• दुष्यंत त्यागी हो गए | Dushyant Tyagi ho Gaye

    दुष्यंत त्यागी हो गए ( Dushyant tyagi ho gaye)    आत्मा आहत हुई तो शब्द बागी हो गए। कहते कहते हम ग़ज़ल दुष्यंत त्यागी हो गए।   है सियासत कोठरी काजल की रखना एहतियात, अच्छे-अच्छे लोग इसमें जा के दागी हो गए।   गेह-त्यागन और यह सन्यास धारण सब फ़रेब, ज़िन्दगी से हारने वाले विरागी…

  • भ्रम | Bhram

    भ्रम ( Bhram )   जो गति तेरी वो गति मेरी,जीवन भ्रम की छाया है। नश्वर जग ये मिट जाएगा, नश्वर ही यह काया है। धन दौलत का मोह ना करना, कर्म ही देखा जाएगा, हरि वन्दन कर राम रमो मन,बाकी सब तो माया है। यौवन पा कर इतराता हैं, बालक मन से भोला है।…

  • पिताजी आप कहाॅं चलें गए | Pitaji

    पिताजी आप कहाॅं चलें गए ( Pitaji aap kaha chale gaye )    अनेंक उपकार करके पिताजी आप कहाॅं चलें गए, अपनें दुःख ग़म को छुपाकर आप संग ही ले गए। निश्छल आपका प्यार हम पर बरसा कर चलें गए, हज़ारों खुशियां हमको देकर आप कहाॅं चलें गए।। जीवन के कई उतार-चढ़ाव मुझको सिखाकर गए,…

  • योग पर कविता | Poem on Yoga in Hindi

    योग पर कविता ( Yoga par kavita )    थका हुआ जब पाओ तुम योगा को अपनाओ तुम योगा से भागे रोग सभी खुशियां होंगी पास तभी अनुलोम-विलोम किया करो जीवन जी भर जिया करो बच्चे बूढ़े हो या जवान योग से मिलता आराम सुबह सवेरे उठ जाओ निवृत्त सबसे हो आओ योगा से ताजगी…

  • बाल कविता – सुबह की गुनगुन

    बाल कविता – सुबह की गुनगुन ( Bal Kavita – Subah ki gungun )    चिड़िया चहकी चूंँ चूंँ चुन सुबह हुई अब जागो तुम करो मातृभूमि,माँ-पिता को नमन कुछ प्रभु चरणों में ध्यान उसके बाद ही शुभ काम सुनो दादी की प्रार्थना धुन। क्यूँ न स्कूल जाने से पहले थोड़ा योग भी कर लो…

  • योग | Yoga Diwas

    योग ! ( Yoga )  ( विश्व योग दिवस विशेष )   खिला -खिला रहता है जीवन, जो भी योग अपनाता। छिपी हैं योग में अनंत शक्तियाँ, पर विरला इसे जगाता। प्राणायाम के माध्यम से हम, अपना विश्वास बढ़ाएँ । अनुलोम-विलोम,कपालभाती से, जीवन दीर्घायु बनाएँ। चुस्ती-फुर्ती रहती दिनभर, मन प्रसन्न भी रहता। बुद्धि-विवेक बढ़ता है…

  • 21 जून की ख़ास पहचान | 21 June ki Khaas Pahchan

    21 जून की ख़ास पहचान ( 21 June ki khaas pahchan )   सारी ज़िन्दगी अपने-आप को स्वस्थ वही है पाता, आनंदित प्रफुल्लित होकर योगाभ्यास जो करता। मानसिक शारीरिक आध्यात्मिक ऊर्जा वो बढ़ाता, जीवन को सार्थक बनाता जो रोज़ इसको करता।। ऋषि-मुनि और महर्षियों की सत्य हुई यें कहावत, योगाभ्यास ही है जरिया जो रोगों…

  • बचा लो सृष्टि भगवान | Bachalo Srishti Bhagwan

    बचा लो सृष्टि भगवान! ( Bachalo srishti bhagwan )    अनर्थ व्यापक हो रहे हैं धरती धरा पर दुष्ट आततायी बढ़ रहे हैं धरती धरा पर बढ़ रहे हैं जुल्म यहाँ पर निर्धन बेबस हैं लाचार जाने कैसे देखकर चुप है? जगत के तारनहार! अत्याचार बढ़ा है हद से मची लूट है चहुंओर दबंगई हत्या…

  • घूम रहे भगवान बन | Ghoom Rahe Bhagwan ban

    घूम रहे भगवान बन ( Ghoom rahe Bhagwan ban )    दो शब्दों का, चार किताबों का! कुछ मीलों का नहीं , शायद जन्मों का सफर है आजकल हर चीज का छिद्रान्वेषण करने वाले, मन के काले , दूसरों में दाग ढूंँढने वाले इस जीव के पास न बुद्धि है, न विद्या,न बल है! न…

  • बरसात | Barsaat

    बरसात ( Barsaat ) ( 2 ) सुना शहर तेरे में , जम के कुछ यूं बरसात न हुई मेरे आने से, तेरे दिल की ज़मीं क्यों सहरा ना हुई जलन कुछ इस तरह की ले आया था सीने में मैं पत्थर मोम से पिघले मगर क्यों चश्म ए नम ना हुई अब के सावन…