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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • जैनियो सावधान.. कर्म की महिमा कम की जा रही है
    आलेख

    जैनियो सावधान.. कर्म की महिमा कम की जा रही है

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    आज तारीख है तीस जनवरी दो हजार पच्चीस.. समय है ब्रह्म मुहूर्त का ओर सहज ही मेरी नींद उचट गयी.. मोबाईल नामक बीमारी हाथ मे ओर नजर थम गई एक वीडियो पर.. एक मुनिराज ( उनके सम्मान में मैं उनका नाम नही लिख रहा हु ) अपने आहार को ले कर घोषणा कर रहे है…

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  • इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो
    ग़ज़ल

    इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करोइस कदर जाने की जल्दी है तो आया मत करो। जानते हम अहमियत अपनी तुम्हारे सामनेतो ये किस्से बेक़रारी के सुनाया मत करो। मुस्कुराने पे बहुत दिलकश लगा करते हो तुममहफिलों में बेवजह तब मुस्कुराया मत करो। एक दूजे के…

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  • 26 वीं वैवाहिक वर्षगांठ
    संस्मरण

    26 वीं वैवाहिक वर्षगांठ

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    सर्वप्रथम अरविंद भैया और स्मिता भाभीजी को 26 वीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर “प्रदीप” की और से प्रणाम! बहुत- बहुत बधाई , शुभकामनाएँ व मंगलकामनाएँ । जीवन के प्रवाहमान में निरन्तर साँसों की तरह रिश्तों को भी उतार- चढ़ाव में पत्थर की ठोकर लगती हैं और विवेक से ख़ुशी का रसनानुवादन भी होता हैं परन्तु यह…

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  • हिन्दी महाकुंभ जबलपुर में महिमायुक्त कवयित्री श्रीमती बसंती ‘दीपशिखा’ जी को सर्वश्रेष्ठ साहित्य व कवयित्री सम्मान
    साहित्यिक गतिविधि

    हिन्दी महाकुंभ जबलपुर में महिमायुक्त कवयित्री श्रीमती बसंती ‘दीपशिखा’ जी को सर्वश्रेष्ठ साहित्य व कवयित्री सम्मान

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    जबलपुर, मध्य प्रदेश। हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित मंच “हिन्दी महाकुंभ जबलपुर” में इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों, साहित्यकारों और कवियों के साथ-साथ कवयित्री, लेखिका एवं सामाजिक चिंतक श्रीमती बसंती ‘दीपशिखा’ को भी “सर्वश्रेष्ठ साहित्य और कवयित्री सम्मान” से अलंकृत किया गया। श्रीमती बसंती दीपशिखा साहित्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र…

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  • गिरे आंखों से आंसु तो क्या
    कविताएँ

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या गिरे आंखों से आंसु तो क्या ,नहीं मिले गले उनके तो क्या ,तराने लिखने मिले थे दो डगर,नहीं लिख सके मिलन गीत तो क्या ,गिरे आंख से आंसू तो क्या …..सभी कदम तरंग की धुन में ,कोई सुने कुछ कोई कुछ मन में ,मिलाते रहे बिंदुओं को रेख में,जिन्हें…

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  • चुनावी हलचल
    कविताएँ

    चुनाव

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    चुनाव सही व्यक्ति को – – – – – – ज्यों ज्यों चुनाव आ रहे हैं।नेताजी लाड़ जता रहे हैं। जातिवाद की दुहाई दे रहे ।खुद चरित्र की सफाई दे रहे । वाणी में मधु घुल गया है।ओठों पै गुलाब खिल गया है। दुखती रगें पहचानते हैं।कैसे संतुष्ट करें जानते हैं ? मर्यादाऐं तोड़ रहे…

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  • क्यों वो देने लगे दग़ा जाने
    ग़ज़ल

    क्यों वो देने लगे दग़ा जाने

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    क्यों वो देने लगे दग़ा जाने क्यों वो देने लगे दग़ा जाने।क्या हुआ,क्या पता, ख़ुदा जाने। जिनका शेवा वफ़ाएं करना था।भूल बैठे वो क्यों वफ़ा जाने। कोई राह़त नहीं अभी तक तो।देखो कब तक चले दवा जाने। जिनसे उम्मीदे-लुत्फ़ होती है।वो ही करते हैं क्यों जफ़ा जाने। बस यही सोच कर तड़पता हूं।क्यों हुए मुझसे…

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  • आते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए
    ग़ज़ल

    आते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    आते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए कोई आता ही नहीं हमको उठाने के लिएआते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए जल न जाए कहीं काशाना मुहब्बत का येलोग बैठे हैं यहाँ आग लगाने के लिए ग़म ही ग़म हमको मिले हैं यहां पे उल्फ़त मेंचश्मे-तर दे गया है कोई नहाने के लिए…

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  • भूरिया तू क्यो बदल गया
    कहानियां

    भूरिया तू क्यो बदल गया

    ByAdmin January 31, 2025January 31, 2025

    भूरिया से मुलाकात करीब दस महीनों पहले हुई थी.. कोरोना ने दस्तक दे दी और दुनिया रुक गयी.. थम गई.. कुछ दिन तो मैं घर मे ही रहा मगर फिर मैंने सांझ होते ही पैदल घूमना शुरू किया.. पैदल.. नंगे पाँव। हर रोज छह किलोमीटर.. एक तय जगह तक रोज जाना और फिर घर लौट…

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  • आपने क्या किया मुहब्बत में
    ग़ज़ल

    आपने क्या किया मुहब्बत में

    ByAdmin January 31, 2025January 31, 2025

    आपने क्या किया मुहब्बत में फ़र्क़ क्या इश्क़ और मशक्कत मेंआपने क्या किया मुहब्बत में हमने पिंजरा बना के तोड़ दियामशगला आ गया है आफ़त में और लोगों को भी सराहो तुमनइं तो फिर बैठ जाओ ख़लवत में वो कोई शै गुज़र बसर की नहींफिर भी शामिल किया ज़रूरत में ख़ुद की सोची तो ताज…

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