• रात सपने में आया कान्हा | Sapne mein Kanha

    रात सपने में आया कान्हा ( Raat sapne mein aaya kanha )    मोहन माधव कान्हा प्यारा, आया स्वप्न में मुरलीहारा। चक्र सुदर्शन धारी गिरधर, रूप चतुर्भुज सुंदर सारा। मोहन माधव कान्हा प्यारा पीतांबर धारी बनवारी, सर पे सोहे मोर मुकुट भारी। अधरो पर मुरलिया धारी, जय गोविंदा जय गिरधारी। उठो आज कोई गीत सुना…

  • काफिले में भी सफर तन्हा | Safar Tanha

    काफिले में भी सफर तन्हा ( Kafile mein bhi safar tanha )    रोज सजती है महफिले जहां, रोज कारवां चलता है। रोज कलम करतब दिखाती, शब्दों का मेला लगता है। काफिले में भी हो सफर तन्हा, कलमकार रह जाता है। एक आह दिल से निकले, गजरा गीतों का हो जाता है। काफिले में भी…

  • लिखेंगे हम लेखनी की धार | lekhni ki Dhaar

    लिखेंगे हम लेखनी की धार ( Likhenge hum lekhni ki dhaar )   हम पैसे देकर रचना सुनो कभी नहीं छपवाएंगे। दम होगा लेखनी में प्रकाशक खुद चले आएंगे। लिखेंगे हम भी लेखनी की धार लोहा मनवाएंगे। सृजन में शक्ति बड़ी अपार वो रस धार बहाएंगे। सजाकर पुष्प भावों के हम गुलशन महकाएंगे। दिलों तक…

  • पातुक | Patuk par Kavita

    पातुक ( Patuk )    नशें में बेसुध आदमी की बगल में पड़े बोतल पव्वों को कचरा बिननें वाले ने उठाकर रखा अपनी पीठ पीछे लदे प्लास्टिक के झोले में तो सभी बोतल पव्वे ठहाके लगाकर हँसने लगे एक पव्वा कहने लगा देखो… देखो… ये है नशेड़ी आदमी की औकात जिसको लांघकर व लताड़कर निकल…

  • बनारस भाग-२ | Poem on Banaras

    बनारस भाग-२ ( Banaras )   ब्रह्मा, विष्णु सदा विराजें, करता है गुणगान बनारस। बँधती गँठरी पुण्य की देखो, सुख की है खान बनारस। दोष-पाप सब दूर है करता, ऐसा है वो घाट बनारस। खल-कामी,लोभी- अज्ञानी, इन सबका है काट बनारस। गंगा की लहरों में जीवन, शीतल-मंद-सुगंध बनारस। कल्- वृक्ष के जैसा है वो, ऋषि,मुनि…

  • टूटकर फूल डाली से | Phool par Kavita

    टूटकर फूल डाली से ( Toot kar phool daali se )    टूटकर फूल डाली से गिरा जब चमन में बगिया हर्षित हुई थी भाव उमड़े मन में खुशबुओं को यूं समेटे समाए हो तन में चेहरे की हो मुस्कान उमंग सारे बदन में टूटकर फूल ना फूली समाई थी जब दुनिया ये सारी फूल…

  • किसी की बेवफाई में | Shayari on Bewafai

    किसी की बेवफ़ाई में ( Kisi ki bewafai mein )    ख़ुदाया ये बता क्या ख़ास है तेरी ख़ुदाई में यहां हर शख़्स मुज़रिम है किसी की बेवफ़ाई में। अग़र बातें करूं दिल की बदल देते सनम मौज़ू हमें ये लग रहा वो ख़ुश बड़े हमसे जुदाई में सबक हमको सिखाते दीन का ख़ुद को…

  • रामदुलारे | Ram Dulare

    रामदुलारे ( Ramdulare )    घट घट में श्री राम बिराजे रोम रोम श्रीराम है। राम सेवा में आतुर रहते रामभक्त हनुमान है। रामदुलारे अंजनी लाला पवन पुत्र हनुमान है। सीना चीर दिखा सकते राम-राम में ध्यान है। आराध्य श्रीराम प्रभु है जग के पालनहार है। ध्यान लगा लो श्रीराम का सृष्टि के करतार है।…

  • जगत के पालक श्रीराम | Poem in Hindi on Shri Ram

    जगत के पालक श्रीराम ( Jagat ke palak Shri Ram )   जगत के पालक श्रीराम सृष्टि संचालक श्रीराम भक्त प्रति पालक श्रीराम शक्ति चालक श्रीराम घट घट में प्रभु राम विराजे तारण हारे श्रीराम रोम रोम में राम बसे हैं सबके प्यारे हैं श्रीराम दीन दयाला दया सिंधु करुणा के सागर श्रीराम तिर जाते…

  • आओ अस्पताल बनवाएं | Hospital par Kavita

    आओ अस्पताल बनवाएं ( Aao aspatal banaye )    आओ मिलकर नेक कार्य ऐसा हम ये कर जाएं, सबके लिए सार्वजनिक यह अस्पताल बनवाएं। जहां होगा हर रोगी की बीमारियों का ये ईलाज, हर एक व्यक्ति दिन रात देगा सबको वो दुआएं।। कदम-उठाकर कदम-मिलाकर बीड़ा ये उठाओ, अपनें हो चाहें पराये सभी का जीवन ये…