• .हैसियत | Haisiyat

    .हैसियत ( Haisiyat )    शौक नही महफिलों को सजाने का मुझे घर की दीवारें भी खड़ी रहें यही बहुत है मेरे लिए देखी होगी तुमने ऊंचाई से जमीन हमने तो जमीन से ऊंचाई को देखा है… चम्मच से हम नही खाते अंगुलियों मे ही हैं पंच तत्व की शक्तियां हांथ ही उठा सकते हैं…

  • गणपति की जय जयकार | Ganpati ki Jai Jaikar

    गणपति की जय जयकार ( Ganpati ki jai jaikar )    एक दो तीन चार, गणपति की जय जयकार। करते सबका बेड़ा पार, विघ्न हरे भरे भंडार। गणपति की जय जयकार गौरीनंदन शंकर प्यारे, प्रथम पूज्य गजानंद प्यारे। रिद्धि सिद्धि संग घर आओ, गजानंदजी देव हमारे। एकदंत विनायक दरबार, छत्र फिरे गल सुमन हार। सुख…

  • सोने सी मुस्कान | Sone si Muskaan

    सोने सी मुस्कान ( Sone si muskaan )    सूरज सबको बाँट रहा है सोने सी मुस्कान कौन है जिसने बंद किये हैं सारे रोशनदान हमने गीत सदा गाये हैं सत्य अहिंसा प्यार के देख के हमको हो जाता है दुश्मन भी हैरान ख़ुद्दारी भी टूट गई मजबूरी के हाथो से दो रोटी की खातिर…

  • ख्वाब की ताबीर हो तुम | इक नज़्म

    ख्वाब की ताबीर हो तुम ( Khwab ki tabeer ho tum )    खुदा की लिखी कोई तहरीर तुम हो या किसी भूले ख्वाब की ताबीर हो तुम तस्सव्वुर में आये किसी ख्याल की तदबीर हो या तकाज़ा मेरी तकदीर का हो तुम मेरी किसी तमन्ना की जैसे तासीर तुम हो या दिल में बसी…

  • ग़ज़ल खंडहर | Khandhar

    खंडहर (Khandhar )    वक्त के साथ मशीनों के पुर्जे घिस जाते है जाने कितने एहसासों में इंसान पिस जाते है। ज़िन्दगी का शिकार कुछ होते है इस कदर उबर कर भी कितने मिट्टी में मिल जाते है। शामोसहर बेफिक्री नहीं सबके नसीब में जीने का सामान जुटाने में ही मिट जाते है। ताकीद करता…

  • पिकनिक | Picnic Laghu Katha

    रोज की तरह सुबह उठकर स्कूल जाने के बदले मैं गहरी नींद में सोया था। उठकर भी क्या करता आज तो सभी बच्चे पिकनिक जो जा रहे थे। तभी माँ ने आकर मुझे उठाया और कहा चिंटू उठ जा पिकनिक जाना है ना! मैं एक झटके में उठ कर बैठ गया और माँ से पूछा…

  • हमसफ़र | Laghu Katha Humsafar

    अक्सर हम यही सोचते रहते है कि यार हमसफ़र ऐसा होना चाहिए, वैसा होना चाहिए।लेकिन कभी ये नहीं सोचते कि जो हमारे लिए हम जैसा हो उसके लिए हम भी वैसे हो पाएंगे क्या? नहीं ना? तो फिर उम्मीद बस एक से ही क्यूं?हम खुद को भी तो उसके हिसाब से ढालने का प्रयास कर…

  • पर्यटन | Paryatan

    पर्यटन! ( Paryatan )    नई दुनिया की सैर कराता है पर्यटन, दिल पे लदे बोझ को हटाता है पर्यटन। प्रकृति साैंप देती है वह अपना रंग-रूप, सैर-सपाटे से हाथ मिलाता है पर्यटन। घूमना-फिरना है जीवन का एक हिस्सा, वादियों से भी आँख लड़ाता है पर्यटन। भूल-भुलैया में खोते हैं जाकर कितने, उच्च- शिखरों पर…

  • श्री हरि के अनन्त स्वरुप | Shree Hari ke Anant Swaroop

    श्री हरि के अनन्त स्वरुप ( Shree hari ke anant swaroop )    भाद्रपद शुक्ला-पक्ष की चतुर्दशी को करतें है व्रत, जिसके न आदि का पता न अंत का वो है अनन्त। सृष्टि की रचना किऐ भगवान हरि विष्णु इस दिन, करतें हम हर वर्ष इस दिन व्रत और पाते है मन्नत।। 14 लोकों का…

  • मन का लड्डू | Man ka Laddu

    मन का लड्डू ( Man ka Laddu )    जाने कितने स्वप्न संजोए, मन का ताना बाना बुन। मन में लड्डू फूट रहे थे, जीवन में खुशियों को चुन। मन में मोतीराम बने हम, मन ही मन इठलाते थे। मन के लड्डू फीके ना हो, भावन ख्वाब सजाते थे। मन ही मन में ठान लिया,…