• हकीकत | Haqeeqat

    हकीकत ( Haqeeqat )   सजाने लगे हैं घर, फूल कागज के अब किसी भी चमन में रवानी नही है बुझे बुझे से हैं जज्बात दिलों के सभी अब किसी भी दिलों में जवानी नहीं है बन गया है शौक, खेल मुहब्बत का भीतर किसी को दिली लगाव नहीं है इल्म भी वफा के अब…

  • हे नट नागर आओ | Hey Nat

    हे नट नागर आओ ( Hey nat nagar aao )    हृदय कमल पर मृदुल चरण धर, मन ही मन हर्षाओ। हे नट नागर आओ। ललित लास्य हो अभिनव लीला। फहराये दुकूल पट पीला। अरुण अधर पर विश्व मोहिनी मुरली मधुर बजाओ। हे नट नागर आओ। उतरें भू पर सुर बालायें। देख त्रिभंगी छवि मुसकायें।…

  • राम जन्मभूमि पावन है | Ram Janmabhoomi

    राम जन्मभूमि पावन है ( Ram janmabhoomi pawan hai )   नए साल में शोर मचाया, अवध को लौटे सियाराम। धर्म ध्वज नभ लहराया, जयकारा जय जय श्रीराम। भव्य है राममंदिर, दिव्य अलौकिक अनुपम धाम। राम नाम से गूंज रहा है, अवधपुरी जप आठों याम। सरयू तट पे राम कीर्तन, मठ मंदिर में राम का…

  • लिखो एक नया इतिहास | Likho ek Naya Itihaas

    लिखो एक नया इतिहास ( Likho ek naya itihaas )   लिखो एक नया इतिहास,उत्साह उमंग जोश से अद्भुत अनूप मनुज जीवन, ईश्वर अनमोल उपहार । आर्त अनंत अलौकिकता, रग रग प्रसूनी बहार । परिश्रमी तपनें मिटाती, असंभवता जीवनकोश से । लिखो एक नया इतिहास,उत्साह उमंग जोश से ।। नतमस्तक वृहत बाधाएं, घनिष्ठ मित्र आत्मविश्वास…

  • वायदों का झांसा | दोहा

    वायदों का झांसा ( Waydon ka jhansa )   वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़! जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!! देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख! सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!! सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग! भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!! मंदिर -मस्जिद…

  • दर्द | Dard

    दर्द ( Dard )   दर्द छलक ही पड़ता है जब गहराइयाँ छू लेती हैं आकाश खामोश जबान भी बोल उठती है फिर मिले अंधेरा या प्रकाश परिधि में ही घूमती जिंदगी तोड़ देती है बांध सहनशीलता की समझ नहीं पाता वही जब रहती है उम्मीद जिस पर आस्था की लग सकते हैं अगर शब्द…

  • कैसी बहार पर है वतन | Watan ke Halat par Ghazal

    कैसी बहार पर है वतन ( Kaisi bahar par hai watan )    किस तरह के निखार पर है वतन भुखमरी की कगार पर है वतन जिनके लहज़े भरे हैं नफ़रत से वो ये कहते हैं, प्यार पर है वतन इतनी महंगाई बढ़ गई हर सू हर घड़ी बस उतार पर है वतन मुल्क के…

  • नैना | कुण्डलिया छंद

    नैना ( कुण्डलिया छंद )   नैना नैना से लडे, नैन हुए लाचार। मन चंचल हो मचल रहा, अब क्या करे हुंकार॥ अब क्या करे हुंकार, शेर मन नाही लागे। तडप रहा हर रात, कहत न पर वो जागे। क्या तोहे भी प्रीत, जगाए सारी रैना। सावन बनकर मेघ, बरसते रहते नैना     कवि : …

  • अपना प्यारा गांव | Apna Pyara Gaon

    अपना प्यारा गांव ( Apna Pyara Gaon )   जिस माटी पर पड़ा कभी अपने पुरखों का पांव है। महानगर से लगता मुझको अपना प्यारा गांव है। घर चौबारा आंगन देहरी चौरा छप्पर छानी। जाने कितने सुखों दुखों की कहते नित्य कहानी। पर्वों त्योहारों पर कितनी हलचल हुई यहां पर, बचपन हुआ जवान यहां का…

  • शक | Hindi Poem Shak

    शक ( Shak )   बिना पुख़्ता प्रमाण के शक बिगाड़ देता है संबंधों को जरा सी हुई गलतफहमी कर देती है अलग अपनों को काना फुसी के आम है चर्चे तोड़ने में होते नहीं कुछ खर्चे देखते हैं लोग तमाशा घर का बिखर जाता है परिवार प्रेम का ईर्ष्या में अपने भी हो जाते…