप में पत्नी खूब भाती है। घड़ी घड़ी सब पूछते हैं उसका हाल पूरा परिवार रखता है खूब ख्याल। दो-चार बार जब ससुराल आती है बहू के रूप में अपना प्रभाव जमाती है । बहू की…

  • भूल गए सावन के झूले | Sawan ke Jhoole

    भूल गए सावन के झूले ( Bhool gaye sawan ke jhoole )    भूल गए सावन के झूले, भूल गए हर प्रीत यहां। भाईचारा प्रेम भूले, हम भूल गए हैं मीत यहां। भूल गए सावन के झूले मान सम्मान मर्यादा भूले, सभ्यता संस्कार को। रिश्ते नाते निभाना भूले, अतिथि सत्कार को। गांव की वो पगडंडी,…

  • प्रेम की कश्ती | Prem ki Kashti

    प्रेम की कश्ती ( Prem ki Kashti )    प्रेम की कश्ती हो और बाहों का सहारा हो, सफ़र इश्क़-ऐ-समन्दर का, दूर किनारा हो ! मुहब्बत की पनाहों में गुज़रते हो हसीं पल ज़िन्दगी का कैसा खूबसूरत वो नज़ारा हो ! कितने ज़्यादा खुशनसीब होते है वो लोग जिन्हें मिला हर कदम प्यार में सहारा…

  • विवशता | Kavita Vivashata

    विवशता ( Vivashata ) (2 )  मेरे भोले पन का सबने , किया खूब उपयोग । किस-किस का मैं नाम गिनाऊँ , सब अपने है लोग ।। मेरे भोले पन का अपने …. नहीं स्वार्थ की भाषा सीखी , कर दी हमने भूल । पल-पल हर पल चुभते हैं अब , हृदय हमारे शूल ।।…

  • श्री राम मंदिर | Shri Ram Mandir

    श्री राम मंदिर ( Shri Ram Mandir ) ( 2 ) श्री राम को मंदिर बन ही गया, भारत माता हरषाईं है । ये जीत सनातन धर्म की है , घर-घर में खुशियां छाई हैं।। श्री राम टेंट में रहते थे ऐसे बीते थे साल कई। लंबा संघर्ष किया है जब, किरणें आशा की जगी…