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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Badhte Rahiye
    कविताएँ

    बढ़ते रहिए | Badhte Rahiye

    ByAdmin July 30, 2023

    बढ़ते रहिए ( Badhte Rahiye )    आप देते हैं महत्व जब भी कभी किसी को वो पहले परखता है आपकी जरूरत को इंसानियत भी है अनमोल,इंसान के लिए हर किसी को मुफ्त मे,लुटाया नही करते दीजिए इज्जत भी तो ,जरूरी हो जितनी हर किसी का हाजमा ,सही नही होता भीड़ का माहौल है,अपने को…

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  • Dil ki Shayari
    शेरो-शायरी

    दिल को | Dil ki Shayari

    ByAdmin July 29, 2023

    दिल को ( Dil ko )   बे -इंतहा, बे – हिसाब, बे – पनाह, बे- पायान प्यार है ‘ गर दिल को बे – इंतहा, बे – हिसाब, बे- पनाह, बे -पायान दर्द भी होता है उस दिल को..   लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :- अलसायी कलम |…

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  • Narangi
    कविताएँ

    स्वास्थ्यवर्धक है नारंगी | Narangi

    ByAdmin July 29, 2023

    स्वास्थ्यवर्धक है नारंगी ( Swasthya vardhak hai narangi )    आयुर्वेदा में ‌इसके गुणों के फ़ायदे बताएं है अनेंक, गेंद जैसा दिखने वाला गुणकारी यह फल है एक। रंग-रूप एवं स्वाद जिसका है सभी फलों से भिन्न, आसानी से जो मिल जाता नाम इसके है अनेंक।। फल फूल छिलके पत्ते जिसके सभी आते है काम,…

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  • Samajh mein Kyon Nahi Aaya
    कविताएँ

    समझ मे क्यों नही आया | Samajh mein Kyon Nahi Aaya

    ByAdmin July 29, 2023

    समझ मे क्यों नही आया ( Samajh mein kyon nahi aaya )   जितना भी मांगा था रब से, उससे ही ज्यादा ही पाया। मन पागल ना शुक्ररा निकला, जब देखा रोता ही पाया। प्रेमिका माँगी पत्नी दे दी, एक नही दो दो से मिला दी। जो मांगा वो सबकुछ दे दी, पर मन को…

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  • Gita Manas
    कविताएँ

    गीता मानस | Poem on Gita Manas

    ByAdmin July 29, 2023July 29, 2023

    गीता मानस ( Gita manas )    अद्भुत रचना शेष की , अलंकार रस छंद । गीता मानस को पढ़ें , दूर सभी हों द्वंद्व ।। भगवद्गीता ग्रंथ का , छंदों में अनुवाद । जीवन को रसमय करें , करे दूर अवसाद।। गीता मानस का सृजन , मानवता का पंथ । गूढ़ विषय सरलीकरण ,…

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  • Gita Manas
    पुस्तक समीक्षा

    आत्मानुभूति का प्रकटीकरण शेषमणिजी का “गीता मानस “

    ByAdmin July 29, 2023July 29, 2023

    “गीता मानस ” | पुस्तक समीक्षा ( Gita Manas : Book Review )    इस सृष्टि के नियन्ता सर्व शक्तिमान परमपिता परमात्मा सत् चित आनन्द स्वरूप है। यह जीव इन्हीं परमात्मा का अंश होने के कारण ईश्वर के गुण, जीव के अन्दर दृष्टिगोचर होते हैं। यह जीव भी अपनी मूल सत् चित व आनन्द स्वरूप…

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  • Main aur chai
    कविताएँ

    मैं और चाय | Main aur chai

    ByAdmin July 29, 2023

    ” मैं और चाय “ ( Main aur chai )   ले चाय की चुस्की लगाते थे, दोस्तों के साथ महफिल हम जमाते थे। लंबी-लंबी छोड़ कर गप्पे हम लड़ाते थे, चाय की टपरी पे आधी ज़िंदगी बिताते थे। टांग खींच कर दोस्तों की खूब मस्ती करते थे , पता ही नहीं चलता कब घंटों…

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  • Sukoon
    कविताएँ

    सुकून | Sukoon

    ByAdmin July 29, 2023

    सुकून ( Sukoon )    यादें भी काफूर हुईं,उम्मीदें भी जाती रहीं खाक के सिवा,धरती भी अपनी रही नही चाहा था जिसे,वो भी दिल से पराई हुई हो क्या बात दिल की ,तिश्नगी अब रही नही बदलते चमन की खुशबू मे,रंगत नही होती सुना है यार की,वो मंजिल भी पूरी हुई नही तलाशे सुकु कब…

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  • Yaad Aane Lage
    कविताएँ

    याद आने लगे | Yaad Aane Lage

    ByAdmin July 29, 2023July 29, 2023

    याद आने लगे ( Yaad aane lage )    वो गुजरे जमाने सताने लगे। घड़ी हर घड़ी याद आने लगे। देख उनको लब मुस्कुराने लगे। दिल के तार संगीत सजाने लगे। मेहमान घर पे जब यूं आने लगे। दीप खुशियों के हम जलाने लगे। गीत मंचों पे जब से गाने लगे। तराने सुहाने हमको आने…

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  • Bhigaile more Chunariya
    भोजपुरी कविता

    भींगलै मोर चुनरिया | Bhigaile more Chunariya

    ByAdmin July 28, 2023

    भींगलै मोर चुनरिया! ( Bhigaile more chunariya )    अरे रामा! मनवाँ में उठे लहरिया, बरस रहल पानी ए हरी। उमड़ -घुमड़ के बरसे बदरिया, सइयाँ घर नहीं, गए शहरिया। अरे रामा ! भींगलै मोर चुनरिया, बरस रहल पानी ए हरी। अरे रामा! मनवाँ में उठे लहरिया, बरस रहल पानी ए हरी। रहि -रहि के…

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