• पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला | Parvat parvat shikhar shrinkhala

    पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला ( Parvat parvat shikhar shrinkhala )   पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला, मेघ दिखे घनघोर घटा। अवनि को अम्बर ने देखा,प्रेम मिलन की प्रथम छंटा। आएगी ऋतु बार बार पर, प्रियतम बोलो कब आओगे, कल कल छल छल निर्मल जल,सागर मे मिलती खोल जटा।   उपरोक्त कविता सुनने के लिए ऊपर के…

  • सबसे जुदा अपनी अदा | Sabse juda apni ada | Kavita

    सबसे जुदा अपनी अदा ( Sabse juda apni ada )   सबसे जुदा अपनी अदा लगे मनभावन सी। इठलाती बलखाती और बरसते सावन सी।   हंसता मुस्कुराता चेहरा अंदाज निराला है। खुशियों में झूमता सदा बंदा मतवाला है।   मदमस्त चलता चाल मनभावन से नजारे हैं। सारी दुनिया से हटकर नखरे उसके न्यारे हैं।  …

  • वक्त | Poem waqt

    वक्त ( Waqt )   वक्त से ना बड़ा कोई पहले हुआ, वक्त से ना बड़ा कोई हो पायेगा। वक्त से कोई पहले हँस ना सका, वक्त से कोई पहले ना रो पायेगा।।   ना किसी के लिए रुका है कभी ना किसी के लिए झुका है कभी उसके अंतस में क्या है समझ न…

  • आई मस्त बहारें | Poem aayi mast baharen

    आई मस्त बहारें ( Aayi mast baharen )   लो आई मस्त बहारें, गली-गली द्वारे द्वारे। सावन के झूले लगे, झूम झूम नाचे सारे।   हर हर महादेव, हे सब देवों के देव। जग के है करतार, वो भोलेनाथ हमारे।   सावन बरसे पानी, रिमझिम झड़ी लगे। घटाएं गगन छाए, मस्तानी चले बयारें।   उर…

  • कितने कर चुकाये | Kitne kar chukaye

    कितने कर चुकाये ( Kitne kar chukaye )   आयकर खाय कर खरीद कर पक गए आम आदमी यहां कर चुकाते थक गए   भूमिकर मकान कर संग दुकान कर दे दिया कितना कमाया उसका भी कर ले लिया   खरीद कर बेच कर सेवा कर रुक गए कितने कर चुकाये कर चुकाते थक गए…

  • रुग्ण जीवन | Poem rugn jeevan

    रुग्ण जीवन ( Rugn Jeevan )   इस रूग्ण जीवन का मेरे विस्तार है, हर शक्स ही मेरा यहाँ उस्ताद है।   समझो अगर तो वाह ना तो आह है, अब जिन्दगी से जंग ही किताब है॥   जो कागजो पे ना लिखा वो बात हैं, शिक्षा बिना भी क्या कोई इन्सान है।   कर…

  • गुरु नमन | Guru par kavita

    गुरु नमन ( Guru Naman )   गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है। सारे जहां की खुशी मिल गई है।। अनमोल मोती भरा सिंधु सारा। दमकता सूरज गुरु भाग्य सितारा।। मिले वरदहस्त किस्मत खुल गई है। गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।। अंगुली पकड़कर रास्ता दिखलाया। दुनिया का अनुभव हमें बतलाया।। जलाया ज्ञान…

  • वर्षा भैया भारी | Varsha bhaiya bhari

    वर्षा भैया भारी ( Varsha bhaiya bhari )   शाम  शाम  के  होन  लगी  है  वर्षा  भैया भारी, जगह जगह पे छिपन लगे है सबरे नर और नारी।   कहीं हवाये, कहीं है बिजली, कहूँ बरसो है भारी, एसो  मौसम  देख  देख  के  हमरो  दिल है भारी।   हो रहो हैरान किसान हमारो आंतक मच…

  • भाग्यहीन | Poem bhagyaheen

    भाग्यहीन ( Bhagyaheen )   कहाँ गए रणछोड द्रौपदी, पर विपदा अब भारी है। रजस्वला तन खुले केश संग,विपद में द्रुपद कुमारी है।   पूर्व जन्म की इन्द्राणी अब,श्रापित सी महारानी है। पांच महारथियों की भार्या, धृत की जीती बाजी है।   हे केशव हे माधव सुन लो,भय भव लीन बेचारी है। नामर्दो की खुली…

  • दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

    दिल का बहकना ( Dil ka bahakna )   मनहरण घनाक्षरी   दिलकश हो नजारे, कोई हमको पुकारे। लगे स्वर्ग से सुंदर, महकती वादियां।   दिल दीवाना हो जाए, दिल कहीं पे खो जाए। प्रीत के तराने गाये, मन भाये शादियां।   झूम उठे तार सारे, बोल मीठे प्यारे प्यारे। दिल की धड़कनों में, बज…