• जाति है कि जाती नहीं | Jati Pratha par Kavita

    जाति है कि जाती नहीं ( Jati hai ki jaati nahin )    कई सारी ऐसी जातिया है जो यह जाती ही नही, खुशियों के पलों को ये कभी आनें देती ही नही। काश्मीर से लेकर घूम लो चाहें तुम कन्याकुमारी, मंज़िल पर हमको अपनी पहुंचने देती ही नही।। सबसे पहले पूछते है कौन जाती…

  • मेरे पिता जी | Mere Pitaji

    मेरे पिता जी ( Mere pitaji )  मेरे पापा पं. श्री शिवदयाल शुक्ला जी की तृतीय पुण्यतिथि पर उन्हीं की याद में…..   छोड़ के इस जगत् को आप,जाने किस देश में बस गए। सच तो यह है पापा आप,मेरी अंतस यादों में बस गए। जब भी डांट लगाती माॅ॑,पापा बीच में आते थे। कहकर…

  • इस्कॉन | Iskcon

    इस्कॉन! ( Iskcon )   चलो ईश्वर को चलके देखते हैं, एक बार नहीं, हजार बार देखते हैं। सारी कायनात है उसकी बनाई, आज चलो मुक्ति का द्वार देखते हैं। सृजन – प्रलय खेलता है उसके हाथ, चलकर उसका श्रृंगार देखते हैं। आँख से आँख मिलाएँगे उससे, उसका अलौकिक संसार देखते हैं। महकती वो राहें…

  • पिता – एक कल्पवृक्ष | Pita ek kalpavriksha

    पिता – एक कल्पवृक्ष ( Pita ek kalpavriksha )    अपनी कलम से छोटा सा साहस मैंने भी किया है, पिता पर कुछ लिखने का प्रयास मैंने भी किया है। घने वृक्ष के समान पिता होते हैं, जिनके साये में परिवार पलते है , सूरज का होते है वो ऐसा प्रकाश गम के काले बादलों…

  • जुमेरात को | Jumerat ko

    जुमेरात को ( Jumerat ko )    आज धरा ,यह ज़मीं कुछ नाराज सी लगी आसमां से आफाक में न कभी मिले हो ना कभी ढंग से मुझे ढके हो उल्टा पनाह दिए हो आफताब को जो खुद भी आग है ,शोला है और मुझे भी जलाता है झुलसाता है ,नाजुक सी मेरी जान को…

  • मेरे पापा | Mere Papa

    मेरे पापा ( Mere Papa )    कहां चले गए हमें यू अकेला छोड़ के कर पाते कुछ बातें रिश्ते सारे तोड़ के बहतेआंखों के आंसू क्यों नहीं अब पोछते हंसते-हंसते चुपके से हाथ हमारा छोड़ के गम दबा ढूंढ रहे हैं मुस्कुराहट ओढ के तलाशते रहते हैं बेटा कोई हमें कहेl   डॉ प्रीति…

  • पापा | Papa

    पापा ( Papa )    वह झुके नहीं वो रुके नहीं वह मेरी बातों पर देखो हंसकर हां कर जाते थे l गुस्सा होने पर मेरे कैसे पास बुला समझाते थेl सही गलत के भेद बता राह नयी दिखाते थे l मेरी लाडो रानी कहकर मुझे सदा बुलाते थे l नपे तुले शब्दों में बोलो…

  • हाँ मैं एक पुरुष हूं | Purush

    हाॅं मैं एक पुरूष हूॅं ( Han main ek purush hoon )    हाॅं मैं एक पुरूष हूॅं, मेरे परिवार की ज़रूरत हूॅं। मैं क्रूर एवं उग्र नही शान्त रहता हूॅं, अपनें परिवार के बारे में सोचता रहता हूॅं।। रिश्तों को समझता हूॅं, दर-दर भटकता रहता हूॅं। तीन बातों का ख़ास ध्यान रखता हूॅं, रूठना…

  • गंगा जमुनी संस्कृति | Ganga Jamuni Sanskriti

    गंगा – जमुनी संस्कृति! ( Ganga jamuni sanskriti )    लहू न जम जाए, मिलना चाहता हूँ, बुलंदियों से नीचे उतरना चाहता हूँ। घुट रही है दम आजकल के माहौल से, बिना जंग विश्व देखना चाहता हूँ। रावणों की आज भी कोई कमी नहीं, इस तरह की लंका जलाना चाहता हूँ। भले न जला सको…

  • बुद्धिमती नारी | Buddhimati Nari

    बुद्धिमती नारी ( Buddhimati Nari )   नहीं लगती सबको प्यारी! जब भी मुखर, प्रखर दिखती है, तुरंत बन जाती है कुछ आंँखों की किरकिरी। अहं के मारे इन दिलजलों को, सुंदर लगती है मौन व्रत धारित, हांँ में हांँ मिलाती दीन-हीन, बुद्धिहीन नारी- बेचारी! देख-देख खुश, होते रहते हैं शिकारी। जब पड़ने लगते हैं…