• गलतफ़हमी रही हरदम | Galatfehmi Shayari

    गलतफ़हमी रही हरदम ( Galatfehmi rahi hardam )    हमारी मानते वो ये गलतफ़हमी रही हरदम बरतने में उन्हें दिल में मिरे नर्मी रही हरदम। जफ़ा करके भी मैं उनका भरोसा जीत ना पाई मेरी ख़ातिर नज़र सरकार की वहमी रही हरदम। मुझे ले डूबी ये गफ़लत की बस मेरे रहेंगे वो मगर गैरों की…

  • नादान | Nadan

    नादान ( Nadan )    धूप से गुजरकर ही पहुंचा हूं यहांतक हमने देखी ही अपनी परछाई इसीलिए रहता हूं हरदम औकात मे अपनी और,कुछ लोग इसी से मुझे नादान भी कहते हैं ,…. अक्सर चेहरे पर बदलते रंग और हर रंग पर बदलते चेहरे से वाकिफ रहा हूं मैं देखे हैं उनके हस्र भी…

  • हताश जिन्दगी | Hataash Zindagi

    हताश जिन्दगी ( Hataash zindagi )  देखा है हमने अक्सर हताश जिन्दगी। हमने भी नही पाई कुछ ख़ास जिन्दगी।। बे-मौत मर रहे हैं हजारों यहाॅं वहाॅं, क्यूॅं आती नही है फिर भी,ये रास जिन्दगी, आकर कोई बताये,ये कैसा फ़लसफ़ा है, दिखती है कभी दूर कभी पास जिन्दगी। ऊपर ख़ुदा है रोशन,मैं झूठ न कहूॅं, जम्मे-ग़फ़ीर…

  • संभावना | Sambhavna

    संभावना ( Sambhavna )   उम्मीदों का चिराग हर वक्त जलाए रखिए जीवन मे संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती माना की चमकता है दिन का ही उजाला तो क्या चांदनी से भी रोशनी नही होती आज ही तो जीवन का आखिरी दिन नही क्या बुझते दीप मे भी भभक नही होती पता नही गहराई मे…

  • श्राद्ध | Shraddh

    “हेलो पण्डित जी प्रणाम!…… मैं श्यामलाल जी का बेटा प्रकाश बोल रहा हूं, आयुष्मान भव बेटा!….. कहो कैसे याद किया आज सुबह सुबह। जी पण्डित दरअसल बात ये है कि हमारे पिताजी का स्वर्गवास हुए एक साल हो गए हैं और उनका श्राद्ध का कार्यक्रम हम धूमधाम से मना रहे हैं जिसमें मैंने नाते रिश्तेदारों…

  • इंसान हूॅं मैं इंसान हूॅं | Insaan Hoon Main

    इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं ( Insaan hoon main, insaan hoon )  इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं । जितना खुश उतना ही परेशान हूॅं।। इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं… इक उमर तक नहीं सौ साल तक लड़ता रहा हूॅं, मैं हर हाल तक कभी ढूढता हूॅं गुलिस्तां-अमन कभी फूंक देता हूॅं हॅंसता चमन अनजान हूॅं…

  • सफ़र | Safar

    सफ़र ( Safar )  कितना लंबा है; कोई नही जानता! कब बदलाव होना है; किसी को पता नहीं चलता! सफ़र बस ये चलता रहता है; शायद ये भी कोशिश! हां बस कोशिश ही कर पाता है; दूर से उस रोशनी को पाने की! हां जो उसके सफ़र को लोगों से अलग बनाती है। जो हां…

  • सुन खरी-खरी | Sun Khari-Khari

    सुन खरी-खरी! ( Sun khari-khari )    खामियाँ निकालने में साँसें तेरी नप जाएँगी, रख होश-ओ-हवास काबू में,साँसें उखड़ जाएँगी। न वक़्त है तेरे काबू में और न ही दिल है काबू में, किसी प्रतिशोध में खूबसूरत दुनिया उजड़ जाएगी। न तेरी मुट्ठी में जमीं है,न आसमां,न चाँद-सितारे, एकदिन तेरे जिस्म से ये रुह भी…

  • आजादी के शहजादे | Poem in Hindi on Bhagat Singh

    आजादी के शहजादे ( Azadi ke shahzade )    अठाईस सितंबर धन्य हुआ,तेईस मार्च की स्तुति में अठाईस सितंबर उन्नीस सौ सात, शहीदे आजम हिंद अवतरण । रज रज अति उमंग उल्लास, सर्वत्र अप्रतिम खुशियां संचरण । फिरंगी सिंहासन हिला डाला, प्रतिभाग कर क्रांतिकारी युक्ति में । अठाईस सितंबर धन्य हुआ, तेईस मार्च की स्तुति…

  •  यह कैसी भक्ति है? | Yah Kaisi Bhakti hai

    15 फीट लंबा दैत्य (राक्षस) बनाते हैं और उसके ऊपर 10 फीट बड़े गणेश जी को खड़ा करते हैं! यह कहाँ तक की समझदारी है। क्या आपको पता नहीं है इस 25 फीट की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए कितना पानी और समय लगने वाला है? एक मूर्तिकार बड़ी मेहनत और लगन से मूर्ति…