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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • कविता में डूबा रहता हूं | Kavita mein
    कविताएँ

    कविता में डूबा रहता हूं | Kavita mein

    ByAdmin September 9, 2023

    कविता में डूबा रहता हूं ( Kavita mein dooba rahta hoon )    कविता में डूबा रहता हूं। छंदों की भाषा कहता हूं। भावों का सागर यूं उमड़े। सरिता बनकर बहता हूं। नव सृजन स्वप्न बुनता हूं शब्दों के मोती चुनता हूं। मनमंदिर में दीप जलता। वीणा की झंकार सुनता हूं। सौम्य शब्द सुधारस घोले।…

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  • Poem on Fitrat in Hindi
    कविताएँ

    .फितरत | Poem on Fitrat in Hindi

    ByAdmin September 9, 2023September 10, 2023

    .फितरत ( Fitrat )    जरूरत के बिना कमी का एहसास नही होता लगाव न हो तो ,करीब भी कभी पास नही होता मांगने से मिल गई होती,यदि चाहत किसी की तो किसी की याद मे,मुहब्बत खास नही होती यूं तो भरते हैं दम सभी,अपनेपन का इस दौर मे यदि चाहत दिल की होती,तो कोई…

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  • Kyon ki Shayari
    ग़ज़ल

    क्यों गले से लगाया मुझे | Kyon ki Shayari

    ByAdmin September 9, 2023

    क्यों गले से लगाया मुझे ( Kyon gale se lagaya mujhe )    ख़्वाब से जब जगाया मुझे उसने गमगीन पाया मुझे वो सितमगर बहुत देर तक देखकर मुस्कुराया मुझे कोई मंज़िल न रस्ता कोई दिल कहां लेके आया मुझे खुद न लैला बनी उसने पर एक मजनूं बनाया मुझे जब बिछड़ना जरूरी था फिर…

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  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : आधुनिक हिन्दी साहित्य के युग पुरुष
    विवेचना

    भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : आधुनिक हिन्दी साहित्य के युग पुरुष

    ByAdmin September 9, 2023

    जीवनी हिंदी साहित्य में अपने अल्प जीवन काल में जिस व्यक्ति के नाम पर एक युग की शुरुआत होती हैं वे थे भारतेंदु हरिश्चंद्र। उन्होंने अपने मात्र 35 वर्ष के जीवन काल में इतना लिख गए जितना लोगों को सैकड़ो वर्षों में भी लिखना मुश्किल था । यही कारण है कि उन्हें हिंदी साहित्य का…

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  • हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी | Rashtrabhasha Hindi
    कविताएँ

    हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी | Rashtrabhasha Hindi

    ByAdmin September 9, 2023

    हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी ( Hamari rashtrabhasha Hindi )    चाहे हों हम हिंदू मुस्लिम सिख या ईसाई, भारत माता की संतानें हम सब हैं भाई भाई, एक हमारी रगों में बहता खून और एक हैं हमारे रंग रूप, चांद देता बराबर चांदनी और सूरज भी देता सबको समान धूप, सब कुछ देने वाला है ईश्वर…

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  • माया की छाया | Maya ki Chhaya
    कविताएँ

    माया की छाया | Maya ki Chhaya

    ByAdmin September 8, 2023

    माया की छाया! ( Maya ki chhaya )    तृष्णा तेरी कभी बुझती नहीं है। झलक इसलिए उसकी मिलती नहीं है। निर्गुण के आगे सगुण नाचता है, क्यों आत्मा तेरी भरती नहीं है। पृथ्वी और पर्वत नचाता वही है, प्रभु से क्यों डोर तेरी बँधती नहीं है। कितनी मलिन है जन्मों से चादर, बिना पुण्य…

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  • Mohan
    कविताएँ

    मोहन तिवारी की कविताएं | Mohan Tiwari Poetry

    ByAdmin September 8, 2023September 1, 2025

    आप अकेले नहीं यूँ तो, कल एक अनुमान ही है केवलनिर्भर है आज के दौर की बुनियाद परमाना आज सा अनमोल कुछ नहीं यहाँआज की नींव पर ही आज और कल है अतीत में ही छिपी प्रेरणा है कल कीकिंतु, वर्तमान में अनुसरण जरूरी हैराह तो बनानी होती है स्वयं को हीबढ़ता नहीं वो जिसमें…

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  • स्वामी शिवानंद सरस्वती : योग के वैज्ञानिक
    विवेचना

    स्वामी शिवानंद सरस्वती : योग के वैज्ञानिक

    ByAdmin September 8, 2023

    योग के वैज्ञानिक स्वरूप का अनुसंधान जिन महान पुरुषों ने किया उनमें स्वामी शिवानंद जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है । स्वामी जी ने ऐसा दिव्य पथ का निर्माण किया जिस पर चलकर प्रत्येक मानव अपने जीवन का सफल बना सकता है। यही कारण है कि उन्होंने अपनी संस्था का नाम दिव्य जीवन…

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  • Baba Malketu
    कविताएँ

    बाबा मालकेतु | Baba Malketu

    ByAdmin September 8, 2023September 10, 2023

    बाबा मालकेतु ( Baba Malketu )    अरावली की कंदराओं में, धर्म आस्था की पुण्य धारा शेखावाटी हरिद्वार लोहार्गल, आध्यात्म आकर्षण अद्भुत । पाप मोक्ष लक्षित जन मानस, परम उपासना भाव अंतर स्तुत । संस्कार परंपराएं अभिवंदन, उर ओज सनातन धर्म जयकारा । अरावली की कंदराओं में, धर्म आस्था की पुण्य धारा ।। रंग बिरंगी…

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  • बिटिया मांगे अपना हक | Bitiya Mange Apna Hak
    कविताएँ

    बिटिया मांगे अपना हक | Bitiya Mange Apna Hak

    ByAdmin September 8, 2023

    बिटिया मांगे अपना हक ( Bitiya mange apna hak )   अब अब्बू मुझको भी पढ़ने दो, हमें क्यो कहते हो आप नो नो नो। दिलादो पाटी बरता और पेंसिल दो फिर हमको कहो विद्यालय गो गो गो। दिलादो प्यारी सी यूनिफॉर्म दो, सुहानी जुराबे और जूता जोड़ी वो‌। पहनकर जाऊॅं साथ खाना ले जाऊॅं,…

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