• धन्य कब होंगे नयन अधीर | Nayan Adheer

    धन्य कब होंगे नयन अधीर ! ( Dhanya kab honge nayan adheer )    न आये देव दीन के द्वार। तृषित उर को दे सका न तोष, तुम्हारा करुणा पारावार। न आये देव दीन के द्वार। निराशा का न हुआ अवसान, हुई आशायें प्रतिपल क्षीण। भग्न होते जाते स्वर तार, करुण क्रन्दन करती हृदवीण। प्रतीक्षा…

  • रद्दी | Raddi

    रद्दी ( Raddi )   माना की जरूरत नहीं किसी की आपको समर्थ है स्वयं में ही खुद के प्रति तब भी आप पूर्णता में ईश्वर तो नहीं है किसी से हाथ मिलाकर के तो देखिए साथ से चलकर तो देखिए किसी के होकर तो देखिए हो जाएगा आभास आपको भी अपनी पूर्णता का सहयोग…

  • अटल जी | Atal Bihari Vajpayee

    अटल जी ( Atal Ji )   अटल जी ने अटल लिया, संज्ञान अटल के लिए, सफर-ए-जिंदगी किया, अपने ही वतन के लिए। 25 दिसंबर 1924 में, जन्म ग्वालियर में लिए, 16 अगस्त 2018 में, स्वर्गवास दिल्ली से हुए। देश के 10 वें प्रधानमंत्री, तीन बार भारत में रहे, हिंदी कवि और पत्रकार, प्रखर वक्ता…

  • हिंदी मेरी शान है | Hindi Meri Shaan

    हिंदी मेरी शान है ( Hindi Meri Shaan )   हिंदी मेरी शान है, हिंदी मेरी सरल पहचान। हिंदी मेरा वतन है, नित्य करूं मैं गुणगान।। हिंदी मेरी भाषा है, राष्ट्रभाषा सदा महान। हिंदी मेरी मातृभाषा, मातृभूमि का वरदान।। हिंदी मेरा सम्मान है, हिंदी राष्ट्र स्वाभिमान। हिंदी मेरे तन मन रहे, हिंदी मेरा अभिमान।। हिंदी…

  • छलावा | Chalawa

    छलावा ( Chalawa )    रंगीन दुनिया में सबका अपना -अपना पहनावा है, कहीं सच में झूठ,कहीं झूठ में सच का दिखावा है। बेमतलब ख़्वाबों से रिश्ते गढ़ता रहता है कोई मन को तह रख तर्कों से कोई करता छलावा है। आवारा बादलों की ज़द कहाँ समझ पाया दिल ठिकाना और भी इनका बरखा के…

  • तरीके से | Tarike se

    तरीके से ( Tarike se )   जो चला गया छोड़कर वह मिला ही था जाने के लिए हर मेल मुक्कमल नहीं होती कुछ लोग मिलते ही हैं मतलब के लिए उसके लिए वक्त बर्बाद ना कर आपके वक्त की कीमत नहीं होगी आज भी छोड़ देगा तुम्हें कल के लिए इस आज की संगत…

  • बंजारा के मुक्तक | Banjara ke Muktak

    तुम क्यों जाते नहीं सब सहेलियां जाती हैं मंदिर,‌ तुम क्यों जाते नहींखुशगवार मौसम को देख जरा भी मुस्कुराते नहींछत पर ही हिरणी की तरह‌ कुलांचे भरते हो तुमकभी सीढ़ियों से उतर कर, गली तक आते नहीं.. जैसे‌ देखा ही नहीं वह ऐसे देखता था मुझे, जैसे‌ देखा ही नहींमैंने भी उसके बारे में, ज्यादा…

  • एक नदी सी बहे कपूरी | Ek Nadi si Bahe Kapuri

    एक नदी सी बहे कपूरी ( Ek nadi si bahe kapuri )    लिखा भाग का पड़े भोगना , बोलो किससे कहे कपूरी . सारे जग के बोली ताने , गुपचुप रहकर सहे कपूरी . गर्द मर्द ली छीन राम ने , दुर्दिन ये काटे ना कटते . खल कामी दुखिया के दर से ,…

  • आत्मबोध पराकाष्ठा | Atmabodh Parakashtha

    आत्मबोध पराकाष्ठा ( Atmabodh parakashtha )   आत्मबोध पराकाष्ठा, स्वर्वेद अनुपमा में मनुज जीवन परम ध्येय, आत्म ज्ञान अनवरत प्रयास । स्पंदन अलौकिक आभा, साधन साध्य दिव्य उजास । आत्मसात नैतिक जीवन चर्या, अंतर्मन योग ध्यान परिक्रमा में । आत्मबोध पराकाष्ठा, स्वर्वेद अनुपमा में ।। वाराणसी उमराह शोभित, विश्व विशालतम भव्य बिंदु । सात मंजिला…

  • पूनम का चांद | Poonam ka Chand

    पूनम का चांद ( Poonam ka chand )    आसमान का चांद आज कुछ ऐसा चमचमा रहा है मानो नहा कर चांदनी से बिल्कुल अभी आ रहा है। ए चंदा, चांदी से चमक कर चले हो किस ओर कहीं मिलने तुमसे आज आने वाला है कोई चकोर। फूलों की डाली से झांकते ऐसे लग रहे…