• भारत चांद पर छाया है | Bharat Chand par

    भारत चांद पर छाया है ( Bharat chand par chaya hai )     माना के तू चाँद है भारत में सिवान सोमनाथ है विक्रम राह से भटका था तू तनिक हाथ से छिटका था   ऑर्बिटर से घिरा है तू कैसा सरफिरा है तू ? विक्रम फिर से जुड़ जायेगा तू कहीं और ना…

  • भक्त कवि तुलसीदास जी | Tulsidas ji

    मध्यकालीन हिंदी भक्त कवियों में तुलसीदास जी संभवत ऐसे कवि थे जिन्होंने व्यवस्थित साहित्य का सृजन किया। उनका जन्म संवत् 1554 की श्रवण सप्तमी के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में हुआ था।कहा जाता है की बचपन में ही उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी ।वह द्वार द्वार रोते बिलखते भीख मांगा करते थे। जिसका…

  • बात उस चांँद की है | Baat us chand ki

    बात उस चांँद की है ( Baat us chand ki hai )    बात उस चांँद की है जो कवियों की कल्पनाओं में मुस्कुराता रहा जो बच्चों को अपना मामा नजर आता रहा एक अद्भुत शीतल ग्रह, सौंदर्य शिखर मन का कारक, सब का अति प्रिय था जो दुर्लभ। बात उस चांँद की है जिसकी…

  • चंद्रयान की सफलता | Chandrayaan ki Safalta

    चंद्रयान की सफलता ( Chandrayaan ki safalta )   दुर्लभ को सम्भव किया, भारत देश महान।। चन्द्रयान की सफलता, जय जय जय विज्ञान।। जय जय जय विज्ञान, निराली तेरी माया। भारत अनुसंधान, जगत में अव्वल छाया। कहैं शेष कविराय, जियें वैज्ञानिक वल्लभ। कुशल प्रशासन नीति, मिथक तोड़े सब दुर्लभ।।   लेखक: शेषमणि शर्मा”इलाहाबादी” प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद…

  • चंद्रयान | Chandrayaan

    चंद्रयान ( Chandrayaan )   खुशियां मनाओ सब मिलकर प्यारे, चांद पर पहुंच गए अब कदम हमारे। चंद्रयान की सफल लैंडिंग पर, गूंज रहा हमारा नाम पूरी दुनिया भर। स्पेस रिसर्च के फील्ड में अब हम भी आगे बढ़ जायेंगे, नित नई खोजों से हम अब कई राज़ के पर्दे उठाएंगे। भारत के ज्ञान विज्ञान…

  • चंदामामा | बाल मनुहार | पत्र

    प्रिय चंदा मामा सुनो ना, चंदा मामा! मां जब मैं आपसे मिलने की जिद करता हूं तो मुझे थाली में पानी भरकर तुम्हे दिखाती है। कहती है कि जैसे तुम्हारे पापा वीडियो कॉल करते है ना वैसे ही है । जब पूछता हूं चंदा मामा बोलते क्यू नही तो कहती है ‘ उन्हें बहुत से…

  • चांद पर भारत | Chand par Bharat

    चांद पर भारत! ( Chand par Bharat )    आशियाना चांद पे मिलके बनायेंगे, दूसरे ग्रहों पे भी कदम हम बढ़ाएंगे। गिर करके उठना दुनिया की रीति है, हौसले से फासले खुद हम घटाएंगे। अश्कों से जंगल होता हरा नहीं, हकीकत की दुनिया वहां अब बसायेंगे। महकेंगी सांसें पर अभी है तपाना, नए मंजरों पे…

  • नारी क्यों | Nari Kyon

    नारी क्यों ( Nari Kyon )    हर रचना के केन्द्र बिन्दू में नारी क्यों हैं। दिखती हैं कल्याणी पर,लाचारी क्यों हैं। बेबस सी मजबूर दिखा दो चाहे जितना, हर पापों का अन्त करे वो,काली क्यो हैं। रसवन्ती कचनार दिखे,मनभावनी क्यों है। हर पुरूषों की चाहत लगती, कामी क्यों हैं। जैसा जिसने देखा वैसी नजर…

  • वर्तमान समझ | Vartman Samaj

    वर्तमान समझ ( Vartman Samaj )   शिक्षा का विकास हुआ,समझ अधूरी रह गई पूरे की चाहत मे ,जिंदगी अधूरी रह गई बन गए हों कई भले ही महल अटारी चौबारे मुराद भीतर ही मन की,दम तोड़ती रह गई बिक गए पद,सम्मान औ प्रसंशा के मोल मे माता स्वाभिमान की,छाती पिटती रह गई सोच बदली…

  • यूं आहें भरता हूँ मैं | Yoon Aahen Bharta hoon Main

    यूं आहें भरता हूँ मैं ( Yoon aahen bharta hoon main )    दो दिन से भूखा हूँ मैं ? रोठी को तरसा हूँ मैं दूर ग़रीबी न यहाँ हो बरसों से तड़फा हूँ मैं पैसे पूरे मिलते कब मेहनत भी करता हूँ मैं कोई तो भेज यहाँ रब जीवन में तन्हा हूँ मैं मुश्किल…