• हंसना मना है | Kavita hasna mana hai

    हंसना मना है ( Hasna mana hai )   मोबाइल टीवी चलाओ चाहे कूलर की हवा खाओ बाहर धूप में मत जाओ सच कहता हूं मान जाओ   हजारों बीमारियां है वातावरण कुछ ऐसा बना है मेरी तो बस राय यही समझो देखो हंसना मना है   बैठे-बैठे संगीत सुनलो ताना-बाना कोई बुन लो लेखक…

  • धरती | Muktak dharti

    धरती ( Dharti )   धरा मुस्कुराई गगन मुस्कुराया। खिल गए चेहरे चमन हरसाया। बहती बहारों में खुशबू यू आई। धरती पर चांद उतरकर आया।   धरती अंबर चांद सितारे। हिल मिलकर रहते सारे। वीर तिलक करके माटी का। पूजे माता चरण तुम्हारे।   कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान ) यह…

  • मजदूर | Poem mazdoor

    मजदूर ( Mazdoor ) मजदूर दिवस पर रचना   मुश्किल से टकराता है मेहनत को वो अपनाता है गरम तवे की रोटी खातिर परदेस तलक वो जाता है   हाथों का हुनर रखता है वो महल अटारी करने को खून पसीना बहा देता पेट परिवार का भरने को   मजदूर आज मजबूर हुआ महंगाई की…

  • आमा | Aama

    आमा ( Aama ) ‌ ‌। सम्पूर्ण आमाहरु मा समर्पित। ।   आमा त्यि ‌झ्याल हुन्, जसबाट एक अबोध शिशुले पहिलो पटक दुनियालाई हेर्छ। शिशु आमाको त्यो अंश हो,‌ जुन आमाको स्वांस नली देखी हृदय हुदै जिवनको केन्द्र सम्म पुग्छ। आमा मातृत्वको अभिरुप मात्रै नभइकन शिशुको जिवन स्वरुप पनि हो। आमा प्रकृतिका त्यि बरदान हुन्,…

  • हंसना भी छोड़ दी मैंने | Poem hansana bhi chhod di maine

    हंसना भी छोड़ दी मैंने ( Hansana bhi chhod di maine )   1. हँसना भी छोड़ दी हँसना भी छोड़ दी मैने, रोना भी छोड़ दी मैने। कैसे कटेगी जिन्दगी, कहना भी छोड़ दी मैने। जिसको बनाया अपना मैने,उसके भी फायदे रहे, जा जिन्दगी तुमे अपना,कहना भी छोड़ दी मैने।   2. उसको खबर…

  • जीवन की आधारशिला | Poem jeevan ki aadharshila

    जीवन की आधारशिला ( Jeevan ki aadharshila )     सत्य सादगी सदाचार है जीवन की आधारशिला। सद्भाव प्रेम से खिलता हमको प्यारा चमन मिला।   पावन पुनीत संस्कार ही संस्कृति सिरमौर बने। सत्य शील आचरणों में मानवता के जो गहने।   जब दिलों में प्रेम बरसता चेहरों पर मुस्काने हो। राष्ट्रप्रेम की अलख जगाते…

  • ले हाथों में इकतारा | Geet le hathon mein iktara

    ले हाथों में इकतारा ( Le hathon mein iktara )   गली-गली घुमा करता ले हाथों में इकतारा। सात सुरों के तार जोड़ संगीत सुनाता प्यारा। शब्द शब्द मोती से झरते बहती जब रसधारा महफिल में भी तन्हा रहता मनमौजी बंजारा। ले हाथों में इकतारा   प्रेम गीत के मधुर तराने ले अनुबंधों की माला।…

  • बड़े बुजुर्गों का सम्मान कीजिए | Poem bade bujurgon ka samman kijiye

    बड़े बुजुर्गों का सम्मान कीजिए ( Bade bujurgon ka samman kijiye )     माता, पिता, बड़े बुजुर्गों का सम्मान कीजिए, अपने बच्चों को बंगला न कार ,संस्कार दीजिए,   कल मैंने देखा तीन लड़कियों को पार्क में, मोबाइल  का दौर है इन्हे ,सुधार लीजिए,   करते हैं लड़के चैटिंग रात रात गर्लफ्रेंड से फिर…

  • छोड़ दो लड़ना | Poem chod do ladna

    छोड़ दो लड़ना ( Chod do ladna )   गोलियां पत्थर चले है देखो  ऐसे बेपनाह हो गये है नाम पर महजब के दंगे बेपनाह   मासूमों के जिस्म पर थे जालिमों के ही नशा दिल्ली की हर गली में दर्द छलका बेपनाह   कौन जाने क्या यहाँ होगा भला अब ऐ लोगों घूम  रहे…

  • तुलसीदास जी | Chhand Tulsidas Ji

    तुलसीदास जी ( Tulsidas Ji ) मनहरण घनाक्षरी   तुलसी प्यारे रामजी, राम की कथा प्यारी थी। प्यारा राम रूप अति, रामलीला न्यारी थी।   राम काव्य राम छवि, नैनों में तुलसीदास। रामचरितमानस, राम कृपा भारी थी।   चित्रकूट चले संत, दर्शन को रघुनाथ। रामघाट तुलसी ने, छवि यूं निहारी थी।   राम नाम रत…