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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Sahitya Samaj par Kavita
    कविताएँ

    समय के साथ साहित्य समाज बदलता है | Sahitya Samaj par Kavita

    ByAdmin March 18, 2023

    समय के साथ साहित्य समाज बदलता है ( Samay ke sath sahitya samaj badalta hai )    वक्त के साथ बदल जाती है सब की जीवनधारा। समय के साथ साहित्य बदले संग समाज हमारा। बदल रहे हैं तौर-तरीके बदला अपनापन प्यारा। बदल रही शिक्षा नीति सभ्यता संस्कार हमारा। बदल रही सब बयार बसंती स्नेह सुधा…

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  • Chita par Kavita
    कविताएँ

    बिन चिता के ही चिता की सी तपन | Chita par Kavita

    ByAdmin March 18, 2023

    बिन चिता के ही चिता की सी तपन ( Bin chita ke hi chita ki si tapan )    बिन चिता के ही चिता की सी तपन हो गई। जल उठी देह सारी आग सी अगन हो गई। बिन पीर के ही हमें पीर की सी जलन हो गई। शब्द बाण ऐसे चले शंका सारी…

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  • Hindi Poem on Zindagi
    कविताएँ

    जिंदगी जब हम जीने लगे | Hindi Poem on Zindagi

    ByAdmin March 17, 2023March 18, 2023

    जिंदगी जब हम जीने लगे ( Zindagi jab hum jeene lage )    जिंदगी जब हम जीने लगे गम के घूंट थोड़े पीने लगे अश्रु टपके नयन से हमारे अपनो को वो पसीने लगे जिंदगी जब हम जीने लगे लबों को धीरे से सीने लगे बातों में वजन कितना है साबित होने में महीने लगे…

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  • Maa
    छंद

    मां | Maa ke Upar Poem

    ByAdmin March 17, 2023March 18, 2023

    मां ( Maa )   मोती लुटाती प्यार के, ठंडी आंचल की छांव। सुख तेरे चरणों में, उमड़े आठों पहर। प्रेम की मूरत माता, तुम हो भाग्यविधाता। प्रथम गुरु जननी, तुम ज्ञान की लहर‌। खुशियों का खजाना हो, हौसला उड़ान मेरी। सर पर हाथ तेरा, बरसे तेरी महर। सारे तीर्थों का सार हो, सृष्टि का…

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  • Asli Hero
    कहानियां

    असली हीरो | Hindi Laghu Katha

    ByAdmin March 17, 2023March 18, 2023

    असली हीरो ( Asli Hero )    रीमा ट्रेन में बैठी अपने ख्यालों में खोई हुई थी तभी स्टेशन आया। एक आर्मी वाला अपने बच्चों और पत्नी को हाथ हिलाते हुए ट्रेन में अंदर आ गया। मगर यह क्या साथ वाला फौजी रोने लगा l तभी एक बूढ़े से चाचा जी जो सामने बैठे थे…

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  • Poem in HIndi on Aashiqui
    कविताएँ

    आशिकी | Poem in Hindi on Aashiqui

    ByAdmin March 17, 2023March 17, 2023

    आशिकी !   आजकल मुझको फिर से सताने लगे, रात को मेरे सपनों में आने लगे। मेरी चढ़ती जवानी का है ये असर, अपने घर का ही रस्ता भुलाने लगे। आजकल मुझको फिर से सताने लगे, रात को मेरे सपनों में आने लगे। रफ़्ता-रफ़्ता ये जीवन भी कट जाएगा, टूटे मौसम भी फिर से सुहाने…

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  • Kavita Sant Sangati
    कविताएँ

    संत संगति | Kavita Sant Sangati

    ByAdmin March 17, 2023

    संत संगति ( Sant sangati )    सज्जन साधु संगत कर लो बेड़ा पार हो जाएगा। बिनु सत्संग विवेक नहीं उजियारा कैसे आएगा। संत सुझाए राह प्रेम की हरि मिलन विधि सारी। मंझधार में अटकी नैया हो पतवार पार संसारी। दीप जलाए घट घट में करें ज्ञान ज्योति आलोक। दिव्य प्रभा सुखसागर सी जीवन को…

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  • Tum Apne Lagte ho
    गीत

    गैरों में तुम अपने लगते हो | Geet Tum Apne Lagte ho

    ByAdmin March 16, 2023

    गैरों में तुम अपने लगते हो ( Gairon mein tum apne lagte ho )    मनमोहक चितचोर कहूं, मस्त सुरीले सपने लगते हो। दिल के जुड़े तार प्रेम के, गैरों में तुम अपने लगते हो। गैरों में तुम अपने लगते हो प्रेम सद्भावों की नेहधारा, मीठे मीठे बोल मधुर से। मोहक मुस्कान लबों की, झरते…

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  • Kavita Mujhe Guroor hai
    कविताएँ

    मुझे गुरूर है कि | Kavita Mujhe Guroor hai

    ByAdmin March 16, 2023

    मुझे गुरूर है कि ( Mujhe guroor hai ki )    मुझे गुरूर है कि मैं भारत देश का वासी हूं। लेखनी का दीप जलाता हरता हर उदासी हूं। लुटाता प्यार के मोती शब्दों की बहारों से। खुशियां ढूंढता रहता हंसी चेहरों नजारों में। मुझे गुरूर है बिटिया का पिता हूं मैं प्यारा। महके आंगन…

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  • Poem in Hindi on Aurat
    कविताएँ

    औरत | Poem in Hindi on Aurat

    ByAdmin March 16, 2023

    औरत! ( Aurat )    घर को घर देखो बनाती है औरत, रंग – बिरंगे फूल खिलाती है औरत। न जाने कितने खेले गोंद में देवता, उम्रभर औरों के लिए जीती है औरत। लाज- हया धोकर कुछ बैठे हैं देखो, कभी-कभी कीमत चुकाती है औरत। जिद पर आए तो जीत लेती है मैदान, झाँसी की…

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