• ये जीवन की पतवार तेरे हाथ में | Jeevan ki Patwar

    ये जीवन की पतवार तेरे हाथ में ( Ye jeevan ki patwar tere haath mein )   मेरी नैया है मझधार, गुरुवर करना भव से पार। करूं अरदास मैं, यह जीवन की पतवार, तेरे हाथ में।। अनजाना सा राही हूं मैं ,राह नजर ना आवै । राग द्वेष में उलझ रहा हूं, विषयन भी भटकावै।…

  • पुरुषों | Purushon

    पुरुषों ( Purushon )    यूं ही कब तक जलती रहेगी नारी हवस की इस आग मे पुरुषों कब तक रहोगे तुम खून को पीते देह के चीथड़े नोच नोच पुरुषों.. नारी केवल वही नारी नही कुत्तों जिसे कहते मां ,बहन ,बेटी कुत्तों नारी वह भी है जो पल रही कहीं बनने को तुम्हारी बीबी…

  • मणिपुर की व्यथा | Manipur ki Vyatha

    मणिपुर की व्यथा ( Manipur ki vyatha )   मूक बधिर हुआ धृतराष्ट्र द्वापर जैसी फिर चूक हुई सत्ताधारी अब चुप क्यों है, राज सभा क्यूं अब मुक हुई ।। लोक तंत्र की आड़ न लेना क्या वोटो के ही सब गुलाम है या द्वापर जैसी सभा हुई एक पांचाली आज भी समक्ष सबके निर्वस्त्र…

  • नशामुक्त अभियान | Nasha Mukt Abhiyan

    नशामुक्त अभियान ( Nasha mukt abhiyan )    सबको मिलकर रचना है इतिहास हिन्दुस्तान में, नामुमकिन कुछ नहीं इंसानों के लिए जहान में। दीप ज्ञान का जलाना‌ है ये लिया क़लम हाथ में, नशीलें-पदार्थ ना आनें देंगे हिन्ददेश महान में।। जीतेंगे यह युद्ध भारतीय नशामुक्त अभियान में, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू जला देंगे श्मशान में। नही…

  • खाक में न मिलाओ वतन को कोई | Khaak mein na Milao Watan ko

    खाक में न मिलाओ वतन को कोई! ( Khaak mein na milao watan ko koi )   आग कहीं पे लगाना मुनासिब नहीं, होश अपना गंवाना मुनासिब नहीं। दे के कुर्बानी किए चमन जो आजाद, ऐसी बगिया जलाना मुनासिब नहीं। तुमने जो भी किया आज देश है खफ़ा, हक़ किसी का मिटाना मुनासिब नहीं। सबकी…

  • घर की इज्जत, बनी खिलौना | Ghar ki Izzat

    घर की इज्जत, बनी खिलौना ( Ghar ki izzat, bani khilauna )    अब कहां कोई खेलता है, खिलौनों से साहब?? अब तो नारी की अस्मिता से खेला जाता है। यत्र पूज्यंते नार्याः, रमंते तत्र देवता, बस श्लोकों में ही देखा जाता है। तार तार होती हैं घर की इज्जत, बड़ी शिद्दत से खेल सियासत…

  • इंसान | Insaan

    इंसान ( Insaan )    हर सू हैं झूठे इंसान अब कम हैं सच्चे इंसान मेरी मुट्ठी में भगवान करता है दावे इंसान अपनी ख़ुदग़र्ज़ी में अब भूल गया रिश्ते इंसान सोच समझ के कर विश्वास अब कम हैं अच्छे इंसान लोगों को जो चुभ जाये शौक़ न वो पाले इंसान जिस रस्ते पर दाग़…

  • जायज | Jayaz

    जायज ( Jayaz )    विरोध के लिए ही विरोध होना जायज नहीं विरोध योग्य हो तो विरोध भी जरूरी है सत्य है हर आदमी हर कहीं सही नही होता किंतु ,वही हर जगह गलत भी नहीं होता स्वयं को देखकर ही और का भी विरोध, हो लबादे मे रहकर,कीचड़ फेंकना ठीक नही होगा रास्ता…

  • इक पल | Ik Pal

    इक पल ( Ik pal )    वक्त के गुबार से निकला हुआ अधूरे अधजले ख्वाबों की खाक में लिपटा हुआ वो इक ‘पल’ रूबरू आ गया हो जैसे… खुद ही उसकी राख उतार खारे पानी से धो संवारकर संजोकर संभाल कर उस इक ‘पल’ को अब कई बार जी जाना है मुझे   लेखिका…

  • कभी कभी | Kabhi Kabhi

    कभी कभी ( Kabhi kabhi )    कभी कभी ही होता है दिल बेचैन इतना कभी कभी ही उठता है ज्वार सागर मे कभी कभी ही होती है बारिश मूसलाधार कभी कभी ही आते हैं ख्याल इंतजार मे… कभी कभी ही चांद निकला है ओट से कभी कभी ही होता है एहसास गहरा कभी कभी…