• कितने आलोक समाये हैं | Kitne Alok

    कितने आलोक समाये हैं ( kitne alok samay hai)    तुमने जो निशिदिन आँखों में आकर अनुराग बसाये हैं हम रंग बिरंगे फूल सभी उर-उपवन के भर लाये हैं हर एक निशा में भर दूँगा सूरज की अरुणिम लाली को बाँहों में आकर तो देखो कितने आलोक समाये हैं प्रिय साथ तुम्हारा मिलने से हर…

  • मत उलझो तुम सवालों में | Mat Uljho

    मत उलझो तुम सवालों में ( Mat uljho tum sawalon mein )   क्या सोचेंगे दुनिया वाले, तो रह लेना हर हालों में। चलते जाना मंजिल को, मत उलझो तुम सवालों में। बाधाएं भी नजर आएंगी, मुश्किलें भी बहकाएंगी। अड़चनों को पार करना, प्यारे मंजिल मिल जाएगी। प्रलोभन में पड़ न जाना, फंस मत जाना…

  • शब्दों को गढ़ना सीख लिया | Shabdon ko Gadhana Seekh Liya

    शब्दों को गढ़ना सीख लिया ( Shabdon ko gadhana seekh liya )    रंग बदलती दुनिया में हमने भी बदलना सीख लिया। भाग दौड़ के जीवन में संभल के चलना सीख लिया। कुंदन बनने की खातिर ज्वाला में जलना सीख लिया। सुरभित सी पुरवाई में मादक बन बहना सीख लिया। सपने सच हो जाएंगे आंखों…

  • भिखमंगा | Bhikhmanga

    भिखमंगा  ( Bhikhmanga )    भुख से टुटल बा, पेट ओके रुठल बा दु दाना के आश बा, ओके इहे पियास बा   लोटा ओके हाथ में, एगो कपड़ा साथ में दर-दर उ भटक रहल बा, रोटी के तलाश में समय से झगड़ा बा, आंख से लंगड़ा बा सबसे ओके आश बा , कुछ खाये…

  • दीप | Deep

    दीप ( Deep )    न सही विश्वास मेरा, पूछ ले उस दीप से। जो रात सारी रहा जलता, साथ मेरे बन प्रतिबम्ब।। हाल सारा जायेगा कह, दीप वह जो बुझ गया। जगने का सबब मेरा, और जलने के मजा।। मांगतीं विश्वास का बल, देख ले इक नजर भर। बस वही लेकर मैं संबल, जलती…

  • निज भाषा | Nij Bhasha

    निज भाषा ( Nij Bhasha )    देना ही है यदि मान हिंदी को बढ़ानी ही है पहचान हिंदी की क्या होगा एक दिन के मनाने से दो स्थान इसे जैसे माथे के बिंदी की हर पल सोते जागते उठाते बैठते कहते रहो राम राम जय मां भारती निज भाषा ही है मूल तत्व ज्ञान…

  • हिन्दी है अभिमान हमारा | Hindi hai Abhimaan Hamara

    हिन्दी है अभिमान हमारा ( Hindi hai abhimaan hamara )    हिन्दी है अभिमान हमारा, शब्दों का ये खेल है सारा। स्वर व्यंजन से बना न्यारा, मातृभाषा ये प्यारा-प्यारा।। बिना इसके जीवन अधूरा, ज्ञान का ये खज़ाना सारा। काश्मीर से कन्या-कुमारी, बोलें हिन्दुस्तान इसे सारा।। विश्व प्रसिद्ध बनी ये भाषा, है भारत का ये राजभाषा।…

  • आ चले लौटकर फिर उसी गांव में | Poem in Hindi on Gaon

    आ चले लौटकर फिर उसी गांव में ( Aa chale lautkar phir usi gaon mein )    आ चले लौटकर फिर उसी गांव में। हरेभरे खेत पीपल की ठंडी छांव में। बुजुर्गों की चौपालें लगती हो जहां। झुमते गाते मस्ताने नाचे देखो वहां। लोग कर ले गुजारा एक ही ठांव में। आ चले लौटकर फिर…

  • फासला | Phasala

    फासला ( Phasala )   सोचता हूं उकेरूं आज आपका चित्र या लिखूं अनाम कुछ भाग्य का लेखा लिखा तो बहुत कुछ अब तक हमने फिर भी लगता है की कुछ नही लिखा रख लिया हूं स्मृतियों को सहेजकर मिले थे आप जब हमसे पहली बार हुई न कुछ बातें ,तब भी बहुत हो गईं…

  • लाली उषा की | Lali Usha ki

    लाली उषा की ( Lali usha ki )   युगों की रची सांझ उषा की न पर कल्पना बिम्ब उनमें समाये बनाये हमने तो नयन दो मनुज के जहाँ कल्पना स्वप्न ने प्राण पाये। हंसी में खिली धूप में चांदनी भी दृगों में जले दीप मेघ छाये। मनुज की महाप्रणता तोड़कर तुम अजर खंड उसको…